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Karnal News: बॉक्सर मनोज ने पंजाब में लहराया जीत का परचम
Sun, 16 Mar 2025 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 16 Mar 2025 02:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्णनगरी के शाहपुर गांव के मुक्केबाज मनोज ने 61 किलोग्राम भार वर्ग में दो दिवसीय पेशेवर बाक्सिंग प्रतियोगिता में शानदार जीत दर्ज कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंजाब के लहरागागा संगरूर में आयोजित प्रतियोगिता में जीत का परचम लहराया। अब उनकी अगली प्रतियोगिता इसी माह जींद में आयोजित होनी है।
मनोज कुमार ने बताया की इस प्रतियोगिता में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भाग लिया। उनकी फाइट सुख दर्शन सिंह बठिंडा पंजाब के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ छह राउंड की फाइट में सभी राउंड जीतकर करारी शिकस्त। प्रतियोगिता के बाद मनोज कुमार को मोटरसाइकिल देकर सम्मानित किया गया।
वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र गोयल ने भी मनोज कुमार की सराहना कर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। गांव पहुंचने पर मनोज का स्वागत किया गया। इससे पहले भी मनोज कुमार ने दिल्ली में आयोजित पेशेवर बॉक्सिंग प्रतियोगिता में अफगानिस्तान के पेशेवर मुक्केबाज अमल अहमद सिद्धीक जदा को कड़े मुकाबले में हराया था।
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इससे पहले दिल्ली में आयोजित पेशेवर प्रतियोगिता में दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मनीष अहलावत को चार राउंड में मात दी थी। एमए की पढ़ाई के साथ साथ मनोज मुक्केबाजी के लिए भी कड़ा पसीना बहाता है। अपने शाहपुर गांव में वह प्रतिदिन आठ से दस घंटे तक पेशेवर बॉक्सिंग के लिए कड़ा अभ्यास करता है।
उन्होंने बताया कि वह 2011 से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रहें है। पेशेवर मुक्केबाजी उन्होंने पिछले वर्ष दो फाइट जीत चुके हैं। मनोज के घर में उनके पिता मेवा सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। माता उर्मिला गृहिणी व छोटा भाई सलिंद्र कुमार है जो ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करता है।
शुरुआती कोच राजेंद्र कुमार कैथल ने उन्हें बॉक्सिंग की बारीकियां सिखाई। उसके बाद उन्होंने कर्ण स्टेडियम करनाल का रुख किया। वहां पर उन्हें प्रशिक्षक सुरेंद्र चौहान व किम्मत सिंह ने मुक्केबाजी के गुर दिए। मौजूदा समय में मनोज गांव शाहपुर में ही यू-टयूब व अन्य सोशल मीडिया की सहायता से पेशेवर बॉक्सिंग सीख रहे हैं।
दोस्त की प्रेरणा से बने पेशेवर मुक्केबाज
मनोज ने बताया कि वह करीब 12 वर्ष से मुक्केबाजी कर रहे है, 2023 से पहले उन्होंने कोई खास उपलब्धि नहीं प्राप्त की थी। जब उनकी सिरसा के दोस्त पेशेवर मुक्केबाज बंटी से मुलाकात हुई तो उसने उन्हें पेशेवर मुक्केबाजी करने की प्रेरणा दी। उसके बाद मनोज मुड़कर नहीं देखा। मनोज ने अफगानिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज के साथ हुए कड़े मुकाबले का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय फाइट में उनकी बांई आंख पर एक पंच लगने से उनकी आंख से खून बहने लगा, फिर भी उन्होंने धैर्य और सयंम का बेहतर प्रदर्शन कर अमल अहमद को मात दी।
ये हैं उपलब्धियां
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। स्कूली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता नरवाना में रजत पदक हासिल किया। 2014 चंद्र शेखर आजाद कप जूनियर मैन स्टेट चैंपियनशिप भिवानी में कांस्य पदक जीता। इंटर सेंटर स्टेट बॉक्सिंग प्रतियोगिता भिवानी 2015 में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।भारतीय खेल ग्रामीण महासंघ मुंबई में स्वर्ण पदक जीता। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया।
