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सीएम सिटी में धड़ल्ले से बिक रही रही है घटिया खाद्य सामग्री, सात महीने में एक बार भी नहीं की स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:34 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। खाने-पीने के शौकीन सीएम सिटी निवासियों को बाजार में घटिया खाना मिल रहा है। तीज के त्योहार में खुलेआम गाड़ियों में बिक रहा है फिरनी और घेवर। इन दिनों वैसे भी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे में खाने पीने की चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर गली-सड़ी फल सब्जियों के रूप में लोगों को बीमारियां बांटी जा रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें बंद कर बैठा हुआ है। इस वर्ष के सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन विभाग ने एक बार भी न तो इन गले सड़े फल बेचने वालों पर कोई कार्रवाई की है और न ही खुले में मिठाई बेचने वाले दुकानदारों पर।
2017 में एक बार स्वास्थ्य विभाग ने गले-सड़े फल बेचने, खुले में मिठाई बेचने, जूस की दुकान आदि पर छापेमारी कर दूषित खाद्य सामग्री को नष्ट किया था, लेकिन इस साल कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस स्टैंड से लेकर कमेटी चौक पर लाइन में खुले में फल बेचे जा रहे हैं। इसी प्रकार मिठाई की दुकानों पर रखी मिठाई पर भी मक्खी मच्छर बैठे रहते हैं। घटिया खाद्य सामग्री खाने के कारण लोगों में कैंसर, पीलिया, उल्टी-दस्त, हार्ट प्रॉब्लम जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।
अनार के जूस में मिलाते हैं लाल रंग
जूस कार्नर संचालक अनार के जूस का रंग गहरा करने के लिए उसमें लाल रंग मिलाते हैं। उपभोक्ता जूस का गहरा रंग देखकर उसे खुश होकर पी जाता है, लेकिन उसे नहीं पता कि इस जूस में रंग मिला हुआ है। जूस कार्नर वाले पहले ही एक डिब्बे में अनार के दाने निकाल लेते हैं, जिनका रंग सफेद होता है। फिर उन्हें वे लाल करने के लिए उन अनार के दानों में रंग मिला देते हैं। यदि आपको यह चेक करना हो तो उनके अनार से भरे डिब्बे में हाथ डालकर देखे तो आपका हाथ लाल हो जाएगा।
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बिना लाइसेंस और जांच किए धड़ल्ले से बेच रहे हैं कैंपरों में पानी
शहर में जगह-जगह आरो प्लांट लगे हुए हैं, जिनके पास किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं है। इस बात के बारे में विभाग को भी पता है, लेकिन फिर भी अनजान बना स्वास्थ्य विभाग खुली आंखों से यह खेल देख रहा है। बिना पानी की जांच किए ये फैक्टरी मालिक कैंपरों में पानी भर कर ऑफिस व घरों में पहुंचाते हैं। इन प्लांटों में साफ-सफाई पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इस कारण पानी में कभी छिपकली निकलती है तो कभी मच्छर व मक्खी।
जगह-जगह खुले हैं ढाबे, नहीं देते साफ सफाई पर ध्यान
शहर में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेरठ रोड, अस्पताल चौक सहित जगह-जगह ढाबे खुले हैं, इनके पास भी कोई लाइसेंस नहीं है। इन ढाबों पर गरीब व्यक्ति खाना खाते हैं, लेकिन इन ढाबों पर सफाई का कोई नाम नहीं होता। ये ड्रम में पानी रखते हैं वह भी बिना ढका हुआ होता है। ऐसे ही सब्जियां आदि उन पर भी मच्छर मक्खी बैठे रहते हैं।
प्रशासन सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ कर रहा है खिलवाड़
राजेश शर्मा आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि शहर में सरेआम रेहड़ियों और ढाबों पर चाऊमीन, बर्गर, गले सड़े फल और अन्य खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है, लेकिन प्रशासन के संबंधित अधिकारी कभी भी सैंपल नहीं भरते, इस प्रकार से सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अधिकारी केवल दिवाली के सीजन पर ही ब्रांडेड आइटमों के सैंपल भर कर इतिश्री कर लेते हैं और गली-गली चौक चौराहे पर बिक रही मिलावटी खाद्य सामग्री पर कोई ध्यान नहीं देते।
ये होती हैं बीमारियां, बढ़ रही है मरीजों की संख्या
सिविल अस्पताल के डिप्टी एसएमओ डॉ. कुलबीर ने बताया कि गले सड़े फल, खाद्य सामग्री पर मक्खी-मच्छर बैठने, खाना बनाने में साफ-सफाई का ध्यान न रखना, गंदा पानी पीने से और रंग से बनी कोई भी खाद्य सामग्री का सेवन करने से पेट में इंफेक्शन, कैंसर, टाइफाइड बुखार, हैजा, पीलिया जैसी बीमारी होती है। इन मरीजों की संख्या पहले से ज्यादा है करीब 200 मरीज ऐसे आते हैं। इन बीमारियों से फल व सब्जियों को पानी में अच्छे से धोकर खाना चाहिए और खाना बनाने की जगह पर साफ-सफाई न हो तो वहां खाना नहीं खाना चाहिए, गंदे पानी का सेवन न करें।
रेहड़ियों पर गले सड़े फल बेचने वालों, ढाबों पर बिना सफाई के खाद्य सामग्री बनाने वालों सहित सभी पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। इस बारे में संबंधित अधिकारी को निर्देश दे दिए हैं।
-डॉ. राजेंद्र कुमार, एडिशनल सीएमओ, करनाल।
लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा, स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए जाएंगे की वे तुरंत कार्रवाई करें और पूछा जाएगा की अभी तक उन्होंने गले सड़े फल बेचने वालों, घटिया खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की, यदि की है तो उसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी।
