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87 वर्ष की उम्र में भी भईयाराम एक किलोमीटर जोगिंग के बाद लगाते हैं डम्बल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2020 02:30 AM IST
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bhaiyaram is a wrestling fan at the age of 87
उम्र 87 वर्ष, जज्बा 30 साल के खिलाड़ी का...जब अपना कोई हारता है तो मन में टीस पहुंचती है जब जीतता है तो खुशी। ऐसी ही कहनी है जींद जिले के ब्राह्मणवास, तहसील जुलाना के रहने वाले 87 वर्षीय भईयाराम की। भईयाराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वह हर रोज सुबह चार बजे बिस्तर छोड़ देते हैं। मधुबन अकादमी में एक किलोमीटर की जॉगिंग करते हैं। फिर घर पर आकर डंबल लगाते हैं। सुबह नाश्ते में दूध और गोंद का सेवन करते हैं। 87 वर्ष की उम्र में भी किसी का सहारा उन्हें नागवार है। इस उम्र में भी भईयाराम को कुश्ती का शौक है। शौक इतना कि मधुबन में चल रही 68वीं अखिल भारतीय पुलिस कुश्ती समूह प्रतियोगिता में वह सुबह 9 बजे आकर बैठ जाते हैं और रात इवेंट खत्म होने तक कुर्सी पर जमे रहते हैं। जब हरियाणा का कोई खिलाड़ी जीतता है तो मन खुशी से झूम उठता है और हारता है तो मन में थोड़ी टीस पहुंचती है। खिलाड़ी के सही दांव पेंच न लगा पाने के कारण कई बार कुर्सी से खुद उठ पड़ते हैं। कुश्ती के इवेंट से पहले खिलाड़ी को दांव पेंच भी सिखाते हैं।
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अपने समय में अर्जुन अवार्डी, ओलंपिक पहलवान को दे चुके हैं पटखनी
भईयाराम एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। फिर भी उन्होंने अपने कुश्ती के शौक को जीवित रखा। दिहाड़ी मजूदरी की लेकिन दंगल की मिट्टी को नहीं छोड़ा। उन्होंने 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की। परिवार की जिम्मेदारी पड़ी तो परिवार और शौक दो पाटों के बीच उनके अरमान दब गए, लेकिन फिर भी उन्होंने अर्जुन अवार्डी और ओलंपियन खिलाड़ियों को धूल चटा दी।
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महावीर फौगाट बन तीन बेटों को बनाया पहलवान
भईयाराम ने महावीर फौगाट की तरह अपने तीन बेटों को पहलवान बनाया। भईयाराम के घर में पांच बेटों व दो बेटियों ने जन्म लिया। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से खुद दिहाड़ी मजूदरी करते और फिर बेटों को दंगल में लेकर जाते। जोगिंद्र सिंह, हरज्ञान सिंह व जगमोहन को उन्होंने पहलवान बनाया। इन्होंने कुश्ती के दम पर ही सरकारी नौकरियां प्राप्त की। जोगिंद्र सिंह सोनारियां जेल में जेलवार्डन, हरज्ञान सिंह गर्वनमेंट कॉलेज जींद में प्रोफेसर और सब इंस्पेक्टर जगमोहन सिंह मधुबन अकादमी में कुश्ती के कोच हैं। छोटे बेटे को विदेश भेजा।
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नशे से कोसों दूर
भईयाराम ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी नशा नहीं किया। शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। आज भी सुबह ठंडे पानी से नहाते हैं और बाहर सोते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार उनका साला घर पर बीड़ी पीने लगा तो उन्होंने उसे घर से बाहर निकाल दिया और कहा कि दोबारा इस घर में बीड़ी मत पीना। उसके बाद उनके साले ने कभी बीड़ी नहीं पी।
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