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भूख हड़ताल के बाद आंगनबाड़ी वर्कर्स ने अस्पताल चौक पर लगाया जाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Dec 2021 02:12 AM IST
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After the hunger strike, Anganwadi workers jammed the hospital chowk
फोटो-70 व 71
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भूख हड़ताल के बाद आंगनबाड़ी वर्कर्स ने अस्पताल चौक पर लगाया जाम
दूसरे दिन भी जिला सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन जारी, सरकार की नीतियों पर जताया रोष
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायकों ने दूसरे दिन वीरवार को भी जिला सचिवालय के समक्ष भूख हड़ताल रखकर प्रदर्शन किया। वे दोपहर बाद सेक्टर 12 धरनास्थल से प्रदर्शन करतीं हुईं अस्पताल चौक पर पहुंचीं और जाम लगा दिया। अस्पताल चौक पर 25 मिनट तक जाम लगा रहा। प्रदर्शनकारियों के चले जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत कर यातायात सुचारु कराया।
आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन की जिला सचिव बिजनेश राणा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार आईसीडीएस और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाई है। प्ले-वे स्कूलों के मार्फत आईसीडीएस को प्राइवेट हाथों व एनजीओ को सौंपने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेंगी। 2018 में मुख्यमंत्री ने इन कार्यकर्ताओं के लिए घोषणाएं की थी जो लागू नहीं की गई। महंगाई भत्ता केवल एक बार दिया गया जबकि उसके बाद पांच किस्त बकाया हैं।
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40 साल बाद भी नहीं दिया सेवानिवृत्ति का लाभ
बिजनेश राणा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2018 में घोषित वर्कर्स की बढ़ोतरी के 1500 रुपये व हेल्पर्स के 750 रुपये आज तक नहीं दिए गए। वर्कर्स से सुपरवाइजर की पदोन्नति नहीं की जा रही। 40 साल सेवा करने के बावजूद किसी प्रकार का सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिया जा रहा।
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न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू किया जाए
सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू किया जाए। 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय में जोड़कर दी जाए। महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत दिया जाए। हेल्पर के पदनाम को बदला जाए। विभाग द्वारा बिना फोन व अन्य संसाधन के ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। वेतन बढ़ोतरी का एरियर सहित दिया जाए। नई शिक्षा नीति वापस हो। प्ले-वे स्कूल के नाम पर आईसीडीएस का निजीकरण न किया जाए। आईसीडीएस में किसी भी एनजीओ या प्राइवेट संस्था को शामिल करने की अनुमति न दी जाए। आईसीडीएस में रिक्त हेल्पर, वर्कर, सुपरवाइजर, सीडीपीओ व पीओ आदि के तमाम पदों को भरा जाए। मौके पर सर्वेश राणा, मधु शर्मा, जगपाल राणा, ओपी माटा, नीलम, पुष्पा, सुदेश, मूर्ति, रीना, राकेश राणा, संतोष, कमला, ममता, मंजू, सरोज, सुनीता, सुष्मा, रेखा, शालिनी, शीला, पूनम, पिंकी व कविता अन्य कार्यकर्ताओं ने विचार रखे।
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