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Karnal News: हार्ट अटैक के बाद गोल्डन टाइम बीत जाता है सफर में
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हार्ट अटैक के बाद का गोल्डन समय यानी 30 मिनट जिंदगी और मौत के बीच सबसे अहम माने जाते हैं लेकिन जिले में यही सुनहरा समय सड़कों पर गुजर जाता है। जिले में मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल जैसी बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद कार्डियोलॉजिस्ट और समर्पित कार्डियक यूनिट का अभाव है। ऐसे में मरीजों को चंडीगढ़ और रोहतक रेफर करना पड़ता है। सफर में 2-3 घंटे लग जाते हैं।
आईएमए के प्रधान डॉ. दीपक प्रकाश ने बताया कि हार्ट अटैक केस में 5 मिनट में प्राथमिक चिकित्सा मिलना अनिवार्य है। इसके बाद 30 मिनट गोल्डन समय होता है। हार्ट अटैक के बाद पहले 30 मिनट में यदि मरीज को सही और विशेषज्ञ इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। करनाल में सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीज इस अहम समय में उपचार से वंचित रह जाते हैं। जब तक एंबुलेंस दूसरे शहर पहुंचती है, तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। कई बार तो रास्ते में ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
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करनाल। हार्ट अटैक के बाद का गोल्डन समय यानी 30 मिनट जिंदगी और मौत के बीच सबसे अहम माने जाते हैं लेकिन जिले में यही सुनहरा समय सड़कों पर गुजर जाता है। जिले में मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल जैसी बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद कार्डियोलॉजिस्ट और समर्पित कार्डियक यूनिट का अभाव है। ऐसे में मरीजों को चंडीगढ़ और रोहतक रेफर करना पड़ता है। सफर में 2-3 घंटे लग जाते हैं।
आईएमए के प्रधान डॉ. दीपक प्रकाश ने बताया कि हार्ट अटैक केस में 5 मिनट में प्राथमिक चिकित्सा मिलना अनिवार्य है। इसके बाद 30 मिनट गोल्डन समय होता है। हार्ट अटैक के बाद पहले 30 मिनट में यदि मरीज को सही और विशेषज्ञ इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। करनाल में सुविधा उपलब्ध न होने के कारण मरीज इस अहम समय में उपचार से वंचित रह जाते हैं। जब तक एंबुलेंस दूसरे शहर पहुंचती है, तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। कई बार तो रास्ते में ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है।
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