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हाल-ए-निगम : स्मार्ट शहरों की सूचि में आने के एक साल बाद तक सलाहकार नहीं मिला, अब 200 करोड़ के इंतजार में अटके प्रोजेक्ट

Mon, 24 Dec 2018 12:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 24 Dec 2018 12:44 AM IST
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हाल-ए-निगम : स्मार्ट शहरों की सूचि में आने के एक साल बाद तक सलाहकार नहीं मिला, अब 200 करोड़ के इंतजार में अटके प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। कर्ण नगरी स्मार्ट सिटी बनेगी इसकी उम्मीद लोग पिछले एक साल से पाल रहे हैं। स्मार्ट सिटी के शहरों की सूचि में करनाल का नाम भी आ गया और केंद्रीय मंत्री द्वारा इसकी घोषणा भी कर दी गई। बावजूद इसके डेढ़ साल बीतने को हैं केवल कागजों में ही शहर स्मार्ट होता जा रहा है। जमीन पर ऐसा कोई प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ा है, जिससे लगे कि शहर स्मार्ट बनने की ओर बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट के अनुसार, विकास के लिए प्रति साल 200 करोड़ रुपये आने थे, लेकिन अभी तक ये पैसे नहीं आ सकें और प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं।
बता दें कि तीन बार की परीक्षा देने के बाद आखिरकार करनाल को 23 जून, 2017 को स्मार्ट सिटी की सूचि में शामिल किया गया था। इसके बाद निगम के अधिकारी केवल इसी घोषणा के दम पर अपनी पीठ थपथपाते रहे। कागजों में प्रोजेक्ट बनते रहे और बिगड़े रहे, लेकिन हकीकत में ये सामने नहीं आ सके। देरी और लेटलतीफी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 माह बाद जुलाई 2018 में स्मार्ट सिटी को सलाहकार (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट) मिल पाया। केपीएमजी नाम की कंपनी अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस कंपनी को कार्य सौंपे हुए भी चार माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रोजेक्ट गति नहीं पकड़ पाया है।
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1295 करोड़ का है प्रोजेक्ट, खर्च 20 करोड़ हुए
बता दें कि पांच साल में 1295 करोड़ के 62 से अधिक प्रोजेक्ट शहर को मिलने हैं। निगम के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 15 से 20 करोड़ की पांच योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं। एक साल में नगर निगम स्मार्ट सिटी प्रपोजल में से केवल डेढ़ प्रतिशत राशि ही खर्च पाई है। इसके अलावा, प्रति साल 100 करोड़ प्रदेश सरकार और 100 करोड़ केंद्र सरकार से मिलने वाली किश्त भी नहीं आ सकी है। इसलिए प्रोजेक्टों में देरी हो रही है।
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क्या है स्मार्ट प्रोजेक्ट
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर 1295.81 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें से 1061.1 करोड़ यानि 82 प्रतिशत एरिया बेस्ड डेवेलपमेंट में शामिल 720 एकड़ पर खर्च होंगे। करनाल को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सलाहकार के तौर पर केपीएमजी कंपनी 19 करोड़ रुपये लेकर करनाल स्मार्ट सिटी को अपनी सलाह देगी। केपीएमजी को यह पैसा करनाल स्मार्ट सिटी कंपनी पांच सालों के दौरान भुगतान करेगी।

करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के लिए सलाहकार का चयन हो चुका है। चंडीगढ़ में आयोजित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में यह केपीएमजी को चुना गया था और कंपनी के साथ एग्रीमेंट हो चुका है। प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। 200 करोड़ रुपये की किश्त को लेकर निगम के अधिकारी लगातार मंत्रालय के संपर्क में हैं। निकाय चुनाव होने के कारण कार्य में कुछ असर पड़ा है। अब नए साल से नए सदन की मदद से यह प्रोजेक्ट गति पकड़ेगा। -धीरज कुमार, डीएमएस, नगर निगम करनाल।



ये प्रोजेक्ट हुए पूरे
-शहर में 9.5 करोड़ रुपये से सीसीटीवी लगे।
-कर्ण ताल में 84 लाख रुपये से म्यूजिकल फाउंटेन और सुंदरीकरण हुआ।
-पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तहत 1.32 करोड़ रुपये से सिटी बस सेवा शुरू की गई।
-एबीडी एरिया में छह स्थानों पर वाईफाई लगे। इसी क्षेत्र के दो स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा दी।
-आंबेडकर चौक के पास 5.56 करोड़ रुपये से कनवेंशल हॉल बनाया जा रहा है।
-ज्यादातर पार्कों में ओपन एयर जिम स्थापित।

ये हैं अधूरे प्रोजेक्ट
- नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग में पार्किंग कम शॉप बनाना।
- रामलीला मैदान को मनोरंजन स्थल में बदलने के लिए 9.98 करोड़ खर्च किए जाने हैं।
-शहर का इतिहास बताने वाला स्थान व म्यूजियम बनाने पर 22.33 करोड़ खर्च करने हैं।
-मुगल कैनाल फेज-2 में कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाना, करीब 275.32 करोड़ का है प्रोजेक्ट।
-सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट, 82.68 करोड़ होने हैं खर्च।
-डिजिटल साक्षरता सेंटर स्थापित करना, बजट 7.47 करोड़।
-मुगल कैनाल में 2.63 करोड़ से ग्रीन पार्क स्थापित करना।
-स्मार्ट सीवरेज : 49.28 करोड़ ने आधुनिक सीवरेज सिस्टम स्थापित करना।
-अंडर ग्राउंड बिजली की तार व स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट के लिए 32.13 करोड़ बजट।
-स्मार्ट वाटर सप्लाई सिस्टम 36.95 करोड़ 8. आशियाना प्रोजेक्ट।
-यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने पर 65.32 करोड़ किए जाने हैं।
नोट : इसके अलावा भी कई प्रोजेक्ट हैं, कुल प्रोजेक्ट 56 हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर निगम के अधिकारी व सभी पार्षदगण गंभीर है। इसको लेकर काफी कुछ कार्य पहले किया जा चुका है, जो शेष रह गया है, उसको भी गति दी जाएगी। हमें उम्मीद है कि इस कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। -रेणु बाला गुप्ता, मेयर।
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