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बुलंद हौसलों से शारीरिक अक्षमता को किया दरकिनार, पाया मुकाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 02:24 AM IST
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Bypassing physical disability with high spirits, achieved the position
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जब हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। सेक्टर-13 निवासी डॉ. रीतेश सिन्हा ने यह साबित कर दिखाया है। जन्म से ही सेरेब्रल पाल्सी (एक रोग जिसमें दिमागी अक्षमता के कारण चलने-फिरने और अनैच्छिक क्रियाओं पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है) से पीड़ित हैं।
रीतेश ने बीते कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में अल्टरनेटिव थेरेपी फोर सेरेब्रल पाल्सी के नाम से एक एंड्रॉइड एप बनाई है। यह उपलब्धि इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड 2022 में दर्ज की गई। इससे पहले उन्होंने न केवल इस रोग को मात दी, बल्कि वे लेखक, इनोवेटर, मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त कर चुके। उन्होंने क्षमता परीक्षण में सफलता पाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करवाया। यहां तक कि उन्होंने सीपी (सेरेब्रल पाल्सी) के अर्थ को ही बदल दिया। सेरेब्रल पाल्सी यानि कैपेबल पर्सन (सक्षम व्यक्ति)।
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स्कूल दाखिला देने को नहीं थे तैयार
रीतेश की मां डॉ. आरपी सिन्हा ने बताया कि रीतेश का जन्म 30 मार्च 1974 को वडोदरा, गुजरात में हुआ था। जब वह 11 महीने का हुआ तो उन्हें पता चला कि उनका बेटा सेरेब्रल पाल्सी बीमारी से पीड़ित हैं। उसके बाद वे करनाल शिफ्ट हो गए थे। शारीरिक अक्षमता के कारण रीतेश अपने शरीर को भी कंट्रोल करने में सक्षम नहीं था, जिसकी वजह से कोई भी स्कूल उसे दाखिला देने के लिए तैयार नहीं था। एक संघर्ष के बाद रीतेश को एक स्कूल में दाखिला मिला। जिस शारीरिक अवस्था में अपने हाथों से ब्रश करने में घंटाभर लग जाता था और अपने शरीर को कंट्रोल करने में असमर्थ था, आज उसी रीतेश सिन्हा ने जिंदगी जीने की मिसाल कायम की है।
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व्हाट्सएप और फेसबुक पर बनाया कैपेबल पर्सन ग्रुप
वह विकलांगों को व्हाट्सएप और फेसबुक पर अपने ऽकैपेबल पर्सन ग्रुपऽ के माध्यम से समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं। सेरेब्रल पाल्सी विचारों, सूचनाओं के आदान-प्रदान और उन्हें प्रेरित करने के लिए जोड़ता है। इस ग्रुप में पूरे भारत से करीब 100 लोग जुड़े हैं, जो इस सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं।

अंडरस्टेंडिंग ऑफ सेरेब्रल पाल्सी नामक किताब लिखी
रीतेश ने बताया कि आम जनता में सेरेब्रल पाल्सी के बारे में जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने अंडरस्टेंडिंग ऑफ सेरेब्रल पाल्सी नामक किताब लिखी है। उन्हें कैविनकर एबार्ड अवार्ड, मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है। उनके डिजिटल इंडिया अभियान के लिए इनटेल व दि बैटर इंडिया डॉटकॉम द्वारा चयन किया गया था। अबेलिटी टेस्ट में सफलता मिलने के बाद रितेश को 2010 में करनाल कोर्ट में कंप्यूटर ऑप्रेटर की नौकरी मिली और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करवाया।
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