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Karnal News: जागरूकता बढ़ी, हिंसा पर कानूनी सहायता ले रहीं महिलाएं
Tue, 06 Jan 2026 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 06 Jan 2026 02:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है। महिलाएं इसके खिलाफ खड़ी हो रही हैं। पूर्व में जहां पड़ोसी या रिश्तेदारों की ओर से शिकायत अधिक होती थी, वहीं अब खुद से सुकून केंद्र पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। वह अपने बच्चों के लिए रिश्ते को बचाने की कोशिश तो करती हैं लेकिन मानसिक प्रताड़ना सहने के लिए तैयार नहीं हैं। हर माह तीन से चार महिलाएं ऐसी पहुंच रही हैं जो पहली बार घर से निकलकर अपने लिए आवाज उठा रही हैं। महिलाओं को स्वास्थ्य और कानूनी सहायता के लिए परामर्श दिया जाता है।
जिले के सुकून केंद्र में बीते महीनों के दौरान घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। जिला काउंसलर अन्नू ने बताया कि दौर बदल रहा है। महिलाएं अपनी पीड़ा साझा कर रही हैं। शारीरिक हिंसा के साथ मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक नियंत्रण, यौन शोषण और धमकी आदि पर बिना किसी सहायता के शिकायत लेकर पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि सुकुन केंद्र में महिलाएं अपनी मन की बातें, परेशानियां खुल कर बता पाती हैं। वहीं कई महिलाएं ऐसी जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं होता जिस कारण वह गंभीर मानसिक तनाव से घिरती चली जाती हैं।
-शादी के कुछ महीनों के बाद ही शुरू हो गई प्रताड़ना
एक मामले में 34 वर्षीय महिला कम दहेज लाने के ताने मारे जाने और मारपीट की शिकायत लेकर पहुंचीं। उनके दो बच्चे थे। शादी के कुछ महीनों के बाद से ही पति का व्यवहार आक्रामक होता गया। बच्चों के सामने गाली-गलौज और धमकियां आम होने लगीं। आखिर सुकून केंद्र पहुंचीं। काउंसिलिंग के बाद महिला कानूनी सलाह लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की। वर्तमान में महिला आत्मनिर्भर होने के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
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-आर्थिक नियंत्रण, परिवार से मिलने की नहीं थी अनुमति
28 वर्षीय महिला निजी कंपनी में कार्यरत थीं। शादी के बाद पति ने उनकी नौकरी छुड़वा दी। हर खर्च का हिसाब मांगने लगे। दोस्तों और मायके वालों से मिलने पर पाबंदियां लगा दी गईं। विरोध करने पर मानसिक प्रताड़ना और धमकियां दी जाती थीं। सुकून केंद्र की काउंसिलिंग ने महिला को यह समझने में मदद की कि आर्थिक नियंत्रण भी हिंसा का एक रूप है। केंद्र से महिला को कानूनी सलाह दी गई साथ ही मानसिक स्थिति को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य सहायता भी दी जा रही है।
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करनाल। घरेलू हिंसा के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है। महिलाएं इसके खिलाफ खड़ी हो रही हैं। पूर्व में जहां पड़ोसी या रिश्तेदारों की ओर से शिकायत अधिक होती थी, वहीं अब खुद से सुकून केंद्र पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। वह अपने बच्चों के लिए रिश्ते को बचाने की कोशिश तो करती हैं लेकिन मानसिक प्रताड़ना सहने के लिए तैयार नहीं हैं। हर माह तीन से चार महिलाएं ऐसी पहुंच रही हैं जो पहली बार घर से निकलकर अपने लिए आवाज उठा रही हैं। महिलाओं को स्वास्थ्य और कानूनी सहायता के लिए परामर्श दिया जाता है।
जिले के सुकून केंद्र में बीते महीनों के दौरान घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। जिला काउंसलर अन्नू ने बताया कि दौर बदल रहा है। महिलाएं अपनी पीड़ा साझा कर रही हैं। शारीरिक हिंसा के साथ मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक नियंत्रण, यौन शोषण और धमकी आदि पर बिना किसी सहायता के शिकायत लेकर पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि सुकुन केंद्र में महिलाएं अपनी मन की बातें, परेशानियां खुल कर बता पाती हैं। वहीं कई महिलाएं ऐसी जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं होता जिस कारण वह गंभीर मानसिक तनाव से घिरती चली जाती हैं।
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-शादी के कुछ महीनों के बाद ही शुरू हो गई प्रताड़ना
एक मामले में 34 वर्षीय महिला कम दहेज लाने के ताने मारे जाने और मारपीट की शिकायत लेकर पहुंचीं। उनके दो बच्चे थे। शादी के कुछ महीनों के बाद से ही पति का व्यवहार आक्रामक होता गया। बच्चों के सामने गाली-गलौज और धमकियां आम होने लगीं। आखिर सुकून केंद्र पहुंचीं। काउंसिलिंग के बाद महिला कानूनी सलाह लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की। वर्तमान में महिला आत्मनिर्भर होने के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।
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-आर्थिक नियंत्रण, परिवार से मिलने की नहीं थी अनुमति
28 वर्षीय महिला निजी कंपनी में कार्यरत थीं। शादी के बाद पति ने उनकी नौकरी छुड़वा दी। हर खर्च का हिसाब मांगने लगे। दोस्तों और मायके वालों से मिलने पर पाबंदियां लगा दी गईं। विरोध करने पर मानसिक प्रताड़ना और धमकियां दी जाती थीं। सुकून केंद्र की काउंसिलिंग ने महिला को यह समझने में मदद की कि आर्थिक नियंत्रण भी हिंसा का एक रूप है। केंद्र से महिला को कानूनी सलाह दी गई साथ ही मानसिक स्थिति को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य सहायता भी दी जा रही है।