{"_id":"81-58559","slug":"Karnal-58559-81","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्भ में बच्चे की मौत पर रोष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्भ में बच्चे की मौत पर रोष
Karnal
Updated Sun, 14 Jul 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। इंदिरा गांधी मल्टीस्पेशिएलिटी अस्पताल में डिलीवरी के लिए आई गर्भवती महिला के गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे आनन-फानन में रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। महिला के परिजनों ने गर्भ में बच्चे की मौत के लिए अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए रोष प्रकट किया। गुस्साए परिजनों ने कहा कि मामले की शिकायत पुलिस में की जाएगी। उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए पूरी रात पर्ची का इंतजार करना पड़ा। उन्हें सारी रात एक हॉल में बितानी पड़ी।
गांव बाबा लदाना निवासी श्याम लाल ने बताया कि उसका भतीजा राजेश कुमार अपनी पत्नी पिंकी को लेकर शुक्रवार को अस्पताल पहुंचा था। उसकी डिलीवरी का समय नजदीक होने के चलते उसे यहां शुक्रवार को दाखिल किया गया था। चिकित्सकों ने शुक्रवार शाम तक बताया था कि जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं। बच्चा होने में कुछ समय लग सकता है। इसीलिए उसे शुक्रवार को दाखिल कर लिया गया। श्याम लाल ने बताया कि रात को करीब साढ़े दस बजे अचानक पिंकी को दर्द शुरू हो गया। इस पर मौके पर मौजूद सहायक स्टॉफ ने उसे टीका लगाया और रात को ही अल्ट्रासाउंड करवाकर लाने का फरमान जारी कर दिया। वे अल्ट्रासाउंड भी करवा लेते, लेकिन रात को डॉक्टर की पर्ची न मिलने के कारण अल्ट्रासाउंड करवाना भी नामुमकिन था। इस कारण उन्होंने पर्ची देने की मांग तो उपस्थित स्टॉफ ने सुबह ही पर्ची मिलने की बात कही। इसके बाद उन्हें कमरे से भी बाहर निकाल दिया गया। राजेश ने बताया कि उन्होंने हॉल में बैठकर सारी रात बिताई। इसके बाद सुबह अल्ट्रासाउंड की पर्ची मिली। तब जाकर उन्होंने अल्ट्रासाउंड करवाया। अल्ट्रासाउंड में बताया गया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने जब डॉक्टर से इस बारे में जानकारी ली तो डॉक्टर ने कहा कि कमजोरी के कारण बच्चे की मौत हुई है। जबकि शुक्रवार सांय तक सब कुछ ठीक बताया जा रहा था। श्याम लाल ने आरोप लगाया कि इसके बाद डॉक्टरों ने अपना पिंड छुड़वाते हुए पिंकी को गंभीर हालात में पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। बताया गया कि दोपहर बाद 3 बजे तक वे पीजीआई रोहतक में लाइन में लगे हुए थे। श्याम लाल ने कहा कि उनकी पुत्रवधु पिंकी की जान पर भी खतरा बना हुआ है। यह सब अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से हुआ है। वे रविवार को कैथल पहुंच कर इस मामले में पुलिस में शिकायत देंगे और दोषी कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से नाम न छापने की शर्त पर एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि महिला के गर्भ में बच्चा पहले से ही कमजोर था। इस बारे में परिजनों को बता दिया गया था। इसमें लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है।
विज्ञापन
जरूरी मीटिंग को लेकर मैं अभी बाहर हूं। मुझे इस बारे में जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों का नुकसान किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।
- डा. आदित्य गुप्ता, सिविल सर्जन
विज्ञापन
गांव बाबा लदाना निवासी श्याम लाल ने बताया कि उसका भतीजा राजेश कुमार अपनी पत्नी पिंकी को लेकर शुक्रवार को अस्पताल पहुंचा था। उसकी डिलीवरी का समय नजदीक होने के चलते उसे यहां शुक्रवार को दाखिल किया गया था। चिकित्सकों ने शुक्रवार शाम तक बताया था कि जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं। बच्चा होने में कुछ समय लग सकता है। इसीलिए उसे शुक्रवार को दाखिल कर लिया गया। श्याम लाल ने बताया कि रात को करीब साढ़े दस बजे अचानक पिंकी को दर्द शुरू हो गया। इस पर मौके पर मौजूद सहायक स्टॉफ ने उसे टीका लगाया और रात को ही अल्ट्रासाउंड करवाकर लाने का फरमान जारी कर दिया। वे अल्ट्रासाउंड भी करवा लेते, लेकिन रात को डॉक्टर की पर्ची न मिलने के कारण अल्ट्रासाउंड करवाना भी नामुमकिन था। इस कारण उन्होंने पर्ची देने की मांग तो उपस्थित स्टॉफ ने सुबह ही पर्ची मिलने की बात कही। इसके बाद उन्हें कमरे से भी बाहर निकाल दिया गया। राजेश ने बताया कि उन्होंने हॉल में बैठकर सारी रात बिताई। इसके बाद सुबह अल्ट्रासाउंड की पर्ची मिली। तब जाकर उन्होंने अल्ट्रासाउंड करवाया। अल्ट्रासाउंड में बताया गया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने जब डॉक्टर से इस बारे में जानकारी ली तो डॉक्टर ने कहा कि कमजोरी के कारण बच्चे की मौत हुई है। जबकि शुक्रवार सांय तक सब कुछ ठीक बताया जा रहा था। श्याम लाल ने आरोप लगाया कि इसके बाद डॉक्टरों ने अपना पिंड छुड़वाते हुए पिंकी को गंभीर हालात में पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। बताया गया कि दोपहर बाद 3 बजे तक वे पीजीआई रोहतक में लाइन में लगे हुए थे। श्याम लाल ने कहा कि उनकी पुत्रवधु पिंकी की जान पर भी खतरा बना हुआ है। यह सब अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से हुआ है। वे रविवार को कैथल पहुंच कर इस मामले में पुलिस में शिकायत देंगे और दोषी कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
विज्ञापन
इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से नाम न छापने की शर्त पर एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि महिला के गर्भ में बच्चा पहले से ही कमजोर था। इस बारे में परिजनों को बता दिया गया था। इसमें लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है।
विज्ञापन
जरूरी मीटिंग को लेकर मैं अभी बाहर हूं। मुझे इस बारे में जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों का नुकसान किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।
- डा. आदित्य गुप्ता, सिविल सर्जन