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गांव चौरा में तनाव बरकरार
करनाल
Updated Tue, 31 Dec 2013 12:40 AM IST
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गांव चौरा में शिवम आत्महत्या के मामले में गांव के सरपंच को गिरफ्तार करने पर पूरा गांव एकजुट हो गया है और गांव में तनाव की स्थिति बनी है। दुकानदारों ने पूरा दिन बाजार बंद रखकर विरोध जताया।
स्थिति को काबू करने के लिए सोमवार को गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मामले की जांच के लिए जिला पुलिस अधीक्षक शंशाक आनंद और डीएसपी जोगिंद्र राठी गांव में पहुंचे, वहीं घरौंडा सरपंच एसोसिएशन के 11 सरपंच बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। सरपंचों ने सोमवार को सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जिला परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अशोक मित्तल ने भी सरपंचों का समर्थन कर दिया है और वे भी हड़ताल पर बैठ गए हैं। गांव चौरा निवासी रामपाल के पुत्र शिवम ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने आत्महत्या के लिए मजबूर करने के लिए गांव के सरपंच सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाया था।
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पुलिस कई दिन से इस मामले की जांच में जुटी हुई थी। लेकिन मृतक के परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने सरपंच को गिरफ्तार करने व उसकोे सस्पेंड की मांग को लेकर थाने का घेराव भी किया था। परिजनों ने जांच अधिकारी डीएसपी को बदलने की मांग की थी। पुलिस अधिकारियों ने जांच की जिम्मा डीएसपी कैथल सुरेंद्र भौरिया को सौंप दिया था। डीएसपी ने कई दिन पूर्व पीड़ित पक्ष के बयान विश्राम गृह पर दर्ज किए थे। परिजनों ने सरपंच के खिलाफ एक सीडी सौंपी थी। लेकिन इसके बावजूद पीड़ित लोगों ने सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर करनाल में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
पुलिस ने सरपंच राजेंद्र को जांच के लिए कैथल बुलाया था और उसको वहीं पर हिरासत में ले लिया था। सरपंच को हिरासत में लेने की सूचना जैसे ही ग्रामीणों व ब्लॉक के सरपंचों को मिली तो उन्होंने उनके रिहाई के लिए करनाल के एसपी करनाल से मिले। सरपंचों ने आरोप लगाया था कि एसपी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके विरोध मे घरौंडा सरपंच एसोसिएशन ने बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
यह सरपंच बैठे भूख हड़ताल पर
भूख हड़ताल के दूसरे दिन एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह राणा, राजेंद्र सिंह बस्ताडा, कुलदीप राणा, हवासिंह, मेघराज, जयभगवान, नरेश राणा, रमेश वर्मा, प्रवीण कुमार, जसबीर सिंह सरपंच भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके साथ अन्य गांवों के सरपंच भी धरने पर बैठे हैं। सरपंचाें ने सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सरपंचों ने सरपंच राजेंद्र की रिहाई के साथ-साथ एसपी को बदलने की मांग की। सोमवार को सरपंचों के पक्ष में जिला परिषद के कार्यवाहक चेयरमैन अशोक मित्तल भी धरने पर बैठ गए हैं। उन्होेंने कहा कि सरपंच राजेंद्र की साथ पुलिस ने गलत किया है, अगर पुलिस को जांच सही तरीके से करनी चाहिए थी।
डीएसपी सुरेंद्र भौरिया ने सरपंच को कैथल बुलाकर हिरासत में लेकर गलत कार्य किए हैं। उन्होेंने कहा कि अगर प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई होने लगी तो पंचायती राज का कोई महत्व ही नहीं रहेगा। उन्होंने सरपंच को तुरंत रिहा करने की मांग की। वहीं मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए एसपी शंशाक आनंद, डीएसपी जोगिंद्र राठी, भारती मोर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने गांव में मृतक पीड़ित पक्ष के घर पहुंचे और उनके बयान दर्ज किए। बाद में पीड़ित परिवार के विरोध में उतरे उसी समाज के लोगों ने पुलिस अधीक्षक को सरपंच को निर्दोष बताया ।
एसपी के गांव में पहुंचे की सूचना मिलते ही पूरा गांव की महिला, पुरुष व दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने चौपाल में पहुंच गए। बाद में एसपी शंशाक आनंद सरपंच पक्ष के लोगों से मिले और उनके बयान दर्ज किए। एसपी ने ग्रामीणों का आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी, अगर जांच में सरपंच निर्दोष पाया गया तो उनको रिहा किया जाएगा। बाद में एसपी बीडीपीओ कार्यालय में पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठे सरपंचों से मिले। पीड़ित पक्ष के समाज के परिवार का विरोध उसी के समाज ने करना शुरू कर दिया है और उन्होंने सरपंच को निर्दोष बताया। उनके समाज के शुगन चंद, ईश्वर, जिले राम, पृथी आदि लोगों ने एसपी के समक्ष गांव के सरपंच को निर्दोष बताया।
सरपंच के पक्ष में उतरे दूसरे ब्लॅाक के सरपंच
गांव चौरा के सरपंच राजेंद्र की रिहाई के लिए बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे सरपंचों के पक्ष में करनाल सहित अन्य कई ब्लॉक के सरपंच भी धरने पर पहुंचे गए हैं और उन्होंने भी धरने पर बैठ कर सरपंच की रिहाई की मांग की है। घरौंडा सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह राणा ने कहा कि सरकार पंचायती राज को मजबूत करने के लिए बल दे रही है, वहीं दूसरी ओर गांव में प्रतिनिधियों पर पुलिस झूठे मुकदमे बनाकर जेल में भेज रही है। सरपंचों के ऐलान कर दिया कि जब तक सरपंच राजेंद्र की रिहाई नहीं होती तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी और पंचायताें के सभी कामकाज ठप रहेंगे।
