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कैथल में सिटी बस सेवा की मांग अधूरी
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sat, 15 Feb 2014 12:24 AM IST
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दस सालों से विद्यार्थी, कर्मचारी, मजूदर और आम आदमी शहर में सिटी बस सेवा शुरू करने के मांग कर रहा है। लोगों की इस मांग पर न तो सरकार और न ही किसी राजनीतिक दल ने कोई दिलचस्पी दिखाई है। राजनेता चुनावों के समय घर-घर प्रचार करने पहुंचे, लेकिन किया कुछ भी नहीं।
जिलेभर से 20 हजार छात्र-छात्राएं प्रतिदिन गांवों से शहर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। शहर में सिटी बस सेवा न होने के कारण विद्यार्थियों और कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षण संस्थानों की बस अड्डे से 2 से 3 किलोमीटर की दूरी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ऑटो चालक अपनी मनमर्जी से किराया वसूलते हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य सतीश कुमार कक्कड़ ने बताया कि विभिन्न गांवों से लगभग 150 विद्यार्थी विद्यालय में पढ़ने के लिए आ रहे हैं।
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सभी विद्यार्थियों के बस पास भी है, लेकिन स्कूल से नए बस स्टैंड तक जाने के लिए प्रतिदिन विद्यार्थियों को ऑटो से आने-जाने में 20 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। काफी विद्यार्थी गरीब तबके से हैं। विद्यार्थी बस स्टैंड से पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करके स्कूल पहुंचते हैं।
विकास गुगलानी ने कहा कि कर्मचारी, आम आदमी और विद्यार्थियों के लिए सिटी बस सेवा बहुत अनिवार्य है। जिले में जो विद्यार्थी राजकीय कॉलेज, एसीटीएम कॉलेज, एनआईआईएलएम यूनिवसिर्टी में पढ़ते हैं, उन्हें सुविधा जरूरी मिलनी चाहिए।
विकास कुमार गांधी ने कहा कि ऑटो चालकों ने थोड़ी-थोड़ी दूरी के लिए किराये बहुत ज्यादा फिक्स कर रखे हैं। ऑटो में एक बार बैठकर उतरने के भी दस रुपये वसूले जा रहे है। इससे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
धर्मपाल प्रजापति पेंटर ने कहा कि जिले में सिटी बस सेवा की मांग करीब 10 वर्षों से चली आ रही है। सिटी बस सेवा नहीं होने के कारण शहरवासियों के साथ-साथ अन्य लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अध्यापक विजय कुमार चावला ने कहा कि अगर शहर में सिटी बस सेवा आरंभ हो जाती है, जो जिले के करीब हजारों लोगों को प्रतिदिन आने-जाने में लाभ होगा और सरकार को राजस्व भी मिलेगा।
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जिलेभर से 20 हजार छात्र-छात्राएं प्रतिदिन गांवों से शहर के शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। शहर में सिटी बस सेवा न होने के कारण विद्यार्थियों और कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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शिक्षण संस्थानों की बस अड्डे से 2 से 3 किलोमीटर की दूरी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ऑटो चालक अपनी मनमर्जी से किराया वसूलते हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य सतीश कुमार कक्कड़ ने बताया कि विभिन्न गांवों से लगभग 150 विद्यार्थी विद्यालय में पढ़ने के लिए आ रहे हैं।
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सभी विद्यार्थियों के बस पास भी है, लेकिन स्कूल से नए बस स्टैंड तक जाने के लिए प्रतिदिन विद्यार्थियों को ऑटो से आने-जाने में 20 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। काफी विद्यार्थी गरीब तबके से हैं। विद्यार्थी बस स्टैंड से पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करके स्कूल पहुंचते हैं।
विकास गुगलानी ने कहा कि कर्मचारी, आम आदमी और विद्यार्थियों के लिए सिटी बस सेवा बहुत अनिवार्य है। जिले में जो विद्यार्थी राजकीय कॉलेज, एसीटीएम कॉलेज, एनआईआईएलएम यूनिवसिर्टी में पढ़ते हैं, उन्हें सुविधा जरूरी मिलनी चाहिए।
विकास कुमार गांधी ने कहा कि ऑटो चालकों ने थोड़ी-थोड़ी दूरी के लिए किराये बहुत ज्यादा फिक्स कर रखे हैं। ऑटो में एक बार बैठकर उतरने के भी दस रुपये वसूले जा रहे है। इससे आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
धर्मपाल प्रजापति पेंटर ने कहा कि जिले में सिटी बस सेवा की मांग करीब 10 वर्षों से चली आ रही है। सिटी बस सेवा नहीं होने के कारण शहरवासियों के साथ-साथ अन्य लोगों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अध्यापक विजय कुमार चावला ने कहा कि अगर शहर में सिटी बस सेवा आरंभ हो जाती है, जो जिले के करीब हजारों लोगों को प्रतिदिन आने-जाने में लाभ होगा और सरकार को राजस्व भी मिलेगा।