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एक्यूआई 223: रात के सन्नाटे में तापमान गिरते ही घुल रहा शहर की हवा में जहर
Tue, 28 Oct 2025 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 28 Oct 2025 02:13 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मौसम बदलते ही शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। दिन की तुलना में रात के समय प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ रहा है। विशेष रूप से रात नौ बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा दोगुनी से भी अधिक पाई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति श्वास रोगियों, दिल के मरीजों और फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो गई है। सचिवालय के पास स्थापित सीएएक्यूएमएस (सेंट्रल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन) मशीन के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को एक्यूआई 223 दर्ज किया गया।
पिछले कुछ दिनों में औसतन पीएम-2.5 का स्तर 227 तक पहुंच चुका है जबकि पीएम-10 की वैल्यू 184 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह स्तर सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों के अनुसार खराब और बहुत खराब श्रेणी में आता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रात के समय तापमान गिरने से हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे प्रदूषक कण जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं। वहीं दिन में सूर्य की गर्मी के कारण हवा ऊपर उठती है, जिससे प्रदूषक कुछ हद तक फैल जाते हैं। यही वजह है कि रात में हवा और भी ज्यादा जहरीली हो जाती है।
सुबह की सैर करने वाले रहें सतर्क
चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। डॉक्टरों ने खासकर दमा, सीओपीडी (फेफड़ों की बीमारी), हृदय रोग और बुजुर्ग लोगों को चेतावनी दी है कि वे सुबह के समय खुली हवा में व्यायाम या सैर से बचें। सुबह के समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। सभी घर के अंदर ही हल्का व्यायाम करें और प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें।
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वर्जन:
ग्रेप-2 के नियमों के तहत संबंधित विभाग अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। दूसरी ओर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें शहर में निर्माण स्थलों, धूल उड़ाने वाले क्षेत्रों और खुले में कूड़ा जलाने पर निगरानी बढ़ा रही हैं। ग्रेप-2 का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। -रणदीप संधू, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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करनाल। मौसम बदलते ही शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। दिन की तुलना में रात के समय प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ रहा है। विशेष रूप से रात नौ बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा दोगुनी से भी अधिक पाई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति श्वास रोगियों, दिल के मरीजों और फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो गई है। सचिवालय के पास स्थापित सीएएक्यूएमएस (सेंट्रल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन) मशीन के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को एक्यूआई 223 दर्ज किया गया।
पिछले कुछ दिनों में औसतन पीएम-2.5 का स्तर 227 तक पहुंच चुका है जबकि पीएम-10 की वैल्यू 184 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह स्तर सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों के अनुसार खराब और बहुत खराब श्रेणी में आता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रात के समय तापमान गिरने से हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे प्रदूषक कण जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं। वहीं दिन में सूर्य की गर्मी के कारण हवा ऊपर उठती है, जिससे प्रदूषक कुछ हद तक फैल जाते हैं। यही वजह है कि रात में हवा और भी ज्यादा जहरीली हो जाती है।
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सुबह की सैर करने वाले रहें सतर्क
चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। डॉक्टरों ने खासकर दमा, सीओपीडी (फेफड़ों की बीमारी), हृदय रोग और बुजुर्ग लोगों को चेतावनी दी है कि वे सुबह के समय खुली हवा में व्यायाम या सैर से बचें। सुबह के समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। सभी घर के अंदर ही हल्का व्यायाम करें और प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें।
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वर्जन:
ग्रेप-2 के नियमों के तहत संबंधित विभाग अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। दूसरी ओर नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें शहर में निर्माण स्थलों, धूल उड़ाने वाले क्षेत्रों और खुले में कूड़ा जलाने पर निगरानी बढ़ा रही हैं। ग्रेप-2 का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। -रणदीप संधू, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।