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Karnal News: हादसों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, काल बन दौड़ रहे भारी वाहन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 May 2025 02:31 AM IST
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Administration did not wake up even after the accidents, heavy vehicles are running like death
- 40 फीसदी हादसों में तेज रफ्तार और भारी वाहन हैं वजह, फिर भी शहर में नहीं पाबंदी, जिम्मेदार पुलिस और आरटीए चालान में व्यस्त
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गगन तलवार

करनाल। शहर में भारी वाहनों की चपेट में आने से लगातार हादसे हो रहे हैं, इसके बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारी इन पर लगाम लगाने के लिए नहीं जागे। हालात यह हैं कि शहर के हर प्रमुख मार्गों पर भारी वाहन काल बनकर दौड़ रहे हैं। न तो पुलिस की ओर से इन पर लगाम लगाई जा रही है न ही आरटीए का इस तरफ ध्यान है। ऐसे में आए दिन लोगों की ऐसे वाहनों की चपेट में आने से जान जा रही है।

यह स्थिति भी तब है जब जिले में पिछले एक साल में हुए हादसों के लिए 40 प्रतिशत में तेज रफ्तार और भारी वाहन वजह हैं। शहर में भीड़ वाले क्षेत्रों में भी भारी वाहन ओवरलोड और तेज रफ्तार चलते हैं। भारी वाहनों के शहर में प्रवेश से रोक के लिए यातायात पुलिस के इंतजाम ही नहीं हैं। न कहीं बैरिकेडिंग हैं न पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। जहां खड़े हैं, उनका ध्यान भी सिर्फ दोपहिया वाहनों की चालानिंग तक सीमित है। ब्रह्मानंद चौक के नजदीक बुधवार को एक पेंटर और गत सप्ताह भारी वाहन की चपेट में आने से दो पहिया सवार युवती की मौत हो गई थी। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से सख्ती नहीं बरती गई।
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चौराहों और शहर की सड़कों की स्थिति जानने के लिए अमर उजाला ने पड़ताल की तो शहर के कई मार्गों पर भारी वाहन दौड़ते नजर आए। अनाज मंडी रोड, हांसी रोड, मूनक रोड, काछवा रोड, कैथल रोड, रेलवे रोड के अलावा शहर के अंदर भी कुछ वाहन तो ओवरलोड और ओवरहाइट दिखाई दिए। जबकि कुछ खाली वाहन सड़कों पर तेज रफ्तार दौड़ते मिले। सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक शहर की आठ सड़कों पर करीब 120 भारी वाहन दौड़ते मिले। जनवरी 2024 से अब तक 812 सड़क हादसे हुए, इनमें 379 लोगों की मौत हुई, जबकि एक हजार के करीब लोग घायल हो चुके हैं।
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भारी वाहनों के कारण ये हादसे हो चुके

- 30 अप्रैल को ब्रह्मानंद चौक के नजदीक भारी वाहन की चपेट में आने से पेंटर युवक की मौत हो गई।

- अप्रैल में ही ब्रह्मानंद चौक के नजदीक स्कूटी सवार युवती की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई थी।

- दिसंबर माह में हांसी रोड स्थित भगवाड़िया गैस एजेंसी के पास ट्रक के नीचे आने स्कूटी सवार महिला की मौत हो गई, जबकि उसकी बेटी जख्मी हो गई।

- दिसंबर माह में ही ओवरलोड ट्राॅले की चपेट में आने से कार सवार एक परिवार जख्मी हो गया था।

- जनवरी माह में मेरठ रोड पर शुगर मिल के पास रेत से भरे से डंपर ने बाइक सवार शिक्षक को टक्कर मार दी थी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।



इन मार्गों पर है भारी वाहनों का ज्यादा दबाव

मेरठ रोड और इंद्री रोड हरियाणा को उत्तर प्रदेश की सीमा से जोड़ती है। इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है। बावजूद इसके यहां दौड़ने वाले ओवरलोड डंपर व ट्रक पर प्रशासन ध्यान नहीं देता। यही वजह है कि यहां ओवरलोड वाहनों के कारण हादसे होते हैं। इससे अलग शहर में हांसी रोड, काछवा रोड, कैथल रोड, नमस्ते चौक व बलड़ी बाइपास रोड पर भी भारी वाहनों का दबाव बना हुआ है।




विशेषज्ञ बोले, ओवरलोड के कारण नहीं लगते ब्रेक

जिले में रोजाना दो या तीन बड़े हादसे भी हो रहे हैं। जिसमें ज्यादा भारी वाहन पाए जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल और एडवोकेट संदीप का कहना है कि ओवरलोड और शहर में भारी वाहनों पर सख्ती और बढ़नी चाहिए। भारी वाहनों के कारण भी ज्यादातर हादसे होते हैं। क्योंकि ओवरलोड होने के कारण ब्रेक लगने पर भी वाहन तुरंत नहीं रुकते।





भारी वाहनों और ओवरलोड पर कार्रवाई आरटीए की ओर से की जाती है। शहर में पाबंदी संबंधित जानकारी भी वे ही दे सकते हैं।
- यश जालूका, एडीसी





ओवरलोड वाहनों पर लगातार शिकंजा कसा जाता है। टीमें निरंतर जांच करती हैं। शहर में भी कार्रवाई की जाएगी।
- विजय देसवाल, सचिव, आरटीए
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