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उधार किराया लेकर अपने काम के लिए आया था, पर दफ्तर में अफसर ही नहीं मिला...
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भटकते रहे लोग........ किसानों के धरने के चलते लघु सचिवालय में रहा सन्नाटा। संवाद
करनाल। पड़ोसी से किराया लेकर आया था, पर दफ्तर में अधिकारी ही नहीं हैं... अब फिर दोबारा चक्कर काटना पड़ेगा। यह कहना था बुढ़नपुर निवासी गंगाराम का जो पेंशन विभाग में किसी कार्य को लेकर पहुंचे लेकिन अधिकारी न मिलने के कारण मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
ऐसे ही हालात पूरे दिन जिला सचिवालय में बने रहे क्योंकि किसानों की ओर से सचिवालय का घेराव कर रखा है। सचिवालय का मुख्य गेट बंद है, वहीं अधिकारी भी ड्यूटी लगी होने के कारण सीट पर नहीं मिल रहे। इसका खामियाजा आम जनता को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
स्थिति यह थी कि सचिवालय के मुख्य गेट पर किसानों के धरने की वजह से उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की गाड़ियां भी कोर्ट की ओर बने पीछे के गेट से दफ्तर आईं। तो फरियादियों के अंदर आने के हालात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हालांकि किसान आंदोलन के चलते नाममात्र लोग ही अपने कार्यों के लिए सचिवालय आ रहे हैं लेकिन वे भी काम न होने के चलते मायूस घरों को लौट रहे हैं।
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करीब छह हजार लोगों के काम हो रहे प्रभावित
जिला सचिवालय में रोजाना लगभग छह हजार लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं लेकिन सचिवालय घेराव के चलते सभी कामकाज ठप पड़े हैं। किसान आंदोलन के चलते ज्यादातर लोग शहर नहीं आ रहे और जो आ रहे हैं, वे काम न हो पाने की अवस्था में निराश होकर घर लौट रहे हैं।
पेंशन विभाग में काम के लिए आया था लेकिन अधिकारी न मिलने की वजह से वापस लौटना पड़ा। - गंगाराम
सचिवालय में किसी काम से पत्नी के साथ आया था पर गेट बंद होने की वजह से अंदर नहीं जा पाया। - सुशील
सचिवालय के सरल केंद्र में दस्तावेज से संबंधित काम से आया पर गेट बंद होने के कारण प्रवेश नहीं कर पाया। - गौरव
योजना कार्यालय में अनुदान संबंधी जानकारी के लिए जाना था पर अंदर जाने का कहीं भी रास्ता नहीं मिला। -सुधा
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ऐसे ही हालात पूरे दिन जिला सचिवालय में बने रहे क्योंकि किसानों की ओर से सचिवालय का घेराव कर रखा है। सचिवालय का मुख्य गेट बंद है, वहीं अधिकारी भी ड्यूटी लगी होने के कारण सीट पर नहीं मिल रहे। इसका खामियाजा आम जनता को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
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स्थिति यह थी कि सचिवालय के मुख्य गेट पर किसानों के धरने की वजह से उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की गाड़ियां भी कोर्ट की ओर बने पीछे के गेट से दफ्तर आईं। तो फरियादियों के अंदर आने के हालात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हालांकि किसान आंदोलन के चलते नाममात्र लोग ही अपने कार्यों के लिए सचिवालय आ रहे हैं लेकिन वे भी काम न होने के चलते मायूस घरों को लौट रहे हैं।
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करीब छह हजार लोगों के काम हो रहे प्रभावित
जिला सचिवालय में रोजाना लगभग छह हजार लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं लेकिन सचिवालय घेराव के चलते सभी कामकाज ठप पड़े हैं। किसान आंदोलन के चलते ज्यादातर लोग शहर नहीं आ रहे और जो आ रहे हैं, वे काम न हो पाने की अवस्था में निराश होकर घर लौट रहे हैं।
पेंशन विभाग में काम के लिए आया था लेकिन अधिकारी न मिलने की वजह से वापस लौटना पड़ा। - गंगाराम
सचिवालय में किसी काम से पत्नी के साथ आया था पर गेट बंद होने की वजह से अंदर नहीं जा पाया। - सुशील
सचिवालय के सरल केंद्र में दस्तावेज से संबंधित काम से आया पर गेट बंद होने के कारण प्रवेश नहीं कर पाया। - गौरव
योजना कार्यालय में अनुदान संबंधी जानकारी के लिए जाना था पर अंदर जाने का कहीं भी रास्ता नहीं मिला। -सुधा