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सावधान! दूषित पानी पी रहे हैं आप, सेहत हो सकती है खराब
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करनाल। सावधान! जिले के कई इलाकों में दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, जिसे पीने से आपकी सेहत खराब हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है, क्योंकि विभिन्न इलाकों से लिए गए पानी के 151 में से 13 नमूने फेल मिले हैं। यानी इन इलाकों का पानी पीने योग्य नहीं है। इस संदर्भ में स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा है।
स्वास्थ्य विभाग हर महीने पानी के नमूने लेता है और उनकी प्रयोगशाला में जांच करवाई जाती है। ऐसे ही मार्च महीने में विभिन्न क्षेत्रों से पानी के 151 नमूने लिए गए थे, जिनमें आठ नमूने शहर से, वहीं पांच नमूने ग्रामीण इलाकों से लिए गए। इनमें से तीन नमूनों में हाइपो क्लोरीन की मात्रा मानकों से अधिक मिली है, जो कि सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विडंबना है कि नगर निगम की ओर से जनता के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना और बिना जांच के दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है।
जन स्वास्थ्य विभाग के 600, निगम के 175 ट्यूबवेल
शहर में नगर निगम के जल विंग की ओर से पानी की सप्लाई दी जा रही है। निगम के शहर में करीब 175 ट्यूबवेल हैं। वहीं, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से करीब 600 ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई की जाती है।
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यहां का पानी पीने योग्य नहीं
सेक्टर-13 डिस्पेंसरी क्षेत्र में तीन जगह से पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें हाइपो क्लोरीन की मात्रा अधिक मिली। वहीं, पीएचसी सग्गा क्षेत्र में दो और पीएचसी सांभली में तीन जगहों के सैंपल अनफिट मिले। यूपीएचसी सिटी डिस्पेंसरी में दो और यूपीएचसी शिव कॉलोनी में तीन जगह सैंपल अनफिट मिले।
इन बीमारियों का खतरा
मेडिकल ऑफिसर डॉ स्वाति ने बताया कि गंदा पानी पीने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें हैजा, बुखार, उल्टी, दस्त व टाइफाइड शामिल हैं। पानी में क्लोरीन की मात्रा अधिक होने से दांतों से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।
वर्जन- फोटो- 54
मार्च महीने में विभिन्न इलाकों से 151 पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 13 मानकों पर खरा नहीं उतर पाए। कह सकते हैं कि पीने योग्य पानी नहीं है। इस संदर्भ में नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा गया है।
सुरेंद्र, सेनेटरी इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य विभाग करनाल
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स्वास्थ्य विभाग हर महीने पानी के नमूने लेता है और उनकी प्रयोगशाला में जांच करवाई जाती है। ऐसे ही मार्च महीने में विभिन्न क्षेत्रों से पानी के 151 नमूने लिए गए थे, जिनमें आठ नमूने शहर से, वहीं पांच नमूने ग्रामीण इलाकों से लिए गए। इनमें से तीन नमूनों में हाइपो क्लोरीन की मात्रा मानकों से अधिक मिली है, जो कि सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। विडंबना है कि नगर निगम की ओर से जनता के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना और बिना जांच के दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है।
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जन स्वास्थ्य विभाग के 600, निगम के 175 ट्यूबवेल
शहर में नगर निगम के जल विंग की ओर से पानी की सप्लाई दी जा रही है। निगम के शहर में करीब 175 ट्यूबवेल हैं। वहीं, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से करीब 600 ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई की जाती है।
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यहां का पानी पीने योग्य नहीं
सेक्टर-13 डिस्पेंसरी क्षेत्र में तीन जगह से पानी के सैंपल लिए गए, जिनमें हाइपो क्लोरीन की मात्रा अधिक मिली। वहीं, पीएचसी सग्गा क्षेत्र में दो और पीएचसी सांभली में तीन जगहों के सैंपल अनफिट मिले। यूपीएचसी सिटी डिस्पेंसरी में दो और यूपीएचसी शिव कॉलोनी में तीन जगह सैंपल अनफिट मिले।
इन बीमारियों का खतरा
मेडिकल ऑफिसर डॉ स्वाति ने बताया कि गंदा पानी पीने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें हैजा, बुखार, उल्टी, दस्त व टाइफाइड शामिल हैं। पानी में क्लोरीन की मात्रा अधिक होने से दांतों से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।
वर्जन- फोटो- 54
मार्च महीने में विभिन्न इलाकों से 151 पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 13 मानकों पर खरा नहीं उतर पाए। कह सकते हैं कि पीने योग्य पानी नहीं है। इस संदर्भ में नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा गया है।
सुरेंद्र, सेनेटरी इंस्पेक्टर, स्वास्थ्य विभाग करनाल