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पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य : एसडीएम
अमर उजाला ब्यूरो/असंध
Updated Tue, 18 Feb 2014 09:25 PM IST
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एसडीएम विक्रम सिंह मलिक ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से दुधारू पशुओं की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन सुरक्षा योजना एक जनवरी से लागू हो चुकी है।
इसका लाभ लेने के लिए पशुपालक को अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक के पास अपने दुधारू पशु का 100 रुपये वार्षिक शुल्क देकर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
बकरी के लिए पंजीकरण 25 रुपये निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत दुधारू गाय, भैंस, बकरियां आएगी।
इनकी मृत्यु होने की दशा में पशु मालिक को देशी गाय के लिए 20 से 30 हजार रुपये, विदेशी गाय के लिए 30 से 40 हजार रुपये, भैंस के लिए 40 से 50 हजार रुपये और बकरी के लिए तीन हजार रुपये की राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि मुआवजा निपटान के लिए जिला स्तर पर मुआवजा निपटान समिति का गठन किया गया है, जिसमें एडीसी, उप निदेशक पशु पालन विभाग, पशु पालन विभाग के एसडीओ, पशु चिकित्सक और गांव का सरपंच या पंचायत का कोई सदस्य शामिल होंगे।
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उन्होंने बताया कि पंजीकृत दुधारू पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक द्वारा अपने गांव के सरपंच और पशु चिकित्सक को सूचना देनी होगी।
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इसका लाभ लेने के लिए पशुपालक को अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक के पास अपने दुधारू पशु का 100 रुपये वार्षिक शुल्क देकर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
बकरी के लिए पंजीकरण 25 रुपये निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत दुधारू गाय, भैंस, बकरियां आएगी।
इनकी मृत्यु होने की दशा में पशु मालिक को देशी गाय के लिए 20 से 30 हजार रुपये, विदेशी गाय के लिए 30 से 40 हजार रुपये, भैंस के लिए 40 से 50 हजार रुपये और बकरी के लिए तीन हजार रुपये की राशि मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि मुआवजा निपटान के लिए जिला स्तर पर मुआवजा निपटान समिति का गठन किया गया है, जिसमें एडीसी, उप निदेशक पशु पालन विभाग, पशु पालन विभाग के एसडीओ, पशु चिकित्सक और गांव का सरपंच या पंचायत का कोई सदस्य शामिल होंगे।
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उन्होंने बताया कि पंजीकृत दुधारू पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक द्वारा अपने गांव के सरपंच और पशु चिकित्सक को सूचना देनी होगी।