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एनडीआरआई करनाल में 6 और भैंसों की मौत हुई, बीमार पशुओं को अलग रखा, वैज्ञानिक कर रहे जांच
Wed, 18 Sep 2019 10:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 10:34 AM IST
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के पशुधन अनुसंधान केंद्र में चार कटड़ी समेत 38 मुर्राह भैंसों की मौत की पुष्टि हुई है। संस्थान के मुताबिक मंगलवार को एक जबकि सूत्रों के अनुसार छह भैंसों की मौत हुई। तीन दिन से भैंसों की लगातार हो रही मौत के कारणों की जांच में जुटी तीन टीमें अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भैंसों की मौत का प्रारंभिक कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन बताया जा रहा है। पशुओं की लगातार हो रही मौतों से एनडीआरआई में हड़कंप की स्थिति है। मामले में चर्चा है कि देश के नामी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा तीन दिन बाद भी भैंसों के मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाना संदेह पैदा करता है। वर्तमान में एनडीआरआई में पशुओं के शव, फीड और अन्य चीजों को छिपाया जा रहा है।
पशुओं की मौत का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। भैंसों की मौत की जांच के लिए एनडीआरआई के वैज्ञानिकों के अलावा लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार और इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली के वैज्ञानिक भी जुटे हुए हैं। इन मौतों के लिए बैक्टीरियल इंफेक्शन पर संभावना जताई जा रही है लेकिन यह अभी फाइनल नहीं है। इसके कारणों को पुख्ता करने के लिए विसरा दिल्ली लैब भेजा गया है।
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एनडीआरआई में भैंसों की मौत का सिलसिला रुका नहीं है। कई भैंसें बीमार हैं जो अब फीड नहीं ले रही हैं। बीमार भैंसों के लिए अलग से अस्थाई शेड बनाया गया है। फीड के कट्टों को अलग-अलग गोदामों और कोनों में में छिपाया जा रहा है। इसके अलावा मृत पशुओं को 250 एकड़ के कृषि योग्य भूमि में अलग-अलग स्थानों पर दबाया जा रहा है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भैंसों की मौत का प्रारंभिक कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन बताया जा रहा है। पशुओं की लगातार हो रही मौतों से एनडीआरआई में हड़कंप की स्थिति है। मामले में चर्चा है कि देश के नामी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा तीन दिन बाद भी भैंसों के मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाना संदेह पैदा करता है। वर्तमान में एनडीआरआई में पशुओं के शव, फीड और अन्य चीजों को छिपाया जा रहा है।
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पशुओं की मौत का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। भैंसों की मौत की जांच के लिए एनडीआरआई के वैज्ञानिकों के अलावा लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार और इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली के वैज्ञानिक भी जुटे हुए हैं। इन मौतों के लिए बैक्टीरियल इंफेक्शन पर संभावना जताई जा रही है लेकिन यह अभी फाइनल नहीं है। इसके कारणों को पुख्ता करने के लिए विसरा दिल्ली लैब भेजा गया है।
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एनडीआरआई में भैंसों की मौत का सिलसिला रुका नहीं है। कई भैंसें बीमार हैं जो अब फीड नहीं ले रही हैं। बीमार भैंसों के लिए अलग से अस्थाई शेड बनाया गया है। फीड के कट्टों को अलग-अलग गोदामों और कोनों में में छिपाया जा रहा है। इसके अलावा मृत पशुओं को 250 एकड़ के कृषि योग्य भूमि में अलग-अलग स्थानों पर दबाया जा रहा है।
मरने वालों में केवल भैंसें शामिल, गाय नहीं
करीब 20 एकड़ में बने लाइव स्टॉक रिसर्च सेंटर में करीब 2000 पशु हैं। इनमें 550 मुर्राह भैंस शामिल हैं। 11 सितंबर से पशुओं में फैली संदिग्ध बीमारी का शिकार केवल मुर्राह भैंसें ही हुई हैं। इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल प्रोटेक्शन व अन्य सूत्रों के मुताबिक मरने वाली मुर्राह भैंसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें ज्यादा दुधारू शामिल हैं।
तीन केंद्रों के वैज्ञानिक कर रहे हैं जांच
एनडीआरआई के अलावा लुवास हिसार और बरेली के वैज्ञानिक पशुओं की जांच कर रहे हैं। कुछ मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाने पर प्राथमिक जांच में बैक्टीरियल इंफेक्शन पाया गया है। करीब 38 मुर्राह भैंसों की मौत हुई है। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकता है। -डॉ. राजन शर्मा, प्रवक्ता, एनडीआरआई
भैंसों की मौतों से उठे कई सवाल?
अभी तक वैज्ञानिक पशुओं की मौत का कारण नहीं तलाश पाए हैं। सूत्र बताते हैं कि इन मौतों का कारण गंभीर है। तीन बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पहली संभावना कैटल फीड को माना जा रहा है। इसमें सवाल है कि फीड में गड़बड़ी होती तो केवल भैंसें की क्यों मरतीं। गोवंश को भी नुकसान हो सकता था।
दूसरी संभावना तीन दिन बाद भी वैज्ञानिकों द्वारा किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाना बताया जा रहा है। चर्चाओं के अनुसार मामले को दबाया जा रहा है। तीसरी संभावना भैंसों की मौतों को किसी अनुसंधान के फेल होने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार भैंसों पर अनुसंधान किया जा रहा हो और उसके बाद ही इनकी मौत हुई हो।
तीन केंद्रों के वैज्ञानिक कर रहे हैं जांच
एनडीआरआई के अलावा लुवास हिसार और बरेली के वैज्ञानिक पशुओं की जांच कर रहे हैं। कुछ मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाने पर प्राथमिक जांच में बैक्टीरियल इंफेक्शन पाया गया है। करीब 38 मुर्राह भैंसों की मौत हुई है। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकता है। -डॉ. राजन शर्मा, प्रवक्ता, एनडीआरआई
भैंसों की मौतों से उठे कई सवाल?
अभी तक वैज्ञानिक पशुओं की मौत का कारण नहीं तलाश पाए हैं। सूत्र बताते हैं कि इन मौतों का कारण गंभीर है। तीन बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पहली संभावना कैटल फीड को माना जा रहा है। इसमें सवाल है कि फीड में गड़बड़ी होती तो केवल भैंसें की क्यों मरतीं। गोवंश को भी नुकसान हो सकता था।
दूसरी संभावना तीन दिन बाद भी वैज्ञानिकों द्वारा किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाना बताया जा रहा है। चर्चाओं के अनुसार मामले को दबाया जा रहा है। तीसरी संभावना भैंसों की मौतों को किसी अनुसंधान के फेल होने से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार भैंसों पर अनुसंधान किया जा रहा हो और उसके बाद ही इनकी मौत हुई हो।