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आरोही स्कूलों में फिर अध्यापकों की कमी
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Fri, 24 Jan 2014 06:42 PM IST
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जिले के तीन आरोही स्कूल एक बार फिर अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं। अध्यापकों की कमी के कारण पिछले साल विद्यार्थियों ने आरोही स्कूल को छोड़ दिया था। इसके बाद जैसे-तैसे स्कूलों में अध्यापकों की पूर्ति एक बार फिर से अध्यापकों की नियमित अध्यापकों के कारण खाली हो गई है।
क्योंकि अधिकतर अध्यापकों की नियुक्ति बतौर नियमित अध्यापक हो गई है, जबकि इन स्कूलों में ठेके पर अध्यापकों की भर्ती की गई थी। जिले में स्थित तीन आरोही स्कूलों में 18 अध्यापकों की नियमित नियुक्ति हुई है।
पिछले साल अध्यापकों की कमी के चलते आरोही स्कूलों में कक्षा ग्याहरवीं और बारहवीं में केवल 1 से 10 के बीच में ही रह गए थे। जिले में गांव ग्योंग, रामगढ़ पाडवा, सौंगरी गुलियाना में आरोही स्कूल चल रहे हैं।
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ठप हो रही है पढ़ाई
स्कूलों में मॉडल पेश करने करने के लिए ये स्कूल शुरू किए गए थे। इनमें अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो रही है। इनके लिए विशेष रूप से स्टॉफ की भर्ती की गई थी।
इसी के चलते बच्चों ने इन स्कूलों में दाखिला लिया था, लेकिन अब न तो स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए स्टाफ पहुंचा न ही स्कूलों का भवन तैयार हुआ। इसके कारण विद्यार्थियों ने दाखिला लेने के बाद स्कूल छोड़ कर अन्य स्कूलों का रुख कर लिया है।
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क्योंकि अधिकतर अध्यापकों की नियुक्ति बतौर नियमित अध्यापक हो गई है, जबकि इन स्कूलों में ठेके पर अध्यापकों की भर्ती की गई थी। जिले में स्थित तीन आरोही स्कूलों में 18 अध्यापकों की नियमित नियुक्ति हुई है।
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पिछले साल अध्यापकों की कमी के चलते आरोही स्कूलों में कक्षा ग्याहरवीं और बारहवीं में केवल 1 से 10 के बीच में ही रह गए थे। जिले में गांव ग्योंग, रामगढ़ पाडवा, सौंगरी गुलियाना में आरोही स्कूल चल रहे हैं।
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स्कूलों में मॉडल पेश करने करने के लिए ये स्कूल शुरू किए गए थे। इनमें अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो रही है। इनके लिए विशेष रूप से स्टॉफ की भर्ती की गई थी।
इसी के चलते बच्चों ने इन स्कूलों में दाखिला लिया था, लेकिन अब न तो स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए स्टाफ पहुंचा न ही स्कूलों का भवन तैयार हुआ। इसके कारण विद्यार्थियों ने दाखिला लेने के बाद स्कूल छोड़ कर अन्य स्कूलों का रुख कर लिया है।