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पानी-सीवरेज के 90 हजार अवैध कनेक्शन, निगम को करोड़ों की चपत
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नरेंद्र शर्मा
करनाल। शहर में पानी-सीवरेज के करीब 90 हजार अवैध कनेक्शन चल रहे हैं जिससे नगर निगम को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। जबकि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का लोग फायदा उठा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर में ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे किया जा रहा है, कनेक्शनों का ब्योरा मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।
वैसे तो पानी आय का कोई विशेष साधन नहीं होता मगर निगम में जमा होने वाले पानी-सीवरेज के बिल की राशि से व्यवस्थाओं में और सुधार करने में मदद मिलती है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में पानी के 39677 व सीवरेज के 25829 वैध कनेक्शन हैं। वहीं करीब 90 हजार अवैध कनेक्शन चल रहे हैं हालांकि इनमें अवैध कॉलोनियाें में चल रहे कनेक्शन भी शामिल हैं। संवाद
कनेक्शन लेने पर लगता है मीटर
पानी-सीवरेज का कनेक्शन लेने के लिए निगम में कागजी कार्यवाही होती है, जो पूरी होने के बाद बिजली मीटर की तरह घर पर मीटर लगाया जाता है जिसके बाद कनेक्शन वैध माना जाता है।
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इन इलाकों में ज्यादा अवैध कनेक्शन
जानकारी के अनुसार फूसगढ़, राजीवपुरम, विकास नगर, विकास कॉलोनी, दाहा, शिव कॉलोनी, शास्त्री नगर, कर्णिका विहार, पृथ्वी विहार, दुर्गा कॉलोनी, उत्तम नगर आदि जगहों पर ज्यादातर अवैध कनेक्शन चल रहे हैं। शहर में पानी-सीवरेज के करीब 65 हजार कनेक्शन हैं जो विभाग के रिकॉर्ड में वैध है। इनमें से भी करीब 10 हजार उपभोक्ताओं ने छह साल से पानी-सीवरेज का बिल नहीं भरा जो कि करीब साढ़े चार करोड़ रुपये बनता है।
60 रुपये प्रतिमाह है बिल
विभाग के अनुसार उपभोक्ताओं से प्रतिमाह 60 रुपये पानी-सीवरेज का बिल लिया जाता है। जिसमें 48 रुपये पानी और 12 रुपये सीवरेज का बिल शामिल है लेकिन विभागीय अधिकारी बिल भरवाने के प्रति सजग नहीं हैं।
नगर निगम के ईओ देवेंद्र नरवाल ने बताया कि पानी संबंधी कार्य अलग विंग देखती है इसलिए इस बारे में कुछ नहीं बता सकता।
विभाग की ओर से प्रदेश भर में ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे अवैध कनेक्शनों का ब्योरा प्राप्त होगा तो इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
अक्षय भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम
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करनाल। शहर में पानी-सीवरेज के करीब 90 हजार अवैध कनेक्शन चल रहे हैं जिससे नगर निगम को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। जबकि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का लोग फायदा उठा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर में ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे किया जा रहा है, कनेक्शनों का ब्योरा मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।
वैसे तो पानी आय का कोई विशेष साधन नहीं होता मगर निगम में जमा होने वाले पानी-सीवरेज के बिल की राशि से व्यवस्थाओं में और सुधार करने में मदद मिलती है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में पानी के 39677 व सीवरेज के 25829 वैध कनेक्शन हैं। वहीं करीब 90 हजार अवैध कनेक्शन चल रहे हैं हालांकि इनमें अवैध कॉलोनियाें में चल रहे कनेक्शन भी शामिल हैं। संवाद
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कनेक्शन लेने पर लगता है मीटर
पानी-सीवरेज का कनेक्शन लेने के लिए निगम में कागजी कार्यवाही होती है, जो पूरी होने के बाद बिजली मीटर की तरह घर पर मीटर लगाया जाता है जिसके बाद कनेक्शन वैध माना जाता है।
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इन इलाकों में ज्यादा अवैध कनेक्शन
जानकारी के अनुसार फूसगढ़, राजीवपुरम, विकास नगर, विकास कॉलोनी, दाहा, शिव कॉलोनी, शास्त्री नगर, कर्णिका विहार, पृथ्वी विहार, दुर्गा कॉलोनी, उत्तम नगर आदि जगहों पर ज्यादातर अवैध कनेक्शन चल रहे हैं। शहर में पानी-सीवरेज के करीब 65 हजार कनेक्शन हैं जो विभाग के रिकॉर्ड में वैध है। इनमें से भी करीब 10 हजार उपभोक्ताओं ने छह साल से पानी-सीवरेज का बिल नहीं भरा जो कि करीब साढ़े चार करोड़ रुपये बनता है।
60 रुपये प्रतिमाह है बिल
विभाग के अनुसार उपभोक्ताओं से प्रतिमाह 60 रुपये पानी-सीवरेज का बिल लिया जाता है। जिसमें 48 रुपये पानी और 12 रुपये सीवरेज का बिल शामिल है लेकिन विभागीय अधिकारी बिल भरवाने के प्रति सजग नहीं हैं।
नगर निगम के ईओ देवेंद्र नरवाल ने बताया कि पानी संबंधी कार्य अलग विंग देखती है इसलिए इस बारे में कुछ नहीं बता सकता।
विभाग की ओर से प्रदेश भर में ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे किया जा रहा है, जो अंतिम चरण में है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे अवैध कनेक्शनों का ब्योरा प्राप्त होगा तो इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
अक्षय भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम