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जिम्मेवार पर एक्शन लें, नहीं तो मैं तुम पर लूंगा, आप में हिम्मत नहीं तो बताएं हम दूसरा अधिकारी लगाएंगे
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जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शनिवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी लापरवाही और लंबित मामलाें पर अधिकारियों पर जमकर बरसे। नाराज मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं चलेगा। जो भी मामला बैठक में आए, उस पर तुरंत कार्रवाई चाहिए। मैं यहां जनता के लिए आया हूं, अधिकारियों के लिए नहीं। यदि इससे पहले अधिकारी इन समस्याओं का निदान करते तो शिकायत कर्ताओं को यह दिन नहीं देखने पड़ते। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चार-चार साल पुरानी समस्याओं का अभी तक समाधान नहीं हुआ है।
सात माह बाद हुई जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहली बार पहुंचे राज्यमंत्री ने एक के बाद एक सभी 13 मामलों में अधिकारियों से सख्ती से जवाब मांगा। सबसे ज्यादा वे जुलाई 2018 की फसल बीमा की राशि किसानों को नहीं मिलने पर भड़के। उन्होंने तुरंत डीडीए (डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर) आदित्य डबास को बुलाया। मामले में संबंधित बीमा कंपनी या बैंक में से जो भी दोषी हो उन पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जब इस सवाल का डीडीए जवाब नहीं दे पाए तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जिम्मेवार पर एक्शन लें। नहीं तो मैं तुम पर एक्शन लूंगा। अगर आप में एक्शन लेने की हिम्मत नहीं है तो बताएं, हम दूसरा अधिकारी यहां लगाएंगे। शनिवार को पंचायत भवन में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में 13 में से 9 शिकायतों का निपटान हुआ।
दो दिन में केस स्टडी करें, बीमा कंपनी दोषी, तो होगी एफआईआर दर्ज
फसल बीमा से संबंधित मामले में पतनपुरी के किसान गगनदीप शर्मा ने मंत्री से गुहार लगाई कि प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना के तहत खरीफ की फसल की प्रीमियम की राशि तो कटी है, परंतु उन्हें अभी तक गांव की औसत पैदावार के हिसाब से जुलाई व दिसंबर 2018 की बीमा राशि नहीं मिली है। कृषि विभाग व बैंकों के चक्कर लगाकर थक चुका हूं, साहब मेरी बीमे की राशि दिला दो। मंत्री ने किसान गगनदीप शर्मा की आवाज को सुनते ही तुरंत कृषि विभाग के उप-निदेशक को निर्देश दिए कि बीमा कंपनी और बैंक सभी आपस में बैठकर निर्णय करें कि इस किसान की फसल की बीमा राशि क्यों नहीं मिली। यदि एक सप्ताह में निर्णय नहीं हुआ तो उन्होंने एसपी से कहा कि बीमा कंपनी या जांच के बाद कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। एक्शन मोड में निर्देश देने के बाद मंत्री किसान से बोले मेेरे होते भी यदि आपके पैसे नहीं मिले, तो फिर कभी नहीं मिलेंगे।
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डीएसपी से बोले- जहां पुलिस अलर्ट वहां ठगी कैसे, मामले को तीन दिन में निपटाएं
बैठक में पहला ही मामला अक्तूबर 2018 का देख मंत्री आक्रामक हो गए। मामला पुलिस विभाग से संबंधित था। 26 अक्तूबर 2018 से लंबित मामले में प्रार्थी बेबी और उसके बेटे महिपाल ने बताया कि उनके साथ जमीन की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी हुई है। महिपाल ने बताया कि जो जमीन मेरी मां बेबी के नाम होनी थी, उसे आरोपित सुरेश ने धोखाधड़ी करके दूसरे के नाम कर दिया है। दो के अलावा तीसरे आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इधर कमेटी के दो सदस्यों ने भी मंत्री से कहा कि पुलिस मामले की तफ्तीश में उन्हें शामिल नहीं कर रही, जबकि पिछली बैठक में इसके निर्देश दिए थे।
इस पर मंत्री डीएसपी दलबीर सिंह से बोले कि किसी से ठगी करने का कोई अधिकार नहीं है, अगर आप साथ हैं, फिर तो बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन यहां क्या हो रहा है। एसएचओ और आप मामले में जांच करें। मैं इन्हें अपना मोबाइल नंबर देकर जा रहा हूं। तीन दिन में कार्रवाई कर इसे निपटाएं।
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लोन मनियारी का मांगा दिया भैंस का, दो साल से महिला धक्के खा रही, पूछा- जिम्मेवार कौन?
बैठक में तीसरा मामला शामगढ़ निवासी उषा रानी का आया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति वित्तिय एवं विकास निगम से मनियारी के ऋण के लिए आवेदन किया था, यह मामला सितंबर 2017 से पहले का है। प्रार्थी को लोन भी नहीं मिला, इसके बावजूद भी दो कर्मचारी उसके घर रिकवरी की किश्त लेने चले गए। जब मामला दिसबंर 2018 की जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में आया तो संबंधित अधिकारियों ने उन्हें शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने के लिए दो भैंसों का ऋण मंजूर कर दिया। जब मंत्री द्वारा शिकायतकर्ता उषा से पूछा गया कि आप संतुष्ट है तो महिला ने कहा नहीं, मंत्री ने कहा और क्या चाहिए। तो महिला बोली इन अधिकारियों ने जानबूझ कर उसे तंग किया है। अगर मेरा पति जिंदा होता तो मैं लोन के लिए क्यों आती। दो साल से धक्के खा रही हूं। मुझे खर्च ही दिला दो। इस पर सख्त हुए मंत्री ने पूछा कि इसका जिम्मेदार कौन है?
