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आवर्धन नहर टूटी
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गांव रांवर से एक किलोमीटर दूर रविवार की सुबह चार बजे अचानक आवर्धन नहर टूट गई। तेज बहाव के कारण कुछ ही घंटों में गांव रांवर में पानी भर गया। खेतों को लबालब करते हुए गांव में जब पानी घुसा तो गांव में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई। इसके बाद विधायक हरविंद्र कल्याण, जिला उपायुक्त निशांत यादव सहित नहरी विभाग के अधिकारी मौके पर पंहुचे। अधिकारियों के अनुसार पटरी के नीचे कोई सुराग था, जिससे नहर पटरी क्षतिग्रस्त हो गया। टूटी पटरी को बंद करने के लिए जेसीबी मशीन, मनरेगा के सैकड़ों मजदूर और ट्रैक्टर ट्रॉलियों की मदद से कार्य शुरू किया गया, लेकिन मशक्कत के बाद भी देर शाम तक स्थिति को काबू नहीं किया जा सका। खबर लिखे जाने तक सैकड़ों की संख्या में लोग नहर को बांधने में जुटे थे। इस दौरान पूरा गांव पानी से लबालब हो गया। गांव में चार पांच फुट तक पानी भर गया। इतना ही नहीं खेतों के साथ घरों में पानी जमा हो गया। इससे करोड़ों की नुकसान की आशंका जतायी जा रही है। शाम तक गांव के हालात सामान्य नहीं हो पाये थे।
ग्रामीणों के अनुसार पटरी का 20-22 फुट का हिस्सा पानी के तेज बहाव संग बह गया और देखते ही देखते गांवों में पानी घुस गया। नहर टूटने से प्रशासनिक अधिकारियों और आसपास के ग्रामीणों में दहशत हो गयी। बड़ी संख्या में ग्रामीण नहर पटरी पर एकत्रित होने लगे, लेकिन नहर के बहाव के सामने वे बेबस दिखे। चंद घंटों में ही गांव में लगभग चार से पांच फुट पानी भर गया, जिसमें किसानों के ट्यूबवेल, पोल्ट्री फार्म, हैचरी और घरेलू सामान पानी में डूब गये। ग्रामीण अपने कीमती सामान छोड़कर जान बचाने के लिए छतों पर चढ़ गए। गांव में चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। ग्रामीणों की फसलें तबाह हो गयी। अधिकारियों ने टूटी नहर को काबू करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ सैकड़ों की संख्या में मनरेगा के महिला-पुरुष और अन्य ग्रामीण मिट्टी के कट्टे भरने में शाम तक जुटे रहे, लेकिन देर शाम तक भी स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सका था।
नहरी विभाग के एसडीओ नितिन कुमार ने बताया कि नहर टूटने की सूचना के बाद से बचाव कार्य चल रहा है, जल्द ही इसे नियंत्रित कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नहर के पानी से ग्रामीणों को काफी नुकसान हो गया है, लेकिन पूरा आंकड़ा पानी उतरने के बाद ही पता चल सकेगा। समाचार लिखे जाने तक हालात सामान्य नहीं हो पाये थे।
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पेड़ों की जडो़ं के कारण बना सुराग : कार्यकारी अभियंता
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता नवतेज सैनी का कहना है कि पेड़ों की जड़ों के कारण सुराग हो गया था। रात को ड्यूटी देने वाले स्टाफ ने इसको देखा और इसकी जानकारी दी। सैनी का कहना है कि नहर की क्षमता बढ़ाने का प्रोजेक्ट अभी टैंडरिंग पर अटका है। कोविड के कारण यह प्रोजेक्ट डिले हो गया।
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ग्रामीणों के अनुसार पटरी का 20-22 फुट का हिस्सा पानी के तेज बहाव संग बह गया और देखते ही देखते गांवों में पानी घुस गया। नहर टूटने से प्रशासनिक अधिकारियों और आसपास के ग्रामीणों में दहशत हो गयी। बड़ी संख्या में ग्रामीण नहर पटरी पर एकत्रित होने लगे, लेकिन नहर के बहाव के सामने वे बेबस दिखे। चंद घंटों में ही गांव में लगभग चार से पांच फुट पानी भर गया, जिसमें किसानों के ट्यूबवेल, पोल्ट्री फार्म, हैचरी और घरेलू सामान पानी में डूब गये। ग्रामीण अपने कीमती सामान छोड़कर जान बचाने के लिए छतों पर चढ़ गए। गांव में चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। ग्रामीणों की फसलें तबाह हो गयी। अधिकारियों ने टूटी नहर को काबू करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ सैकड़ों की संख्या में मनरेगा के महिला-पुरुष और अन्य ग्रामीण मिट्टी के कट्टे भरने में शाम तक जुटे रहे, लेकिन देर शाम तक भी स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सका था।
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नहरी विभाग के एसडीओ नितिन कुमार ने बताया कि नहर टूटने की सूचना के बाद से बचाव कार्य चल रहा है, जल्द ही इसे नियंत्रित कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नहर के पानी से ग्रामीणों को काफी नुकसान हो गया है, लेकिन पूरा आंकड़ा पानी उतरने के बाद ही पता चल सकेगा। समाचार लिखे जाने तक हालात सामान्य नहीं हो पाये थे।
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पेड़ों की जडो़ं के कारण बना सुराग : कार्यकारी अभियंता
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता नवतेज सैनी का कहना है कि पेड़ों की जड़ों के कारण सुराग हो गया था। रात को ड्यूटी देने वाले स्टाफ ने इसको देखा और इसकी जानकारी दी। सैनी का कहना है कि नहर की क्षमता बढ़ाने का प्रोजेक्ट अभी टैंडरिंग पर अटका है। कोविड के कारण यह प्रोजेक्ट डिले हो गया।