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संतान की दीर्घायु के लिए आज माताएं रखेंगी निरजल व्रत
Updated Wed, 31 Oct 2018 12:26 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए आज माताएं अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। दिनभर भूखी प्यासी रहकर माताएं मंगलवार को तारामंडल के उदय होने पर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी और कुछ माताएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
सेक्टर-7 कर्णेश्वरम महादेव मंदिर के पंडित पष्ठी बल्लभ पांडेय ने बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखा जाता है। पंडित ने बताया कि बुधवार 11.09 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस व्रत में माताएं संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी व उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं। बुधवार शाम 6 बजे तारा मंडल दिखाई देगा और चंद्रमा रात को 11.44 बजे दिखाई देगा। वहीं, दूूसरी ओर अहोई व्रत को लेकर मंगलवार को बाजारों में रौनक बढ़ी। माताओं ने पूजा के लिए अहोई और अहोई माता का चित्र खरीदा। इतना ही नहीं संतान ने भी अपनी माताओं के लिए खरीदारी की।
ऐसे करे अहोई माता की पूजा
पंडित पष्ठी बल्लभ पांडेय ने बताया कि पूजन के लिए दीवार पर अहोई माता और सेह की तस्वीर बनाई जाती है। फिर रोली, भात और दूध से पूजन किया जाता है। इसके बाद कलश में जल भरकर माताएं अहोई अष्टमी की कथा का श्रवण करती हैं। कथा प्रचलित है कि एक साहूकार की पत्नी से मिट्टी की खुदाई करते वक्त सेह के बच्चे की हत्या हो जाती है। इसके बाद साहूकार के बच्चों की मौत होने लगती है। इस पर साहूकार की पत्नी अहोई माता की पूजा करती है तो सब ठीक हो जाता है। इसके बाद वह मां अहोई का व्रत धारण करती है। तभी से महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती आ रही हैं। इसके बाद तारे को अर्घ्य देकर संतान की लंबी उम्र और सुखदायी जीवन की कामना करने के बाद अन्न ग्रहण करती हैं। पुराने समय में मिट्टी की झकरी में पूजा के दौरान अनाज, धान किसान डालते थे। इसे बेचकर बच्चे अपनी मनपसंद चीजें लेते थे।
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करनाल। संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए आज माताएं अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। दिनभर भूखी प्यासी रहकर माताएं मंगलवार को तारामंडल के उदय होने पर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी और कुछ माताएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
सेक्टर-7 कर्णेश्वरम महादेव मंदिर के पंडित पष्ठी बल्लभ पांडेय ने बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को अहोई माता का व्रत रखा जाता है। पंडित ने बताया कि बुधवार 11.09 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस व्रत में माताएं संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी व उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं। बुधवार शाम 6 बजे तारा मंडल दिखाई देगा और चंद्रमा रात को 11.44 बजे दिखाई देगा। वहीं, दूूसरी ओर अहोई व्रत को लेकर मंगलवार को बाजारों में रौनक बढ़ी। माताओं ने पूजा के लिए अहोई और अहोई माता का चित्र खरीदा। इतना ही नहीं संतान ने भी अपनी माताओं के लिए खरीदारी की।
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ऐसे करे अहोई माता की पूजा
पंडित पष्ठी बल्लभ पांडेय ने बताया कि पूजन के लिए दीवार पर अहोई माता और सेह की तस्वीर बनाई जाती है। फिर रोली, भात और दूध से पूजन किया जाता है। इसके बाद कलश में जल भरकर माताएं अहोई अष्टमी की कथा का श्रवण करती हैं। कथा प्रचलित है कि एक साहूकार की पत्नी से मिट्टी की खुदाई करते वक्त सेह के बच्चे की हत्या हो जाती है। इसके बाद साहूकार के बच्चों की मौत होने लगती है। इस पर साहूकार की पत्नी अहोई माता की पूजा करती है तो सब ठीक हो जाता है। इसके बाद वह मां अहोई का व्रत धारण करती है। तभी से महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती आ रही हैं। इसके बाद तारे को अर्घ्य देकर संतान की लंबी उम्र और सुखदायी जीवन की कामना करने के बाद अन्न ग्रहण करती हैं। पुराने समय में मिट्टी की झकरी में पूजा के दौरान अनाज, धान किसान डालते थे। इसे बेचकर बच्चे अपनी मनपसंद चीजें लेते थे।
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