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चावल की हेराफेरीः राज्य की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं केंद्र
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पिछले साल सीएमआर चावल की आपूर्ति की जो रिपोर्ट हरियाणा डीएफएससी ने केंद्र को भेजी थी, उससे केंद्र संतुष्ट नहीं है। यही कारण है कि एक बार फिर कुछ सवालों के जवाब राज्य से मांगे हैं। उनका जवाब मिलने के बाद ही हरियाणा राज्य के राइस मिलर्स को और समय मिल सकता है। इस प्रक्रिया में अभी तीन चार दिन का समय लग सकता है। यह बात विभागीय अधिकारी भी यह मानते हैं।
हरियाणा राज्य के लगभग सभी राइस मिलर्स कई दिनों से यह प्रयास कर रहे हैं कि केंद्र सरकार से और समय मिल जाए, ताकि अवशेष सीएमआर चावल की आपूर्ति की जा सके। इसके लिए राइस मिलर्स लगातार विभागीय अधिकारियों से मिलकर दबाव भी बना रहे हैं। राज्य खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने समय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी थी लेकिन केंद्र ने पिछले साल की रिपोर्ट मांगी। राज्य ने जब रिपोर्ट भेजी तो उसमें 12 सौ से अधिक राइस मिलर्स से फिजिकल वेरीफिकेशन में कम धान मिलने पर 76 करोड़ की वसूली करने की बात भी अंकित की। जिसे देखने के बाद केंद्र ने एक बार फिर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सूत्रों के मुताबिक इसमें केंद्र ने पूछा है कि जब धान केंद्र सरकार का था तो रिकवरी राज्य सरकार ने क्यों की, यदि की तो 76 करोड़ रुपये की धनराशि किस मद में जमा की गई। जब फिजिकल वेरीफिकेशन में धान कम निकला, उसकी रिकवरी भी की गई तो उस धान को कम करके चावल की आपूर्ति मांगी जानी चाहिए थी, पूरे धान पर चावल की आपूर्ति का समय क्यों मांगा जा रहा है? अब हरियाणा खाद्य एवं आपूर्ति महकमा इन सवालों के जवाब देने की तैयारी में जुटा है।
-केंद्र सरकार ने क्या रिपोर्ट मांगी है, यह तो मुख्यालय को ही जानकारी होगी लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है, जो भी जवाब मांगे हैं, उसकी तैयारी की जा रही है। मुख्यालय स्तर से तीन चार दिनों में जवाब दे दिया जाएगा। इसके बाद ही 29 या 30 जुलाई तक केंद्र सरकार से राइस मिलर्स को अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए और समय मिल सकता है।
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-निशांत राठी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक करनाल।
-हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए शीघ्रता से समय मिल जाए। क्योंकि देरी होने पर चिंता का बढना तो स्वाभाविक ही है। सभी राइस मिलर्स ईमानदारी के साथ शत प्रतिशत चावल की आपूर्ति करेंगे। इस बार लॉकडाउन, बारिश, ट्रांसपोर्ट व लेबर न मिलने आदि कई कारणों से तय समय पर पूरे चावल की आपूर्ति नहीं हो सकी थी।
-विनोद कुमार गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।
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हरियाणा राज्य के लगभग सभी राइस मिलर्स कई दिनों से यह प्रयास कर रहे हैं कि केंद्र सरकार से और समय मिल जाए, ताकि अवशेष सीएमआर चावल की आपूर्ति की जा सके। इसके लिए राइस मिलर्स लगातार विभागीय अधिकारियों से मिलकर दबाव भी बना रहे हैं। राज्य खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने समय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी थी लेकिन केंद्र ने पिछले साल की रिपोर्ट मांगी। राज्य ने जब रिपोर्ट भेजी तो उसमें 12 सौ से अधिक राइस मिलर्स से फिजिकल वेरीफिकेशन में कम धान मिलने पर 76 करोड़ की वसूली करने की बात भी अंकित की। जिसे देखने के बाद केंद्र ने एक बार फिर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सूत्रों के मुताबिक इसमें केंद्र ने पूछा है कि जब धान केंद्र सरकार का था तो रिकवरी राज्य सरकार ने क्यों की, यदि की तो 76 करोड़ रुपये की धनराशि किस मद में जमा की गई। जब फिजिकल वेरीफिकेशन में धान कम निकला, उसकी रिकवरी भी की गई तो उस धान को कम करके चावल की आपूर्ति मांगी जानी चाहिए थी, पूरे धान पर चावल की आपूर्ति का समय क्यों मांगा जा रहा है? अब हरियाणा खाद्य एवं आपूर्ति महकमा इन सवालों के जवाब देने की तैयारी में जुटा है।
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-केंद्र सरकार ने क्या रिपोर्ट मांगी है, यह तो मुख्यालय को ही जानकारी होगी लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है, जो भी जवाब मांगे हैं, उसकी तैयारी की जा रही है। मुख्यालय स्तर से तीन चार दिनों में जवाब दे दिया जाएगा। इसके बाद ही 29 या 30 जुलाई तक केंद्र सरकार से राइस मिलर्स को अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए और समय मिल सकता है।
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-निशांत राठी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक करनाल।
-हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि अवशेष चावल की आपूर्ति के लिए शीघ्रता से समय मिल जाए। क्योंकि देरी होने पर चिंता का बढना तो स्वाभाविक ही है। सभी राइस मिलर्स ईमानदारी के साथ शत प्रतिशत चावल की आपूर्ति करेंगे। इस बार लॉकडाउन, बारिश, ट्रांसपोर्ट व लेबर न मिलने आदि कई कारणों से तय समय पर पूरे चावल की आपूर्ति नहीं हो सकी थी।
-विनोद कुमार गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।