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28 मिलियन मीट्रिक टन पहुंची चीनी की सालाना खपत
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कर्मबीर लाठर
करनाल। करीब 130 करोड़ आबादी वाले अपने ही देश में चीनी की सालाना खपत 28 मिलियन मीट्रिक टन (वर्ष 2021 में) तक पहुंच चुकी है। चीनी का उत्पादन 31 मिलियन मीट्रिक टन (2020-21 में) रहा है। भविष्य में भी यह मांग सतत बनी रहेगी। चीनी के अलावा इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने व बायो ईंधन बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। ऐसे में गन्ने का क्षेत्रफल व उत्पादन बनाए रखना होगा।
दूसरी ओर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा व उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों में दो चुनौतियां भी गन्ना उत्पादकों के सामने खड़ी हो चुकी हैं। एक तो गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति (2009 में करनाल से रिलीज) में लालसड़न रोग के लक्षण मिले हैं और चोटीभेदक कीट के प्रति संवेदनशील किस्म है। इस किस्म ने खूबियों की वजह से 80 प्रतिशत क्षेत्र में साम्राज्य फैला रखा है। दूसरी चुनौती यह है कि एकदम किसानों को सीओ-0238 का विकल्प चाहिए। हालांकि गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) ने दिसंबर 2021 में विशेष परिस्थितियों में नई प्रजाति सीओ-15023 रिलीज की। इस किस्म के बीज विस्तार में भी करीब दो वर्ष लगेंगे। संवाद
वर्ष 2020-21 में राज्यवार गन्ने का क्षेत्रफल व उत्पादन
राज्य क्षेत्रफल गन्ना उत्पादन
(लाख हेक्टेयर) (मिलियन टन)
उत्तरप्रदेश 21.80 177.67
महाराष्ट्र 11.43 101.59
कर्नाटक 4.43 42.09
बिहार 2.19 10.71
तमिलनाडु 1.25 12.80
गुजरात 2.15 15.85
मध्यप्रदेश 1.10 5.88
हरियाणा 0.99 8.53
आंध्रप्रदेश 0.55 4.12
उत्तराखंड 0.84 6.96
पंजाब 0.89 7.49
तेलंगाना 0.20 1.36
वेस्ट बंगाल 0.19 1.56
अन्य 0.56 2.64
देश में कुल 48.57 399.25
नई किस्म सीओ-15023 का बीज लगभग सभी मिलों तक पहुंच चुका है। बीज विस्तार हो रहा है। इसके साथ किसान सीओ-0118 किस्म को भी लगाएं। सीओ-0238 किस्म को भी तीन-चार वर्ष तक चलाएंगे। एकदम किस्म बदलना संभव नहीं होता। फिलहाल इस किस्म को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों के बताए सुझाव व उपाय अपनाएं ताकि लालसड़न रोग नियंत्रित रहे। गन्ना उत्पादन में कमी नहीं होने दी जाएगी। हरियाणा के बाद पंजाब व उत्तरप्रदेश के किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
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- डॉ. एसके पांडे, अध्यक्ष, गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल
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करनाल। करीब 130 करोड़ आबादी वाले अपने ही देश में चीनी की सालाना खपत 28 मिलियन मीट्रिक टन (वर्ष 2021 में) तक पहुंच चुकी है। चीनी का उत्पादन 31 मिलियन मीट्रिक टन (2020-21 में) रहा है। भविष्य में भी यह मांग सतत बनी रहेगी। चीनी के अलावा इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने व बायो ईंधन बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। ऐसे में गन्ने का क्षेत्रफल व उत्पादन बनाए रखना होगा।
दूसरी ओर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा व उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों में दो चुनौतियां भी गन्ना उत्पादकों के सामने खड़ी हो चुकी हैं। एक तो गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति (2009 में करनाल से रिलीज) में लालसड़न रोग के लक्षण मिले हैं और चोटीभेदक कीट के प्रति संवेदनशील किस्म है। इस किस्म ने खूबियों की वजह से 80 प्रतिशत क्षेत्र में साम्राज्य फैला रखा है। दूसरी चुनौती यह है कि एकदम किसानों को सीओ-0238 का विकल्प चाहिए। हालांकि गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) ने दिसंबर 2021 में विशेष परिस्थितियों में नई प्रजाति सीओ-15023 रिलीज की। इस किस्म के बीज विस्तार में भी करीब दो वर्ष लगेंगे। संवाद
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वर्ष 2020-21 में राज्यवार गन्ने का क्षेत्रफल व उत्पादन
राज्य क्षेत्रफल गन्ना उत्पादन
(लाख हेक्टेयर) (मिलियन टन)
उत्तरप्रदेश 21.80 177.67
महाराष्ट्र 11.43 101.59
कर्नाटक 4.43 42.09
बिहार 2.19 10.71
तमिलनाडु 1.25 12.80
गुजरात 2.15 15.85
मध्यप्रदेश 1.10 5.88
हरियाणा 0.99 8.53
आंध्रप्रदेश 0.55 4.12
उत्तराखंड 0.84 6.96
पंजाब 0.89 7.49
तेलंगाना 0.20 1.36
वेस्ट बंगाल 0.19 1.56
अन्य 0.56 2.64
देश में कुल 48.57 399.25
नई किस्म सीओ-15023 का बीज लगभग सभी मिलों तक पहुंच चुका है। बीज विस्तार हो रहा है। इसके साथ किसान सीओ-0118 किस्म को भी लगाएं। सीओ-0238 किस्म को भी तीन-चार वर्ष तक चलाएंगे। एकदम किस्म बदलना संभव नहीं होता। फिलहाल इस किस्म को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों के बताए सुझाव व उपाय अपनाएं ताकि लालसड़न रोग नियंत्रित रहे। गन्ना उत्पादन में कमी नहीं होने दी जाएगी। हरियाणा के बाद पंजाब व उत्तरप्रदेश के किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
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- डॉ. एसके पांडे, अध्यक्ष, गन्ना प्रजनन केंद्र करनाल