फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Amar Katha was narrated to Mother Parvati in solitude: Shastri

मां पार्वती को एकांत में सुनाई थी अमर कथा : शास्त्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 02:50 AM IST
विज्ञापन
Amar Katha was narrated to Mother Parvati in solitude: Shastri
न्यू रमेश नगर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। न्यू रमेश नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए सर्वेश कृष्ण शास्त्री ने अमर कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने मां पार्वती से एकांत व गुप्त स्थान पर अमर कथा सुनाई थी फिर भी माता को नींद आ जाने के बाद इस तरह दोनों कबूतरों ने अमर होने की पूरी कथा सुन ली।
कथा व्यास ने कहा कि भोलेनाथ ने कहा था कि इस कथा को जो कोई जीव, व्यक्ति और यहां तक पशु-पक्षी सुन लेगा, वह अमर हो जाएगा। इसके लिए भोले नाथ ने अपनी जटाओं में चंद्रमा को चंदनबाड़ी में अलग कर दिया और गंगा जी को पंचतरणी में और कंठाभूषण सर्पों को शेषनाग पर छोड़ दिया। इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा।
विज्ञापन

कथा व्यास ने कहा कि गणेश टाप में बाबा ने अपने पुत्र गणेश को भी छोड़ दिया था, जिसको महागुणा का पर्वत भी कहा जाता है। पिस्सू घाटी में पिस्सू नामक कीड़े को भी त्याग दिया। इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को भी अपने से अलग कर दिया। इसके साथ मां पार्वती संग एक गुप्त गुफा में प्रवेश कर गए। कोई व्यक्ति, पशु या पक्षी गुफा के अंदर प्रवेश कर अमर कथा को न सुने, इसलिए शिव जी ने अपने चमत्कार से गुफा के चारों ओर आग जला दी। फिर शिव जी ने जीवन की अमर कथा मां पार्वती को सुनाना शुरू किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

शास्त्री ने बताया कि कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई और वह सो गई, जिसका शिव जी को पता नहीं चला। भगवान शिव अमर होने की कथा सुनाते रहे। इस समय दो सफेद कबूतर भोले नाथ से कथा सुन रहे थे और बीच-बीच में हूं- हूं की आवाज निकाल रहे थे, शिव जी को लग रहा था कि मां पार्वती कथा सुन रही है और बीच-बीच में हुंकार भर रही हैं। इस तरह दोनों कबूतरों ने अमर होने की पूरी कथा सुन ली। कथा समाप्त होने पर शिव का ध्यान पार्वती मां की ओर गया जो सो रही थी। शिव जी ने सोचा कि अगर पार्वती सो रही है, तब इसे सुन कौन रहा था। तब महादेव की दृष्टि कबूतरों पर पड़ी। महादेव शिव कबूतरों पर क्रोधित हुए और उन्हें मारने के लिए तत्पर हुए। इस पर कबूतरों ने शिव जी से कहा कि हे प्रभु हमने आपसे अमर होने की कथा सुनी है, यदि आप हमें मार देंगे तो अमर होने की यह कथा झूठी हो जाएगी। इस पर शिव जी ने कबूतरों को जीवित छोड़ दिया और उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव पार्वती के प्रतीक चिन्ह के रूप में निवास करोगे। इस अवसर पर रविदत्त शर्मा, विनोद मोगिया, रत्न लाल ,सुभाष , प्रवीण , रवि सौदा, प्रदीप , राजेश आर्य , अजय शर्मा, आनंद शर्मा, अमित और अमन के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed