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Karnal News: निजी अस्पतालों में आयुष्मान खिड़की बंद, पहले दिन 57 मरीज लौटे
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- जिले के निजी अस्पतालों का लगभग चार करोड़ बकाया नहीं मिलने पर बंद किया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हरियाणा के आह्वान पर शनिवार को आयुष्मान के सूचीबद्ध निजी अस्पतालों ने चिरायु आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज पूर्ण रूप से बंद रखा। पहले दिन जिले के 34 निजी अस्पतालों में लगभग 57 मरीज आयुष्मान की खिड़की बंद देखकर वापस लौट गए तो कुछ ने सरकारी अस्पतालों की ओर रुख किया।
आयुष्मान भारत योजना के पैनल से जुड़े जिले में 34 अस्पताल हैं। जिनमें योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 1500 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे थे लेकिन इसके बदले लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा था। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ने लगी थीं।
भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी थी। सरकार की ओर से इलाज के खर्च का भुगतान न किए जाने से निजी अस्पताल संचालकों में रोष है और उन्होंने 16 मार्च से अस्पतालों में इलाज बंद कर दिया है हालांकि पहले से ही दाखिल मरीजों का इलाज चलता रहेगा।
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चार करोड़ रुपये बकाया
आईएमए करनाल के जिला प्रधान डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि जिले के आयुष्मान के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में लगभग चार करोड़ सरकार की ओर बकाया है। जिसका करीब छह माह से भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं वे जो बिल भेजते हैं तो उनमें भारी कटौती कर दी जाती है। जिससे संचालकों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी बकाया राशि नहीं देती है तब तक इलाज पूर्ण रूप से बंद रहेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हरियाणा के आह्वान पर शनिवार को आयुष्मान के सूचीबद्ध निजी अस्पतालों ने चिरायु आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज पूर्ण रूप से बंद रखा। पहले दिन जिले के 34 निजी अस्पतालों में लगभग 57 मरीज आयुष्मान की खिड़की बंद देखकर वापस लौट गए तो कुछ ने सरकारी अस्पतालों की ओर रुख किया।
आयुष्मान भारत योजना के पैनल से जुड़े जिले में 34 अस्पताल हैं। जिनमें योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 1500 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे थे लेकिन इसके बदले लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा था। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ने लगी थीं।
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भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी थी। सरकार की ओर से इलाज के खर्च का भुगतान न किए जाने से निजी अस्पताल संचालकों में रोष है और उन्होंने 16 मार्च से अस्पतालों में इलाज बंद कर दिया है हालांकि पहले से ही दाखिल मरीजों का इलाज चलता रहेगा।
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चार करोड़ रुपये बकाया
आईएमए करनाल के जिला प्रधान डॉ. नवीन गुप्ता ने बताया कि जिले के आयुष्मान के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में लगभग चार करोड़ सरकार की ओर बकाया है। जिसका करीब छह माह से भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं वे जो बिल भेजते हैं तो उनमें भारी कटौती कर दी जाती है। जिससे संचालकों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी बकाया राशि नहीं देती है तब तक इलाज पूर्ण रूप से बंद रहेगा।