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मृत मुर्गों से भरा टेंपू चिकन शॉप में खपाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 02:30 AM IST
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cime
अगर आप चिकन के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए। कारण कि पोल्ट्री फार्म से मृत मुर्गों की खेप शहर में चिकन शॉप तक पहुंच रही है। वहीं दुकानदार भी इससे बने व्यंजन परोसकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। बुधवार को इस तरह का मामला सामने आया। इसके बाद यह सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि किस तरह से बोरों में ठूंस ठूंसकर मृत मुर्गों को रखा गया है और दुकानों में उसकी आपूर्ति की जा रही है। वहीं जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे हुए हैं, यही नहीं मामला सामने आने के बाद भी किनारा करने में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के मुर्गे खतरनाक रोगों का कारण बन सकते हैं।
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बुधवार की सुबह कैथल रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के समीप बनी एक चिकन शॉप के सामने मृत मुर्गों से भरा टेंपो पहुंचा। कुछ मृत मुर्गे खाद के खाली बैग में भी भरे हुए थे। टेंपू में काले पालिथीन की तिरपाल में मुर्गे लपेटकर लाए गए। उसके बाद उन्हें दुकान में भर लिया गया। सुबह के समय सुनसान इलाका होने के कारण किसी को इसकी भनक नहीं लगी। दोपहर बाद इस शॉप से ग्राहक कच्चा चिकन खरीदकर ले जाते दिखाई दिए। इस मार्केेट में करीब दस चिकन शॉप हैं। बताया जा रहा है कि मृत मुर्गे केवल एक ही दुकान में ले जाए गए। करनाल शहर में कई जगह चिकन शॉप हैं। इनमें मुर्गा व चिकन रखने के नियम हैं, लेकिन जिम्मेदारी अधिकारी कभी इसकी जहमत नहीं उठाते हैं। सूत्रों के अनुसार यह कोई एक दिन का खेल नहीं है, बल्कि आए दिन शहर में मृत मुर्गे की खेप पहुंचती है, जिसे कई होटलों और दुकानों में सप्लाई किया जाता है। यह काम अलसुबह या रात के अंधेरे में किया जाता है। जरूरत पड़ने पर दिन में भी मुर्गा सप्लाई किया जा रहा है। यह मुर्गे पोल्ट्री फार्म में किसी बीमारी या अन्य कारण से मरे होते हैं। चिकन शॉप में मुर्गा साफ कर कच्चा चिकन से अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाते हैं। खाने वालों को यह पता नहीं चल पाता कि शॉप में मुर्गा जिंदा लाया गया था या मृत। सफाई करके कांटे पर तोलकर चिकन ग्राहक को बेचा जा रहा है। जिम्मेदार विभाग मामले से अनभिज्ञ हैं, जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ सकता है।
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विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सुनिए
इस संबंध में सिविल सर्जन डा. अश्विनी कुमार आहुजा का कहना है कि इस मामले में फूड सेफ्टी ऑफिसर कार्रवाई करते हैं। वही सैंपल भरते हैं। दूसरी ओर फूड सेफ्टी आफिसर श्यामलाल का कहना है कि उनका हाल ही में करनाल से ट्रांसफर हो गया है। नए एफएसओ ही इस मामले में कुछ बता सकेंगे। लाइसेंसिंग अथॉरिटी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डीओ ओमकुमार का कहना है कि मीट प्रोडक्ट नगर निगम के अधीन हैं। करनाल में एफएसओ ने मंगलवार को ज्वाइन किया है। उनके पास नए एफएसओ का नाम व फोन नंबर की जानकारी नहीं है।
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नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर सुरेंद्र चोपड़ा का कहना है कि कुछ समय पहले मार्केट में घटिया उत्पाद की रिपोर्ट मिली थी। उन्होंने जांच की थी और दुकानों के बाहर रखा सामान अंदर करवाया था। नगर निगम में हेल्थ आफिसर की पोस्ट खाली है। मीट के सैंपल लेने का अधिकार सिविल सर्जन को है। यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम मौका निरीक्षण करे तो वह उनके साथ जाने को तैयार हैं। सैंपल लेने की पावर उनके पास नहीं।

जानलेवा साबित हो सकता है मरा मुर्गा : डा. गोगी
होम्योपैथिक चिकित्सक डा. एमएम सिंह गोगी का कहना है कि मरा हुआ मुर्गा कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कारण कि मुर्गा कुछ खाने से मरा, बीमारी या इंफ्लूएंजा से यह किसी और वजह से। यह जांच के बाद ही पता चल सकता है कि वह कितना खतरनाक है। आमतौर जिंदा चिकन व मरे हुए मुर्गे के खाने के स्वाद में भी अंतर होता है। मृत मुर्गे में हड्डियां चिकन छोड़ देती हैं जिससे बदबू पैदा होती है। ऐसा मुर्गा शरीर में जहरी तत्व पैदा करता है। इसके सेवन से इंसान को हाई ब्लड प्रेशर, कब्ज व तेजाब बढ़ने सहित शरीर में कई दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यदि इस तरह के मृत मुर्गे को एक-दो दिन फ्रीजर में लगाया हो तो उसमें और अधिक टॉक्सिक बढ़ जाते हैं। उसके खाने से शरीर में इतने बैक्टीरिया फैल जाते हैं कि बीमारियां जल्दी ठीक नहीं होती। बीमारी से ग्रसित मुर्गा हो तो वह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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