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आंगनबाड़ी वर्कर्स ने लघु सचिवालय का किया घेराव, एक घंटे तक की नारेबाजी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 02:14 AM IST
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Anganwadi workers roared on the mini secretariat
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने वीरवार को लघु सचिवालय का घेराव किया। करीब एक घंटे तक लघु सचिवालय के समक्ष सड़क पर धरना देकर जमकर नारेबाजी की। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने दूसरे जिलों से करनाल महापड़ाव में आ रही आंगनबाड़ी वर्कर्स को वहां के स्थानीय प्रशासन द्वारा रोकने और आशा वर्कर्स पर एस्मा लगाने पर भी विरोध जताया।
इधर, शुक्रवार को सरकार के साथ तालमेल कमेटी की वार्ता भी है। इस बैठक में समाधान निकलने की उम्मीद है। प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी वर्कर्स ने चेतावनी दी कि यदि बातचीत में समाधान नहीं निकला तो वे अपने आंदोलन को तेज करेंगे। इस दौरान उन्होंने आशा वर्कर्स की गिरफ्तारियों की भी निंदा की।
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तालमेल कमेटी की नेता देवेन्द्री शर्मा, शकुंतला, कृष्णा और पुष्पा दलाल ने कहा कि सरकार ने मीडिया में आंकड़े रखकर लोगों को दोबारा भ्रमित करने का प्रयास किया है। सरकार का दावा है कि हरियाणा वर्कर व हेल्पर को मानदेय देने के मामले में दूसरे नंबर पर है। जबकि हरियाणा पांचवें नंबर पर है। पांडिचेरी व तमिलनाडु में वर्कर व हेल्पर को कर्मचारी का दर्जा मिला है। पांडिचेरी में वर्कर व हेल्पर का मानदेय क्रमश: 19480 व 13330, तेलंगाना में 13650 व 7800, तमिलनाडु में 13453 व 7720, केरल में 13000 व 8750 (1000, 500 घोषित) है। इस अवसर पर सुबे सिंह, हरिप्रकाश, सुमित किसान सभा, एनपी सिंह, राजिन्द्र राणा और मलकीत सिंह मौजूद रहे।
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बोले, दो गुने मानदेय का दावा भी झूठा
तालमेल कमेटी के नेताओं ने कहा कि सरकार दावे कर रही है कि वर्कर्स और हेल्पर्स का मानदेय दोगुना हो गया है, यह भी झूठ है। आंदोलन से पहले वर्कर को 11811 व हेल्पर को 6045 रुपये वेतन दिया जा रहा है। जबकि यह 15000 और 7500 होना चाहिए। आइसीडीएस के अलावा हरियाणा सरकार बड़े पैमाने पर काम ले रही है। और हम केवल वही मांग रहे हैं जो केंद्र व राज्य सरकार 2018 में घोषित कर चुकी है।

ओपन जिम को बनाया लॉंड्री
चार दिन से आंगनबाड़ी वर्कर्स फव्वारा पार्क में डटी हैं। ऐसे में कपड़ों को धोने और सुखाने की व्यवस्था भी यहीं पर की गई है। ओपन जिम के साथ की खाली जगह को लॉंड्री में परिवर्तित किया गया है। यहां पर बारी-बारी से वर्कर्स अपने कपड़े धोकर सुखाती हैं। इसके अलावा फव्वारों के दूसरी तरफ टैंट लगाकर स्नान गृह भी बनाया गया है।
धरने पर सभी तरह की व्यवस्था हो रही है। आंदोलन जितना मर्जी लंबा चले हमें परवाह नहीं। सरकार को मांगें माननी होंगी।
- पूनम
आज की वार्ता निर्णायक होनी चाहिए। सरकार पिछली बैठकों की तरह हठधर्मिता न रखे। समाधान के प्रयास करने चाहिए।
- सुमन
सुबह वर्कर्स को जिले से बाहर जाने के लिए रोकने का प्रशासन का प्रयास निंदनीय है। यह हमारे अधिकारों का हनन है।
- राजबाला
वर्कर्स को बसों में नहीं आने दिया। कई जगह चेकिंग भी की गई। कुछ वर्कर्स अपनी वर्दी बदलकर करनाल पहुंची हैं।
- मोनिका
आशा वर्कर्स पर एस्मा लगाना निंदनीय है। सरकार किसी को अपनी आवाज उठाने से नहीं रोक सकती।
- महेश
सरकार के व्यवहार से वर्कर्स में रोष है। सरकार समाधान करने के बजाय हमारे अधिकारों का हनन करने का प्रयास कर रही है।
- नीलम
सरकार केवल छह हजार रुपये देती है। विधवा महिला इतने पैसों में घर कैसे चला सकती है। दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल से हो पाता है।
-ललिता
अब घर से निकले हैं तो जीतकर ही लौटेंगे। सरकार को हमारी मांग माननी ही होगी। विधवा महिलाओं की स्थिति को भी सरकार समझे।
- शकुंतला
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