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01. संवाद : कर्मचारी की मृत्यु पर आश्रित 1000 रुपये मासिक पेंशन, छह लाख तक के बीमे के हैं हकदार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Dec 2021 02:36 AM IST
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After the death of the employee, pension up to 1000, in case of monthly pain
ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त जतिन्द्र कुमार संघाले। संवाद
करनाल। वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के रूप में कटा पैसा न केवल धनराशि के रूप में जमा होता है। बल्कि पेंशन और बीमा पॉलिसी के रूप में भी काम करता है। जिसका लाभ कर्मचारी को ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) का अंशदाता बनने के साथ ही मिलने लगता है। यदि रिटायरमेंट से पहले कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो भी उसके आश्रित न्यूनतम 1000 रुपये मासिक पेंशन और सात लाख रुपये तक के बीमा के हकदार हैं।
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ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त-1 जतिंद्र कुमार संघाले ने अमर उजाला संवाद के तहत हुई विशेष बातचीत में बताया कि ईपीएफओ के पास अंशदान जमा होने के पहले दिन से ही कर्मचारी के आश्रित इस पेंशन और बीमा के हकदार हो जाते हैं। मृतक अंशदाता की पत्नी या जो भी उत्तराधिकारी है, उसे पेंशन और बीमा का लाभ दिया जाता है। जानकारी के अभाव में लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते। करनाल स्थित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय में इसके अंतर्गत करनाल के अलावा सोनीपत, पानीपत, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला और यमुनानगर जिले के कुल 3.59 लाख अंशदाता पंजीकृत हैं। ब्यूरो
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बीमा के लिए प्रीमियम जमा कराने की जरूरत नहीं
विभाग की ईडीएलआई (इंप्लाइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम) के तहत यह बीमा मिलता है। इसके लिए कर्मचारी को अलग से प्रीमियम के तौर पर राशि जमा नहीं करानी होती, बल्कि इसके लिए योगदान नियोक्ता की तरफ से ही किया जाता है। बीमा राशि का निर्धारण जो भी अंशदान जमा हुआ होता है उसके हिसाब से होता है। वहीं पेंशन योजना में आश्रितों को 1000 रुपये मासिक पेंशन के साथ-साथ उसके दो बच्चों को भी वरिष्ठता के आधार पर 25 वर्ष आयु तक अलग से पेंशन की 25 प्रतिशत राशि दी जाती है।
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ऐसे करें आवेदन
अंशदाता की मौत के बाद नॉमिनी को पेंशन व बीमा के लिए ईपीएफओ कार्यालय से या विभाग की वेबसाइट से निर्धारित फार्म लेकर आवेदन करना होता है। फार्म के साथ अंशदाता के यूएएन खाता नंबर, मृत्यु प्रमाण पत्र, नॉमिनी को अपना आईडी प्रूफ लगाना होगा। जिसे नियोक्ता से सत्यापित करवाकर विभाग के कार्यालय में जमा कराना पड़ेगा या वेबसाइट पर भी अपलोड कर सकते हैं।
एडवांस राशि से नहीं पड़ता पेंशन की पात्रता पर असर
ईपीएफओ से पेंशन लेने के लिए अंशधारक के पेंशन फंड में नौकरी के दौरान कम से कम दस वर्ष तक पैसा जमा होना जरूरी है। यदि कर्मचारी इस समयावधि के पूरा होने से पहले ही बीच-बीच में खाते से पूरा पैसा निकालता है तो उसकी पेंशन के लिए पात्रता नहीं बन पाती। वहीं यदि पीएफ खाते से पूरी राशि निकालने के बजाय जरूरत के वक्त एडवांस के रूप में राशि निकालने से उसकी पेंशन पात्रता अवधि पर असर नहीं पड़ता। कर्मचारी के खाते में 24 प्रतिशत पीएफ जमा होता है। जिसमें 12 प्रतिशत कंपनी और शेष 12 प्रतिशत अंशदाता को देना होता है। इस 12 प्रतिशत में से 8.33 प्रतिशत पेंशन फंड में व 3.67 प्रतिशत पीएफ फंड में जमा होता है।

2008 में सहायक आयुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं संघाले
क्षेत्रीय आयुक्त-1 जतिंद्र कुमार संघाले पंजाब के जालंधर के रहने वाले हैं। राजस्थान के जोधपुर से स्कूल शिक्षा ग्रहण की। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1999 में शिमला में सहायक आयुक्त के रूप में पहली नियुक्ति हुई। 2008 में करनाल के उप क्षेत्रीय कार्यालय में भी सहायक आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके बाद क्षेत्रीय आयुक्त द्वितीय प्रमोट होने पर उनकी नियुक्ति मेरठ कार्यालय में हुई। दिल्ली, इलाहाबाद और एनडीसी द्वारका में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अब 9 जुलाई 2021 से करनाल में कार्यालय में क्षेत्रीय आयुक्त-1 के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
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