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Karnal News: योजना का समय पर लाभ न देने पर सीडीपीओ निसिंग दोषी, लगा जुर्माना
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करनाल। मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना का निसिंग की संध्या को समय पर लाभ नहीं दिए जाने पर हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए सीडीपीओ संतोष गिरधर को दोषी ठहराया है। आयोग ने अधिकारी का स्पष्टीकरण अस्वीकार करते हुए महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी निसिंग पर एक हजार रुपये का सांकेतिक दंड लगाया है। आयोग ने जुर्माने की राशि उनके वेतन से काटकर राज्य कोष में जमा करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग प्रवक्ता ने बताया कि निसिंग निवासी संध्या कुमारी ने अपनी शिकायत में कहा था कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी निसिंग ने आवेदन को जिला कार्यक्रम अधिकारी को अग्रेषित करने में अनुचित विलंब किया। इस कारण निर्धारित समयसीमा के भीतर शिकायतकर्ता को लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रकरण को अंतिम तिथि तक निपटाने के बजाय फाइल को देरी से जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजा गया। तथ्यों की समीक्षा के बाद आयोग ने निर्णय दिया कि इस विलंब के लिए निसिंग की महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी जिम्मेदार हैं।
आयोग ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया है कि जिले में लंबित सभी मामलों का निस्तारण बिना किसी और विलंब के सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में प्रमाणपत्र 6 अक्तूबर, 2025 तक आयोग को भेजा जाए कि 30 जून, 2025 से पूर्व दायर कोई भी प्रकरण विभाग में लंबित नहीं है। साथ ही संबंधित अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक आवेदन की स्थिति सरल पोर्टल पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में अद्यतन की जाए ताकि आवेदक अपने मामलों की प्रगति को देख सकें और अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष अनावश्यक अपील न हों। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा के लिए पर्याप्त आंतरिक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए और अधिकारियों को आरटीएस मानकों के पालन के प्रति उत्तरदायी बनाया जाए।
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आयोग प्रवक्ता ने बताया कि निसिंग निवासी संध्या कुमारी ने अपनी शिकायत में कहा था कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी निसिंग ने आवेदन को जिला कार्यक्रम अधिकारी को अग्रेषित करने में अनुचित विलंब किया। इस कारण निर्धारित समयसीमा के भीतर शिकायतकर्ता को लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रकरण को अंतिम तिथि तक निपटाने के बजाय फाइल को देरी से जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजा गया। तथ्यों की समीक्षा के बाद आयोग ने निर्णय दिया कि इस विलंब के लिए निसिंग की महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी जिम्मेदार हैं।
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आयोग ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया है कि जिले में लंबित सभी मामलों का निस्तारण बिना किसी और विलंब के सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में प्रमाणपत्र 6 अक्तूबर, 2025 तक आयोग को भेजा जाए कि 30 जून, 2025 से पूर्व दायर कोई भी प्रकरण विभाग में लंबित नहीं है। साथ ही संबंधित अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक आवेदन की स्थिति सरल पोर्टल पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में अद्यतन की जाए ताकि आवेदक अपने मामलों की प्रगति को देख सकें और अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष अनावश्यक अपील न हों। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा के लिए पर्याप्त आंतरिक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए और अधिकारियों को आरटीएस मानकों के पालन के प्रति उत्तरदायी बनाया जाए।
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