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Karnal News: ग्रामीण गर्भवती महिलाओं में सबसे अधिक पाई जा रही खून की कमी

Tue, 04 Nov 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Tue, 04 Nov 2025 01:22 AM IST
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Anaemia is the most common problem among rural pregnant women.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। गर्भवती महिलाओं में सबसे जरूरी होता है उनके शरीर में खून की मात्रा का संतुलन रहना, लेकिन अधिकतर महिलाओं में खून की कमी सबसे अधिक पाई जा रही है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 70 से 80 गर्भवती महिलाएं पहुंच रही हैं, जिनमें 60 प्रतिशत महिलाओं में एनीमिया की शिकायत पाई जा रही है। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र व प्रवासी महिलाओं में सबसे अधिक एनीमिया पाया जा रहा है।
स्त्री रोग चिकित्सक डाॅ. वैशाली ने बताया कि कम उम्र की गर्भवती महिलाओं में सबसे अधिक एनीमिया देखा जा रहा है। ओपीडी में पहुंच रहीं गर्भवती महिलाओं में अधिक चक्कर आना, सांस फूलना, जल्द थक जाना और शरीर में सूजन रहना जैसी शिकायतें रहती हैं। इन शिकायतों का मुख्य कारण उनके शरीर में खून की कमी ही रहती है। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान सबसे जरूरी है कि चौथे माह से ही आयरन की गोली लेनी शुरू कर देनी चाहिए। हर गर्भवती महिलाओं को हर तीन माह बाद हीमोग्लोबिन की जांच जरूर करवानी चाहिए।
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स्त्री रोग चिकित्सा अधिकारी डाॅ. अंजू गर्ग ने बताया कि यदि गर्भावस्था के समय एनीमिया पाया जाता है तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। ऐसे में बच्चा पूर्ण रूप से विकसित नहीं होता, बच्चा कमजोर होता है और इसमें मां या बच्चे की जान जाने का भी खतरा रहता है। इसलिए जरूरी है कि महिलाएं खून की कमी को नजरअंदाज न करें। उन्होंने बताया कि ओपीडी में कई महिलाएं गर्भधारण के चार से पांच माह के बाद जांच करवाने के लिए पहुंचती हैं। इस स्थिति में उनमें गंभीर एनीमिया पाया जाता है, जिसे सामान्य करना काफी मुश्किल होता है। इसलिए हर गर्भवती महिला को चाहिए कि वह नियमित जांच करवाने के लिए जरूर आए।
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इनसैट
डाॅ. वैशाली ने बताया कि खून की कमी को पूरा करने वाले सूखे मेवे जैसे बादाम, किशमिश, अंजीर, अखरोट और खजूर लें। हरी सब्जियों में पालक, ब्रोकोली, चुकंदर, गोभी, आलू मशरूम, हरी बीन्स और पत्तेदार साग लें। फलों में अनार, शहतूत, आलूबुखारा, सूखा आलूबुखारा और इसका रस व काले जैतून ले सकते हैं।
-गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के दौरान करवाएं सामान्य जांच
सीबीसी जांच खून की कमी व एनीमिया जांचने के लिए
थायराइड जांच, जिसमें टी थ्री, टी फोर और टीएसएच की जांच हार्मोन संतुलन जानने के लिए
ब्लड शुगर जांच, जिसमें शुगर का स्तर व नियंत्रण पता चल सके
यूएसजी (अल्ट्रासाउंड) जांच, जिसमें गर्भाशय और प्रजनन अंगों की स्थिति पता चलती है
एचबीएसएजी और एचआईवी जांच संक्रमण की जांच के लिए
-एनीमिया के लक्ष्ण
अधिक चक्कर आना
थकान महसूस होना
ठंड लगना
सांस लेने में दिक्कत होना
चेहरा पीला पड़ना
सिर दर्द रहना
दिल की धड़कन तेज होना
चिड़चिड़ापन
भूख कम लगना
अधिक पसीना आना
हाथ-पैर ठंडे होना
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