-डॉ. आदित्य दहिया, डीसी करनाल।
करनाल। खाने-पीने के शौकीन सीएम सिटी निवासियों को बाजार में घटिया खाना मिल रहा है। तीज के त्योहार में खुलेआम गाड़ियों में बिक रहा है फिरनी और घेवर। इन दिनों वैसे भी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे में खाने पीने की चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर गली-सड़ी फल सब्जियों के रूप में लोगों को बीमारियां बांटी जा रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें बंद कर बैठा हुआ है। इस वर्ष के सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन विभाग ने एक बार भी न तो इन गले सड़े फल बेचने वालों पर कोई कार्रवाई की है और न ही खुले में मिठाई बेचने वाले दुकानदारों पर।
2017 में एक बार स्वास्थ्य विभाग ने गले-सड़े फल बेचने, खुले में मिठाई बेचने, जूस की दुकान आदि पर छापेमारी कर दूषित खाद्य सामग्री को नष्ट किया था, लेकिन इस साल कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस स्टैंड से लेकर कमेटी चौक पर लाइन में खुले में फल बेचे जा रहे हैं। इसी प्रकार मिठाई की दुकानों पर रखी मिठाई पर भी मक्खी मच्छर बैठे रहते हैं। घटिया खाद्य सामग्री खाने के कारण लोगों में कैंसर, पीलिया, उल्टी-दस्त, हार्ट प्रॉब्लम जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।
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अनार के जूस में मिलाते हैं लाल रंग
जूस कार्नर संचालक अनार के जूस का रंग गहरा करने के लिए उसमें लाल रंग मिलाते हैं। उपभोक्ता जूस का गहरा रंग देखकर उसे खुश होकर पी जाता है, लेकिन उसे नहीं पता कि इस जूस में रंग मिला हुआ है। जूस कार्नर वाले पहले ही एक डिब्बे में अनार के दाने निकाल लेते हैं, जिनका रंग सफेद होता है। फिर उन्हें वे लाल करने के लिए उन अनार के दानों में रंग मिला देते हैं। यदि आपको यह चेक करना हो तो उनके अनार से भरे डिब्बे में हाथ डालकर देखे तो आपका हाथ लाल हो जाएगा।
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बिना लाइसेंस और जांच किए धड़ल्ले से बेच रहे हैं कैंपरों में पानी
शहर में जगह-जगह आरो प्लांट लगे हुए हैं, जिनके पास किसी प्रकार का लाइसेंस नहीं है। इस बात के बारे में विभाग को भी पता है, लेकिन फिर भी अनजान बना स्वास्थ्य विभाग खुली आंखों से यह खेल देख रहा है। बिना पानी की जांच किए ये फैक्टरी मालिक कैंपरों में पानी भर कर ऑफिस व घरों में पहुंचाते हैं। इन प्लांटों में साफ-सफाई पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इस कारण पानी में कभी छिपकली निकलती है तो कभी मच्छर व मक्खी।
जगह-जगह खुले हैं ढाबे, नहीं देते साफ सफाई पर ध्यान
शहर में बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेरठ रोड, अस्पताल चौक सहित जगह-जगह ढाबे खुले हैं, इनके पास भी कोई लाइसेंस नहीं है। इन ढाबों पर गरीब व्यक्ति खाना खाते हैं, लेकिन इन ढाबों पर सफाई का कोई नाम नहीं होता। ये ड्रम में पानी रखते हैं वह भी बिना ढका हुआ होता है। ऐसे ही सब्जियां आदि उन पर भी मच्छर मक्खी बैठे रहते हैं।
प्रशासन सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ कर रहा है खिलवाड़
राजेश शर्मा आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि शहर में सरेआम रेहड़ियों और ढाबों पर चाऊमीन, बर्गर, गले सड़े फल और अन्य खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है, लेकिन प्रशासन के संबंधित अधिकारी कभी भी सैंपल नहीं भरते, इस प्रकार से सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अधिकारी केवल दिवाली के सीजन पर ही ब्रांडेड आइटमों के सैंपल भर कर इतिश्री कर लेते हैं और गली-गली चौक चौराहे पर बिक रही मिलावटी खाद्य सामग्री पर कोई ध्यान नहीं देते।
ये होती हैं बीमारियां, बढ़ रही है मरीजों की संख्या
सिविल अस्पताल के डिप्टी एसएमओ डॉ. कुलबीर ने बताया कि गले सड़े फल, खाद्य सामग्री पर मक्खी-मच्छर बैठने, खाना बनाने में साफ-सफाई का ध्यान न रखना, गंदा पानी पीने से और रंग से बनी कोई भी खाद्य सामग्री का सेवन करने से पेट में इंफेक्शन, कैंसर, टाइफाइड बुखार, हैजा, पीलिया जैसी बीमारी होती है। इन मरीजों की संख्या पहले से ज्यादा है करीब 200 मरीज ऐसे आते हैं। इन बीमारियों से फल व सब्जियों को पानी में अच्छे से धोकर खाना चाहिए और खाना बनाने की जगह पर साफ-सफाई न हो तो वहां खाना नहीं खाना चाहिए, गंदे पानी का सेवन न करें।
रेहड़ियों पर गले सड़े फल बेचने वालों, ढाबों पर बिना सफाई के खाद्य सामग्री बनाने वालों सहित सभी पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। इस बारे में संबंधित अधिकारी को निर्देश दे दिए हैं।
-डॉ. राजेंद्र कुमार, एडिशनल सीएमओ, करनाल।
लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा, स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए जाएंगे की वे तुरंत कार्रवाई करें और पूछा जाएगा की अभी तक उन्होंने गले सड़े फल बेचने वालों, घटिया खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की, यदि की है तो उसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी।
-डॉ. आदित्य दहिया, डीसी करनाल।