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श्रुति कांबोज ने आईएएस बनने का सपना किया पूरा
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अमर उजाला ब्यूरो
इंद्री (करनाल)। श्रुति कांबोज का सपना था आईएएस बनना। इसके लिए उसने शुरुआत से ही अपना लक्ष्य तय किया और कड़ी मेहनत की। दो बार दिल्ली में कोचिंग ली और परीक्षा दी, लेकिन परीक्षा पास नहीं हुई। इस बार श्रुति कांबोज ने घर पर बैठकर ही तैयारी की और यूपीएससी की परीक्षा पास की। करीब 23 साल की श्रुति ने 586वां रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार किया। गांव रिंडल की रहने वाली श्रुति कांबोज के आईएएस बनने पर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की।
बता दें कि इंद्री के गांव रिंडल की रहने वाली श्रुति कंबोज ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई प्रकाश पब्लिक स्कूल करनाल से की है, जबकि गणित और इकनॉमिक्स के विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई डीएवी महिला कॉलेज करनाल से की हुई है। खास बात है कि ग्रेजुएशन के परीक्षा परिणाम में भी श्रुति कंबोज कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में टॉप रही थी। श्रुति कंबोज के पिता सुंदर कांबोज हैं, जो इंद्री मार्केट कमेटी में सचिव के पद पर तैनात है। श्रुति कांबोज के पिता सुंदर कंबोज ने बताया कि श्रुति शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी। उसका एक ही सपना था कि वह एक दिन आईएएस बने और अपने माता पिता सहित देश का नाम रोशन कर। इसके लिए उसने जी तोड़ मेहनत की है, जो शुक्रवार को आये परीक्षा परिणाम में श्रुति की मेहनत रंग लाई है।
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इंद्री (करनाल)। श्रुति कांबोज का सपना था आईएएस बनना। इसके लिए उसने शुरुआत से ही अपना लक्ष्य तय किया और कड़ी मेहनत की। दो बार दिल्ली में कोचिंग ली और परीक्षा दी, लेकिन परीक्षा पास नहीं हुई। इस बार श्रुति कांबोज ने घर पर बैठकर ही तैयारी की और यूपीएससी की परीक्षा पास की। करीब 23 साल की श्रुति ने 586वां रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार किया। गांव रिंडल की रहने वाली श्रुति कांबोज के आईएएस बनने पर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की।
बता दें कि इंद्री के गांव रिंडल की रहने वाली श्रुति कंबोज ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई प्रकाश पब्लिक स्कूल करनाल से की है, जबकि गणित और इकनॉमिक्स के विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई डीएवी महिला कॉलेज करनाल से की हुई है। खास बात है कि ग्रेजुएशन के परीक्षा परिणाम में भी श्रुति कंबोज कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में टॉप रही थी। श्रुति कंबोज के पिता सुंदर कांबोज हैं, जो इंद्री मार्केट कमेटी में सचिव के पद पर तैनात है। श्रुति कांबोज के पिता सुंदर कंबोज ने बताया कि श्रुति शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी। उसका एक ही सपना था कि वह एक दिन आईएएस बने और अपने माता पिता सहित देश का नाम रोशन कर। इसके लिए उसने जी तोड़ मेहनत की है, जो शुक्रवार को आये परीक्षा परिणाम में श्रुति की मेहनत रंग लाई है।
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