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रक्षाबंधन पर नहीं भद्रा, भाइयों को बहनें दिन भर बांध सकेंगी राखी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आज बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधेंगी। हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार को सावन मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है। इसी दिन उदया तिथि में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त की शाम 07:01 बजे से शुरू हो चुकी है और 22 अगस्त शाम 05:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद सावन का समापन और भाद्रपद मास का आरंभ होगा। खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ योग बन रहे हैं और रक्षाबंधन भद्रा रहित होगी।
कर्णेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित षष्टी वल्लभ शास्त्री ने बताया कि आज करीब 400 वर्षों के बाद गजकेसरी महायोग बन रहा है। यह योग पूरे दिन बना रहेगा। इस बार रक्षाबंधन पर घनिष्ठा नक्षत्र बनने पर यह योग बना है। इस नक्षत्र में सूर्य, मंगल और बुध एक साथ एक स्थिति में आए थे। इसके अलावा शोभन योग भी पर्व को शुभ बना रहा है। इस योग में रक्षासूत्र बांधना उत्तम माना जाता है।
भद्रा रहित होगा पर्व
पंडित सतीश वशिष्ट और षष्टी वल्लभ शास्त्री ने बताया कि हर वर्ष इस पर्व पर भद्रा लग जाती है। लेकिन इस बार भद्रा नहीं होगा और बहनें पूरा दिन राखी बांध सकती हैं। ऐसी मान्यता है कि भद्रा के दौरान भाईयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इससे उसके साथ अनिष्ट हुआ था। भद्रा काल 23 अगस्त की सुबह 05:34 बजे से 06: 12 बजे तक रहेगा।
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यह समय सबसे शुभ
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रविवार सुबह 05:50 बजे से शाम 06:30 बजे तक है। इसके अलावा दोपहर 01:44 बजे से शाम 04:23 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12: 04 बजे से 12:58 बजे तक, अमृत काल में सुबह 09:34 बजे से 11:07 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त में दोपहर 04:33 बजे से शाम 05:21 बजे तक है।
पूजन विधि
एक थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और रक्षासूत्र रखें। थाली में रखी राखियों को भगवान के सामने रख कर पूजा करें। उसके बाद भाई के माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत से तिलक करें। उसके बाद भाई की दाईं कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर भाई की लंबी आयु की कामना करें। उसके बाद आरती करें और मिठाई खिलाएं।
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करनाल। आज बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधेंगी। हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार को सावन मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है। इसी दिन उदया तिथि में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 21 अगस्त की शाम 07:01 बजे से शुरू हो चुकी है और 22 अगस्त शाम 05:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद सावन का समापन और भाद्रपद मास का आरंभ होगा। खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर कई शुभ योग बन रहे हैं और रक्षाबंधन भद्रा रहित होगी।
कर्णेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित षष्टी वल्लभ शास्त्री ने बताया कि आज करीब 400 वर्षों के बाद गजकेसरी महायोग बन रहा है। यह योग पूरे दिन बना रहेगा। इस बार रक्षाबंधन पर घनिष्ठा नक्षत्र बनने पर यह योग बना है। इस नक्षत्र में सूर्य, मंगल और बुध एक साथ एक स्थिति में आए थे। इसके अलावा शोभन योग भी पर्व को शुभ बना रहा है। इस योग में रक्षासूत्र बांधना उत्तम माना जाता है।
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भद्रा रहित होगा पर्व
पंडित सतीश वशिष्ट और षष्टी वल्लभ शास्त्री ने बताया कि हर वर्ष इस पर्व पर भद्रा लग जाती है। लेकिन इस बार भद्रा नहीं होगा और बहनें पूरा दिन राखी बांध सकती हैं। ऐसी मान्यता है कि भद्रा के दौरान भाईयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इससे उसके साथ अनिष्ट हुआ था। भद्रा काल 23 अगस्त की सुबह 05:34 बजे से 06: 12 बजे तक रहेगा।
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यह समय सबसे शुभ
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रविवार सुबह 05:50 बजे से शाम 06:30 बजे तक है। इसके अलावा दोपहर 01:44 बजे से शाम 04:23 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12: 04 बजे से 12:58 बजे तक, अमृत काल में सुबह 09:34 बजे से 11:07 बजे तक और ब्रह्म मुहूर्त में दोपहर 04:33 बजे से शाम 05:21 बजे तक है।
पूजन विधि
एक थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और रक्षासूत्र रखें। थाली में रखी राखियों को भगवान के सामने रख कर पूजा करें। उसके बाद भाई के माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत से तिलक करें। उसके बाद भाई की दाईं कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर भाई की लंबी आयु की कामना करें। उसके बाद आरती करें और मिठाई खिलाएं।