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Karnal News: पशुओं को मिले टैग नंबर, बेसहारा छोड़ने वालों पर कसे शिकंजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Aug 2024 03:26 PM IST
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Animals get tag numbers, tighten the noose on those who leave them destitute
बेसहारा पशुओं से निजात के लिए बुद्धिजीवियों, गोसेवकों व गोशाला संचालकों ने दी राय
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एक सप्ताह तक लगातार अमर उजाला की ओर से बेसहारा पशुओं की समस्या को उठाया गया। बुद्धिजीवियों, गोसेवकों, गोशाला संचालकों ने भी इन पशुओं से निजात पाने के लिए अपनी राय दी है। कई लोगों का कहना है कि सबसे पहले लोगों को अपनी नैतिक जिम्मेदारी का एहसास कराना आवश्यक है। इसके साथ ही सभी पशुओं को टैग नंबर देना भी जरूरी है, जिससे पता चल सके कि पशु को छोड़ा किसने है। पशुओं को बेसहारा सड़कों पर छोड़ने पर भी दंड का प्रावधान जरूरी बताया है।
बेसहारा पशुओं के सड़कों पर घूमने की समस्या कई सालों से बनी हुई है। नगर निगम हो या नगरपालिका सभी इन पशुओं को सड़कों से पकड़कर गोशालाओं में छोड़ने का दावा करते हैं। परिणाम ये है कि शहर की गोशालाएं फुल हैं। उनमें क्षमता से अधिक गोवंश हैं। कस्बों व गांवों में स्थित गोशालाओं के संचालक दावा करते हैं कि उनके दरवाजे गोवंश के लिए खुले हैं लेकिन कुछ गोशाला संचालकों पर आरोप भी लगते हैं कि वह बेसहारा गोवंश को लेने से इनकार करते हैं।
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गोशाला की आय की हो व्यवस्था
अल्फा आरडब्ल्यूए के प्रधान प्रो. जोगिंद्र मदान कहते हैं कि गोवंश के लिए सरकार स्थायी आय की व्यवस्था करे, गोचरान की भूमि को खाली कराकर उसे ठेके पर दे, पशुओं की नंबरिंग करें, ताकि पता चल सके कि ये पशु किसने छोड़ा है। दूध पर एक रुपया या 50 पैसा प्रति लीटर के हिसाब से गोवंश की व्यवस्था के लिए लिया जाए, उस पैसे से गोशालाओं की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए।
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पशु छोड़ने वालों पर लगे जुर्माना
श्रीराधा कृष्ण गोशाला अर्जुन गेट के प्रधान कृष्ण लाल तनेजा कहते हैं कि पहले पशुओं को बेसहारा छोड़ने वालों पर शिकंजा कसा जाए, उस पर 50 हजार से एक लाख तक का जुर्माने का प्राविधान हो। पशुओं के टोकन लगाएं। लोगों को जागरूक करें ताकि वह गोवंश को बेसहारा न छोड़ें।

बेसहारा पशुओं का डाटा हो तैयार
गोशाला संचालक गोपाल स्वामी का कहना है कि गोशालाओं से लगते क्षेत्र में वैसे तो बहुत कम देखने को मिल रही है, लेकिन फिर भी जितनी भी गाय बेसहारा सड़कों, खेतों, चौक चौराहों पर घूम रही हैं, उनका डाटा तैयार होना आवश्यक है। उन गायों को साथ लगती गोशालाओं में भेजा जाना चाहिए।

निकाय जिम्मेदारी से नहीं कर रहे कार्य
मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि (एडब्ल्यूबीआई) व एसपीसीए सदस्य विजय लिलारिया कहते हैं कि 2015 में पशुक्रूरता अधिनियम समिति (एसपीसीए) की बैठक में पशु को बेसहारा छोड़ने वाले पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन पालन नहीं हो पाया। स्थानीय निकाय अपना कार्य जिम्मेदारी से नहीं कर रहे हैं।

संस्था बनाए तो गोवंश भी रखें
-गोसेवक दिनेश ने बताया कि आवारा पशुओं के लिए सरकार को एक नियम लागू करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति यदि अपनी संस्था बनाता है, तो वह 20 गोवंश को अपनी संस्था के सदस्यों के साथ मिलकर एक स्थान पर रखे। जो लोग किसी मंदिर के सदस्य हैं, उनको भी गाय के लिए जगह बनानी चाहिए।



निगम खोले एक और गोशाला
गोसेवक संदीप कहते हैं कि नगर निगम को एक अलग से गोशाला खोलनी चाहिए ताकि शहर में आवारा घूम रहे गोवंशों को एक आसरा मिल सके। उसमें उन गायों को भी रखा जाए जो दूध नहीं देती है ताकि बारिश व ठंड के दिनों में उनको आसरा लेने के लिए भटकना न पड़े।



गोशालाएं भी बिना दूध देने वाले पशुओं को न छोड़ें
गोसेवक अंकित कहते हैं कि निगम को पहले गोवंश की गिनती करानी चाहिए, उसके हिसाब से उनके रहने व खानपान की व्यवस्था करनी चाहिए। निगम को अपने गोशाला का क्षेत्र बढ़ाना चाहिए। गोशाला संचालक भी दूध नहीं देने वाले पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं, इन पर भी निगरानी हो।




पशु पकड़ने का दिखावा न हो
गोसेवक साहिल ने बताया कि पिछले दिनों नगर निगम ने बेसहारा पशुओं को पकड़ने का कार्य किया था लेकिन एक दो दिन कुछ पशु पकड़ने का दिखावा करता है और फिर शांत हो जाता है। निगम को शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त कराना चाहिए। पशुओं को छोड़ने वालों पर भी निगरानी रखनी चाहिए।
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