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Karnal: दशाश्वमेध तीर्थ पर खोदाई के दौरान मिली प्राचीन ईंटों की दीवार, विशेषज्ञों का दावा 2200 साल पुरानी

Thu, 22 Feb 2024 10:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गगन तलवार, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 22 Feb 2024 10:22 AM IST
सार

हरियाणा के कई जिलों में तीर्थों के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इस कड़ी में  करनाल में खोदाई के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवार मिली है। यहां मिली एक ईंट की लंबाई करीब एक फुट और वजन करीब छह किलोग्राम तक है।

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Ancient brick wall found during excavation at Dashashwamedh Tirtha
दशाश्वमेध तीर्थ पर खोदाई के दौरान मिली प्राचीन ईंटों की दीवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करनाल के सालवन गांव के महाभारत कालीन तीर्थ दशाश्वमेध पर जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। यहां खोदाई के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवार मिली है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह कुषाण कालीन दीवार है, जो कि करीब 2200 साल पुरानी हो सकती है। यहां मिली एक ईंट की लंबाई करीब एक फुट और वजन करीब छह किलोग्राम तक है।

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पुरातत्वविद डॉ. विनय कुमार और सालवन गांव निवासी एवं हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पीएचडी शोधार्थी प्रवीण कुमार का कहना है कि जिस आकार की ये ईंट हैं, ठीक उसी तरह की ईंटों का उपयोग करीब 2200 साल पहले होता था। उनका कहना है कि तीर्थ की चहारदीवारी का काम चल रहा है। जेसीबी से खोदाई की जा रही है। तीर्थों के जीर्णोद्धार के साथ ही ऐतिहासिक इमारतों को संजोने के लिए भी काम होना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि तीर्थ पर कुछ समय पहले जोहड़ की खोदाई के दौरान भी बड़ी-बड़ी ईंटें मिली थी। इस पर जब पड़ताल की तो यह कुषाण कालीन होने के साक्ष्य मिले। अब दिखाई पड़ी दीवार और ईंटें भी ऐसी ही हैं। पिछले दिनों बाहरी गांव में भी जोहड़ खोदाई के दौरान बड़ी-बड़ी ईंटें मिली थी। इससे पहले जोहड़ माजरा गांव के टीले से भी प्राचीन ईंटें, मानव कंकाल, मृदभांड (मिटटी के बर्तन), खिलौने सहित अन्य सामान मिला था।
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48 कोस क्षेत्र में आता है तीर्थ
असंध उपमंडल का गांव सालवन महाभारत कालीन है। यहां के प्राचीन तालाब को दशाश्वमेध तीर्थ माना गया। जिसका उल्लेख महाभारत के वन पर्व, ब्रह्म पुराण में दिया गया है। यह तीर्थ कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र की भूमि में भी शामिल है। यहां एक टीला भी है। प्रवीण कुमार का कहना है कि अभी जोहड़ पर चहारदीवारी का काम चल रहा है। यदि ज्यादा खोदाई हो तो यहां मंदिर या कोई अन्य ऐतिहासिक इमारत होने के साक्ष्य भी मिल सकते हैं।


ईंटों की हालत ठीक
पुरातत्वविद डॉ. विनय कुमार का कहना है कि दीवार कुषाण कालीन प्रतीत होती है। यहां से प्राप्त ईंटों का आकार काफी बड़ा है। जोकि अभी अच्छी हालत में हैं। ईंटों की लंबाई 1.1 फुट, चौड़ाई 20 इंच और ऊंचाई 2.5 इंच है। दीवार के अतिरिक्त कुछ लाल रंग के मृदभांड भी दिखाई पड़े। सरोवर के जीर्णोद्धार से संरचना नष्ट हो रही है। यदि विस्तृत उत्खनन किया जाए तो कुछ ऐतिहासिक जानकारी भी हासिल हो सकती है।

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