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Karnal News: आज सीएम आवास का घेराव करेंगी आशा कर्मी
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सरकार के साथ बैठक रद होने पर लिया निर्णय, सिविल सर्जन कार्यालय पर किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले मंगलवार को 36वें दिन भी आशा कर्मी हड़ताल पर बैठीं। आशा कर्मियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, आशा कर्मियों ने सरकार के साथ बैठक रद होने पर निर्णय लिया कि वह 13 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी।
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान कविता ने बताया कि प्रदेश की 20 हजार आशा कर्मी अगस्त से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार बातचीत करके मसले का समाधान नहीं कर रही है। आशा कर्मियों को 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं व जनता के बीच कड़ी के रूप में लगाया था। इस उपलब्धि को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी दर्ज किया है। महत्वपूर्ण कामों के बदले सरकार आशा कर्मियों को मामूली प्रोत्साहन राशियां देती हैं।
आशा कर्मियों ने कोरोना महामारी के दौरान भी शानदार काम किया था। जिसकी सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की थी और आशा कर्मियों को ग्लोबल हेल्थ लीडर्स का अवाॅर्ड दिया था। जिला सचिव सुदेश ने बताया कि अब सरकार आशा कर्मियों से उनके इन बुनियादी 40 कामों के अतिरिक्त रोज नए-नए काम थोप रही है। आशा कर्मी पर तमाम तरह के सर्वे ऑनलाइन करने, एनसीडी का सर्वे, आयुष्मान भारत कार्ड की केवाईसी करने, कार्ड जनरेट करने, टीबी सर्वे और गांव नशा करने वालों की संख्या और वह किस प्रकार का नशा करते हैं यह सभी काम सरकार आशा कर्मियों से बिल्कुल फ्री में करवा रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से पिछले पांच सालों से आशा कर्मियों के मानदेय और प्रोत्साहन राशियों में वृद्धि नहीं की गई है जबकि काम तीन गुना बढ़ा दिया है जबकि महंगाई दोगुनी हो गई है। मौके पर ओपी माटा, सतीश कुमार, धीरज सिंह रावत, कामरेड जगमाल सिंह, शिशपाल, रूपा राणा, मंजू बवेजा, कांता, जगदीश, नीरू, सुरेशो, शोभा, गीता व लाभ सिंह आर्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले मंगलवार को 36वें दिन भी आशा कर्मी हड़ताल पर बैठीं। आशा कर्मियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, आशा कर्मियों ने सरकार के साथ बैठक रद होने पर निर्णय लिया कि वह 13 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी।
आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान कविता ने बताया कि प्रदेश की 20 हजार आशा कर्मी अगस्त से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार बातचीत करके मसले का समाधान नहीं कर रही है। आशा कर्मियों को 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं व जनता के बीच कड़ी के रूप में लगाया था। इस उपलब्धि को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी दर्ज किया है। महत्वपूर्ण कामों के बदले सरकार आशा कर्मियों को मामूली प्रोत्साहन राशियां देती हैं।
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आशा कर्मियों ने कोरोना महामारी के दौरान भी शानदार काम किया था। जिसकी सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की थी और आशा कर्मियों को ग्लोबल हेल्थ लीडर्स का अवाॅर्ड दिया था। जिला सचिव सुदेश ने बताया कि अब सरकार आशा कर्मियों से उनके इन बुनियादी 40 कामों के अतिरिक्त रोज नए-नए काम थोप रही है। आशा कर्मी पर तमाम तरह के सर्वे ऑनलाइन करने, एनसीडी का सर्वे, आयुष्मान भारत कार्ड की केवाईसी करने, कार्ड जनरेट करने, टीबी सर्वे और गांव नशा करने वालों की संख्या और वह किस प्रकार का नशा करते हैं यह सभी काम सरकार आशा कर्मियों से बिल्कुल फ्री में करवा रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से पिछले पांच सालों से आशा कर्मियों के मानदेय और प्रोत्साहन राशियों में वृद्धि नहीं की गई है जबकि काम तीन गुना बढ़ा दिया है जबकि महंगाई दोगुनी हो गई है। मौके पर ओपी माटा, सतीश कुमार, धीरज सिंह रावत, कामरेड जगमाल सिंह, शिशपाल, रूपा राणा, मंजू बवेजा, कांता, जगदीश, नीरू, सुरेशो, शोभा, गीता व लाभ सिंह आर्य मौजूद रहे।
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