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सात माह बाद हुई जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहली बार पहुंचे राज्यमंत्री ने एक के बाद एक सभी 13 मामलों में अधिकारियों से सख्ती से जवाब मांगा। सबसे ज्यादा वे जुलाई 2018 की फसल बीमा की राशि किसानों को नहीं मिलने पर भड़के। उन्होंने तुरंत डीडीए (डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर) आदित्य डबास को बुलाया। मामले में संबंधित बीमा कंपनी या बैंक में से जो भी दोषी हो उन पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जब इस सवाल का डीडीए जवाब नहीं दे पाए तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जिम्मेवार पर एक्शन लें। नहीं तो मैं तुम पर एक्शन लूंगा। अगर आप में एक्शन लेने की हिम्मत नहीं है तो बताएं, हम दूसरा अधिकारी यहां लगाएंगे। शनिवार को पंचायत भवन में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में 13 में से 9 शिकायतों का निपटान हुआ।
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दो दिन में केस स्टडी करें, बीमा कंपनी दोषी, तो होगी एफआईआर दर्ज
फसल बीमा से संबंधित मामले में पतनपुरी के किसान गगनदीप शर्मा ने मंत्री से गुहार लगाई कि प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना के तहत खरीफ की फसल की प्रीमियम की राशि तो कटी है, परंतु उन्हें अभी तक गांव की औसत पैदावार के हिसाब से जुलाई व दिसंबर 2018 की बीमा राशि नहीं मिली है। कृषि विभाग व बैंकों के चक्कर लगाकर थक चुका हूं, साहब मेरी बीमे की राशि दिला दो। मंत्री ने किसान गगनदीप शर्मा की आवाज को सुनते ही तुरंत कृषि विभाग के उप-निदेशक को निर्देश दिए कि बीमा कंपनी और बैंक सभी आपस में बैठकर निर्णय करें कि इस किसान की फसल की बीमा राशि क्यों नहीं मिली। यदि एक सप्ताह में निर्णय नहीं हुआ तो उन्होंने एसपी से कहा कि बीमा कंपनी या जांच के बाद कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। एक्शन मोड में निर्देश देने के बाद मंत्री किसान से बोले मेेरे होते भी यदि आपके पैसे नहीं मिले, तो फिर कभी नहीं मिलेंगे।
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डीएसपी से बोले- जहां पुलिस अलर्ट वहां ठगी कैसे, मामले को तीन दिन में निपटाएं
बैठक में पहला ही मामला अक्तूबर 2018 का देख मंत्री आक्रामक हो गए। मामला पुलिस विभाग से संबंधित था। 26 अक्तूबर 2018 से लंबित मामले में प्रार्थी बेबी और उसके बेटे महिपाल ने बताया कि उनके साथ जमीन की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी हुई है। महिपाल ने बताया कि जो जमीन मेरी मां बेबी के नाम होनी थी, उसे आरोपित सुरेश ने धोखाधड़ी करके दूसरे के नाम कर दिया है। दो के अलावा तीसरे आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इधर कमेटी के दो सदस्यों ने भी मंत्री से कहा कि पुलिस मामले की तफ्तीश में उन्हें शामिल नहीं कर रही, जबकि पिछली बैठक में इसके निर्देश दिए थे।
इस पर मंत्री डीएसपी दलबीर सिंह से बोले कि किसी से ठगी करने का कोई अधिकार नहीं है, अगर आप साथ हैं, फिर तो बिल्कुल भी नहीं है। लेकिन यहां क्या हो रहा है। एसएचओ और आप मामले में जांच करें। मैं इन्हें अपना मोबाइल नंबर देकर जा रहा हूं। तीन दिन में कार्रवाई कर इसे निपटाएं।
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लोन मनियारी का मांगा दिया भैंस का, दो साल से महिला धक्के खा रही, पूछा- जिम्मेवार कौन?
बैठक में तीसरा मामला शामगढ़ निवासी उषा रानी का आया। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति वित्तिय एवं विकास निगम से मनियारी के ऋण के लिए आवेदन किया था, यह मामला सितंबर 2017 से पहले का है। प्रार्थी को लोन भी नहीं मिला, इसके बावजूद भी दो कर्मचारी उसके घर रिकवरी की किश्त लेने चले गए। जब मामला दिसबंर 2018 की जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में आया तो संबंधित अधिकारियों ने उन्हें शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने के लिए दो भैंसों का ऋण मंजूर कर दिया। जब मंत्री द्वारा शिकायतकर्ता उषा से पूछा गया कि आप संतुष्ट है तो महिला ने कहा नहीं, मंत्री ने कहा और क्या चाहिए। तो महिला बोली इन अधिकारियों ने जानबूझ कर उसे तंग किया है। अगर मेरा पति जिंदा होता तो मैं लोन के लिए क्यों आती। दो साल से धक्के खा रही हूं। मुझे खर्च ही दिला दो। इस पर सख्त हुए मंत्री ने पूछा कि इसका जिम्मेदार कौन है?