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स्थिति को काबू करने के लिए सोमवार को गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मामले की जांच के लिए जिला पुलिस अधीक्षक शंशाक आनंद और डीएसपी जोगिंद्र राठी गांव में पहुंचे, वहीं घरौंडा सरपंच एसोसिएशन के 11 सरपंच बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। सरपंचों ने सोमवार को सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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जिला परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अशोक मित्तल ने भी सरपंचों का समर्थन कर दिया है और वे भी हड़ताल पर बैठ गए हैं। गांव चौरा निवासी रामपाल के पुत्र शिवम ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने आत्महत्या के लिए मजबूर करने के लिए गांव के सरपंच सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाया था।
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पुलिस कई दिन से इस मामले की जांच में जुटी हुई थी। लेकिन मृतक के परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने सरपंच को गिरफ्तार करने व उसकोे सस्पेंड की मांग को लेकर थाने का घेराव भी किया था। परिजनों ने जांच अधिकारी डीएसपी को बदलने की मांग की थी। पुलिस अधिकारियों ने जांच की जिम्मा डीएसपी कैथल सुरेंद्र भौरिया को सौंप दिया था। डीएसपी ने कई दिन पूर्व पीड़ित पक्ष के बयान विश्राम गृह पर दर्ज किए थे। परिजनों ने सरपंच के खिलाफ एक सीडी सौंपी थी। लेकिन इसके बावजूद पीड़ित लोगों ने सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर करनाल में भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
पुलिस ने सरपंच राजेंद्र को जांच के लिए कैथल बुलाया था और उसको वहीं पर हिरासत में ले लिया था। सरपंच को हिरासत में लेने की सूचना जैसे ही ग्रामीणों व ब्लॉक के सरपंचों को मिली तो उन्होंने उनके रिहाई के लिए करनाल के एसपी करनाल से मिले। सरपंचों ने आरोप लगाया था कि एसपी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके विरोध मे घरौंडा सरपंच एसोसिएशन ने बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
यह सरपंच बैठे भूख हड़ताल पर
भूख हड़ताल के दूसरे दिन एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह राणा, राजेंद्र सिंह बस्ताडा, कुलदीप राणा, हवासिंह, मेघराज, जयभगवान, नरेश राणा, रमेश वर्मा, प्रवीण कुमार, जसबीर सिंह सरपंच भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके साथ अन्य गांवों के सरपंच भी धरने पर बैठे हैं। सरपंचाें ने सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सरपंचों ने सरपंच राजेंद्र की रिहाई के साथ-साथ एसपी को बदलने की मांग की। सोमवार को सरपंचों के पक्ष में जिला परिषद के कार्यवाहक चेयरमैन अशोक मित्तल भी धरने पर बैठ गए हैं। उन्होेंने कहा कि सरपंच राजेंद्र की साथ पुलिस ने गलत किया है, अगर पुलिस को जांच सही तरीके से करनी चाहिए थी।
डीएसपी सुरेंद्र भौरिया ने सरपंच को कैथल बुलाकर हिरासत में लेकर गलत कार्य किए हैं। उन्होेंने कहा कि अगर प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई होने लगी तो पंचायती राज का कोई महत्व ही नहीं रहेगा। उन्होंने सरपंच को तुरंत रिहा करने की मांग की। वहीं मामले की निष्पक्षता से जांच करने के लिए एसपी शंशाक आनंद, डीएसपी जोगिंद्र राठी, भारती मोर भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने गांव में मृतक पीड़ित पक्ष के घर पहुंचे और उनके बयान दर्ज किए। बाद में पीड़ित परिवार के विरोध में उतरे उसी समाज के लोगों ने पुलिस अधीक्षक को सरपंच को निर्दोष बताया ।
एसपी के गांव में पहुंचे की सूचना मिलते ही पूरा गांव की महिला, पुरुष व दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने चौपाल में पहुंच गए। बाद में एसपी शंशाक आनंद सरपंच पक्ष के लोगों से मिले और उनके बयान दर्ज किए। एसपी ने ग्रामीणों का आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्षता से जांच की जाएगी, अगर जांच में सरपंच निर्दोष पाया गया तो उनको रिहा किया जाएगा। बाद में एसपी बीडीपीओ कार्यालय में पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठे सरपंचों से मिले। पीड़ित पक्ष के समाज के परिवार का विरोध उसी के समाज ने करना शुरू कर दिया है और उन्होंने सरपंच को निर्दोष बताया। उनके समाज के शुगन चंद, ईश्वर, जिले राम, पृथी आदि लोगों ने एसपी के समक्ष गांव के सरपंच को निर्दोष बताया।
सरपंच के पक्ष में उतरे दूसरे ब्लॅाक के सरपंच
गांव चौरा के सरपंच राजेंद्र की रिहाई के लिए बीडीपीओ कार्यालय में भूख हड़ताल पर बैठे सरपंचों के पक्ष में करनाल सहित अन्य कई ब्लॉक के सरपंच भी धरने पर पहुंचे गए हैं और उन्होंने भी धरने पर बैठ कर सरपंच की रिहाई की मांग की है। घरौंडा सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह राणा ने कहा कि सरकार पंचायती राज को मजबूत करने के लिए बल दे रही है, वहीं दूसरी ओर गांव में प्रतिनिधियों पर पुलिस झूठे मुकदमे बनाकर जेल में भेज रही है। सरपंचों के ऐलान कर दिया कि जब तक सरपंच राजेंद्र की रिहाई नहीं होती तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी और पंचायताें के सभी कामकाज ठप रहेंगे।