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Karnal News: पीड़ित कर्मचारी के समर्थन में आई भाकियू, पांच को प्रदर्शन
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घरौंडा में भाकियू प्रदेशाध्यक्ष को शिकायत देता पीड़ित।
घरौंडा। खंड क्षेत्र के झीवरेहड़ी ग्राम पंचायत के सचिव पर सफाई कर्मचारियों का मासिक वेतन रोकने, जातिसूचक शब्द कहने और ग्राम पंचायत की लेटर हेड का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं। कार्रवाई न होेने पर कर्मचारी बलजीत भारतीय किसान यूनियन कार्यालय पहुंरा। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष ने कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ने की घोषणा की है। पांच अगस्त को घरौंडा एसडीएम कार्यालय में प्रदर्शन किया जाएगा।
शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान की अगुवाई में स्थानीय कार्यालय में आयोजित बैठक में कर्मचारियों की आवाज बुलंद करने का फैसला लिया गया। रतनमान ने कहा कि सचिव ने जबरन दो कर्मचारियों का वेतन बंद कर दिया है। वेतन मांगने पर अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्द कहे गए। पीड़ितों ने डिप्टी कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत कर दी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं पूर्व सरपंच एवं मौजूदा सरपंच प्रतिनिधि राजबीर मोकल का कहना है कि ग्राम सचिव ने राजनीतिक दबाव में तनख्वाह रोकी है। सरपंच ने खुद लेटर हेड पर लिखकर बीडीपीओ को भेजा कि कर्मचारी सही काम करते हैं और भुगतान दिया जाए।
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वहीं बीडीपीओ सोमबीर खटकड़ ने बताया कि सफाई कर्मचारियों का वेतन रोकने में सचिव का रोल नहीं होता। अगर ग्राम पंचायत की तरफ से लिखकर दिया जाता है तो ही सैलरी रोकी जा सकती है। दोनों पक्षों से बातचीत की जाएगी। गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान की अगुवाई में स्थानीय कार्यालय में आयोजित बैठक में कर्मचारियों की आवाज बुलंद करने का फैसला लिया गया। रतनमान ने कहा कि सचिव ने जबरन दो कर्मचारियों का वेतन बंद कर दिया है। वेतन मांगने पर अभद्र व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्द कहे गए। पीड़ितों ने डिप्टी कमिश्नर से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत कर दी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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वहीं पूर्व सरपंच एवं मौजूदा सरपंच प्रतिनिधि राजबीर मोकल का कहना है कि ग्राम सचिव ने राजनीतिक दबाव में तनख्वाह रोकी है। सरपंच ने खुद लेटर हेड पर लिखकर बीडीपीओ को भेजा कि कर्मचारी सही काम करते हैं और भुगतान दिया जाए।
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वहीं बीडीपीओ सोमबीर खटकड़ ने बताया कि सफाई कर्मचारियों का वेतन रोकने में सचिव का रोल नहीं होता। अगर ग्राम पंचायत की तरफ से लिखकर दिया जाता है तो ही सैलरी रोकी जा सकती है। दोनों पक्षों से बातचीत की जाएगी। गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।