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करनाल। कर्णनगरी के शाहपुर गांव के मुक्केबाज मनोज ने 61 किलोग्राम भार वर्ग में दो दिवसीय पेशेवर बाक्सिंग प्रतियोगिता में शानदार जीत दर्ज कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंजाब के लहरागागा संगरूर में आयोजित प्रतियोगिता में जीत का परचम लहराया। अब उनकी अगली प्रतियोगिता इसी माह जींद में आयोजित होनी है।
मनोज कुमार ने बताया की इस प्रतियोगिता में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने भाग लिया। उनकी फाइट सुख दर्शन सिंह बठिंडा पंजाब के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ छह राउंड की फाइट में सभी राउंड जीतकर करारी शिकस्त। प्रतियोगिता के बाद मनोज कुमार को मोटरसाइकिल देकर सम्मानित किया गया।
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वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र गोयल ने भी मनोज कुमार की सराहना कर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। गांव पहुंचने पर मनोज का स्वागत किया गया। इससे पहले भी मनोज कुमार ने दिल्ली में आयोजित पेशेवर बॉक्सिंग प्रतियोगिता में अफगानिस्तान के पेशेवर मुक्केबाज अमल अहमद सिद्धीक जदा को कड़े मुकाबले में हराया था।
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इससे पहले दिल्ली में आयोजित पेशेवर प्रतियोगिता में दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज मनीष अहलावत को चार राउंड में मात दी थी। एमए की पढ़ाई के साथ साथ मनोज मुक्केबाजी के लिए भी कड़ा पसीना बहाता है। अपने शाहपुर गांव में वह प्रतिदिन आठ से दस घंटे तक पेशेवर बॉक्सिंग के लिए कड़ा अभ्यास करता है।
उन्होंने बताया कि वह 2011 से मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रहें है। पेशेवर मुक्केबाजी उन्होंने पिछले वर्ष दो फाइट जीत चुके हैं। मनोज के घर में उनके पिता मेवा सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। माता उर्मिला गृहिणी व छोटा भाई सलिंद्र कुमार है जो ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करता है।
शुरुआती कोच राजेंद्र कुमार कैथल ने उन्हें बॉक्सिंग की बारीकियां सिखाई। उसके बाद उन्होंने कर्ण स्टेडियम करनाल का रुख किया। वहां पर उन्हें प्रशिक्षक सुरेंद्र चौहान व किम्मत सिंह ने मुक्केबाजी के गुर दिए। मौजूदा समय में मनोज गांव शाहपुर में ही यू-टयूब व अन्य सोशल मीडिया की सहायता से पेशेवर बॉक्सिंग सीख रहे हैं।
दोस्त की प्रेरणा से बने पेशेवर मुक्केबाज
मनोज ने बताया कि वह करीब 12 वर्ष से मुक्केबाजी कर रहे है, 2023 से पहले उन्होंने कोई खास उपलब्धि नहीं प्राप्त की थी। जब उनकी सिरसा के दोस्त पेशेवर मुक्केबाज बंटी से मुलाकात हुई तो उसने उन्हें पेशेवर मुक्केबाजी करने की प्रेरणा दी। उसके बाद मनोज मुड़कर नहीं देखा। मनोज ने अफगानिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज के साथ हुए कड़े मुकाबले का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय फाइट में उनकी बांई आंख पर एक पंच लगने से उनकी आंख से खून बहने लगा, फिर भी उन्होंने धैर्य और सयंम का बेहतर प्रदर्शन कर अमल अहमद को मात दी।
ये हैं उपलब्धियां
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। स्कूली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता नरवाना में रजत पदक हासिल किया। 2014 चंद्र शेखर आजाद कप जूनियर मैन स्टेट चैंपियनशिप भिवानी में कांस्य पदक जीता। इंटर सेंटर स्टेट बॉक्सिंग प्रतियोगिता भिवानी 2015 में कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।भारतीय खेल ग्रामीण महासंघ मुंबई में स्वर्ण पदक जीता। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया।