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निकाय अब गोवा और भोपाल की तर्ज पर करेंगे कचरा प्रबंधन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बढ़ते शहरीकरण के बीच निकलने वाला हजारों टन कूड़ा (अपशिष्ट) देशव्यापी समस्या के रूप में उभरा है। इससे निजात पाने के लिए नगर निगम की मेजबानी में हरियाणा के तीन मंडलों के नौ जिलों के नगर निगम व नगरपालिकाओं के निगमायुक्त, उप निगमायुक्त, सचिवों आदि की शहर के एक होटल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करके मंथन किया गया।
इसमें आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. एए काजमी, नगर निगम भोपाल के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार सक्सेना, गोवा अपशिष्ट प्रबंधन निगम के गजानन कामत व श्योकंद तेली, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा आदि कई विशेषज्ञों में सहभागिता की। कहा गया कि स्थानीय निकायों को इसे चुनौती मानकर सॉलिड व लिगेसी वेस्ट मैनेजमेंट पर काम करना होगा। मौजूदा समय में वेस्ट का वैज्ञानिक व सुरक्षित तरीके से उपचार करने की जरूरत है। अन्यथा इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा।
निगमायुक्त नरेश नरवाल ने कहा कि करनाल में इस पर काफी काम हुआ है। शेखपुरा स्थित प्लांट पर मौजूद लिगेसी वेस्ट में 60 हजार टन लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर दिया गया है, शेष 40 हजार टन का निस्तारण जून माह तक कर लिया जाएगा। महापौर रेणू बाला गुप्ता ने कहा कि उनके अनुभव और वैज्ञानिकों के शोध से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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सोर्स सेग्रीगेशन पर जोर देने का सुझाव
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रजेंटेशन दी। निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय के मुख्य अभियंता अशोक राठी ने वेस्ट मैनेजमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शत प्रतिशत सोर्स सेग्रीगेशन पर जोर देने का सुझाव दिया। इसमें नगर निगम करनाल के अतिरिक्त आयुक्त गौरव कुमार, उप निगम आयुक्त अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अभियंता अक्षय भारद्वाज के साथ साथ करनाल सहित अंबाला, पानीपत, यमुनानगर, पंचकूला, हिसार के निगमायुक्त और अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, हिसार, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, जींद, सिरसा व कैथल के उप निगमायुक्त सहित 46 नगर पालिकाओं के ईओ/सचिवों ने लिया भाग।
16 एकड़ में विकसित किया ग्रीन पार्क
आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एए काजमी ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर प्रजेंटेशन दी। कहा कि मौजूदा समय में वेस्ट का वैज्ञानिक व सुरक्षित तरीके से उपचार करने की जरूरत है। कहीं प्लास्टिक वेस्ट की मात्रा अधिक है, तो कहीं कम है। इसका कारण शहरों में असंगठित कूड़ा बीनने वालों की संख्या को लेकर है। नगर निगम भोपाल के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार सक्सेना ने वेस्ट मैनेजमेंट पर अपनी प्रजेंटेशन के साथ बताया कि भोपाल, जो कभी भरा शहर होता था, इसके 21 एकड़ क्षेत्र में कचरा एकत्रित रहता था, उसे एक सुनियोजित तरीके से प्लान करके 16 एकड़ में ग्रीन पार्क विकसित किया गया और शेष एरिया में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को निष्पादित करने का प्लांट लगाया गया।
गोवा में कचरा प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण
गोवा वेस्ट मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन के गजानन कामत व श्योकंद तेली ने भी गोवा में अपशिष्ट प्रबंधन पर एक उपयोगी प्रजेंटेशन में दिखाया कि समुद्री तट पर स्थित होने के कारण गोवा में वेस्ट मैनेजमेंट अन्य दूसरी जगहों से ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य है। वहां वेस्ट सीजन अनुसार एकत्र होता है, अत्यधिक पर्यटकों के समय में अत्यधिक प्लास्टिक इकट्ठा हो जाता है, जबकि ऑफ टाइम में गीले कचरे की बहुतायत हो जाती है। इनके प्रबंधन को कॉर्पोरेशन ने एक चैलेंज के रूप में लिया, एक समर्पित टीम को साथ लेकर इस पर काम किया और उसके परिणाम कारगर साबित हुए।
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करनाल। बढ़ते शहरीकरण के बीच निकलने वाला हजारों टन कूड़ा (अपशिष्ट) देशव्यापी समस्या के रूप में उभरा है। इससे निजात पाने के लिए नगर निगम की मेजबानी में हरियाणा के तीन मंडलों के नौ जिलों के नगर निगम व नगरपालिकाओं के निगमायुक्त, उप निगमायुक्त, सचिवों आदि की शहर के एक होटल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करके मंथन किया गया।
इसमें आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. एए काजमी, नगर निगम भोपाल के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार सक्सेना, गोवा अपशिष्ट प्रबंधन निगम के गजानन कामत व श्योकंद तेली, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा आदि कई विशेषज्ञों में सहभागिता की। कहा गया कि स्थानीय निकायों को इसे चुनौती मानकर सॉलिड व लिगेसी वेस्ट मैनेजमेंट पर काम करना होगा। मौजूदा समय में वेस्ट का वैज्ञानिक व सुरक्षित तरीके से उपचार करने की जरूरत है। अन्यथा इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा।
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निगमायुक्त नरेश नरवाल ने कहा कि करनाल में इस पर काफी काम हुआ है। शेखपुरा स्थित प्लांट पर मौजूद लिगेसी वेस्ट में 60 हजार टन लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर दिया गया है, शेष 40 हजार टन का निस्तारण जून माह तक कर लिया जाएगा। महापौर रेणू बाला गुप्ता ने कहा कि उनके अनुभव और वैज्ञानिकों के शोध से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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सोर्स सेग्रीगेशन पर जोर देने का सुझाव
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रजेंटेशन दी। निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय के मुख्य अभियंता अशोक राठी ने वेस्ट मैनेजमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शत प्रतिशत सोर्स सेग्रीगेशन पर जोर देने का सुझाव दिया। इसमें नगर निगम करनाल के अतिरिक्त आयुक्त गौरव कुमार, उप निगम आयुक्त अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अभियंता अक्षय भारद्वाज के साथ साथ करनाल सहित अंबाला, पानीपत, यमुनानगर, पंचकूला, हिसार के निगमायुक्त और अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, हिसार, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, जींद, सिरसा व कैथल के उप निगमायुक्त सहित 46 नगर पालिकाओं के ईओ/सचिवों ने लिया भाग।
16 एकड़ में विकसित किया ग्रीन पार्क
आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एए काजमी ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर प्रजेंटेशन दी। कहा कि मौजूदा समय में वेस्ट का वैज्ञानिक व सुरक्षित तरीके से उपचार करने की जरूरत है। कहीं प्लास्टिक वेस्ट की मात्रा अधिक है, तो कहीं कम है। इसका कारण शहरों में असंगठित कूड़ा बीनने वालों की संख्या को लेकर है। नगर निगम भोपाल के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार सक्सेना ने वेस्ट मैनेजमेंट पर अपनी प्रजेंटेशन के साथ बताया कि भोपाल, जो कभी भरा शहर होता था, इसके 21 एकड़ क्षेत्र में कचरा एकत्रित रहता था, उसे एक सुनियोजित तरीके से प्लान करके 16 एकड़ में ग्रीन पार्क विकसित किया गया और शेष एरिया में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को निष्पादित करने का प्लांट लगाया गया।
गोवा में कचरा प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण
गोवा वेस्ट मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन के गजानन कामत व श्योकंद तेली ने भी गोवा में अपशिष्ट प्रबंधन पर एक उपयोगी प्रजेंटेशन में दिखाया कि समुद्री तट पर स्थित होने के कारण गोवा में वेस्ट मैनेजमेंट अन्य दूसरी जगहों से ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य है। वहां वेस्ट सीजन अनुसार एकत्र होता है, अत्यधिक पर्यटकों के समय में अत्यधिक प्लास्टिक इकट्ठा हो जाता है, जबकि ऑफ टाइम में गीले कचरे की बहुतायत हो जाती है। इनके प्रबंधन को कॉर्पोरेशन ने एक चैलेंज के रूप में लिया, एक समर्पित टीम को साथ लेकर इस पर काम किया और उसके परिणाम कारगर साबित हुए।