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Karnal News: अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में पहुंचे 794 शोध पत्र, सम्मेलन बना वैश्विक वैचारिक मंच
Fri, 21 Nov 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 21 Nov 2025 01:26 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
राजरानी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 24 से 26 नवंबर तक आयोजित होने जा रहे 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में गीता के विविध आयामों पर चिंतन और शोध के लिए दुनियाभर से 794 शोध पत्र मिले हैं, जो पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक हैं। पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 700 के करीब थी जबकि इस बार गीता विशेषज्ञों ने रुचि दिखाते हुए अपने शोध भेजे हैं। यह सम्मेलन अब वैश्विक वैचारिक मंच का स्वरूप ले चुका है, जहां ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
तीन दिवसीय सम्मेलन विदेश मंत्रालय केंद्र सरकार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम हॉल में होगा जिसका उद्घाटन 24 नवंबर को होगा। सम्मेलन में गीतोक्त स्वधर्म : कर्तव्यनिष्ठा, शांति और सद्भावना की प्रेरणा विषय पर चिंतन-मंथन किया जाएगा। 16 देशों के 25 विद्वान गीता ज्ञान पर अपने विचार साझा करेंगे। इस वर्ष बड़ी संख्या में शोध पत्रों का मिलना दर्शाता है कि गीता सम्मेलन अब केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारों को जोड़ने वाला मंच बन चुका है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि अब देश-विदेश के शोधार्थी स्वयं संपर्क कर सम्मेलन का हिस्सा बनना चाहते हैं। यह गीता सम्मेलन की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्वस्तरीय स्वरूप का प्रमाण है। सम्मेलन में देश-विदेश के शोधार्थी और विद्वान श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन, कर्तव्य, नीति, समाज और वैश्विक सद्भाव पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। आज विश्व में बढ़ती अशांति और नकारात्मकता का मूल कारण अज्ञान है। गीता वह प्रकाश है जो मनुष्य को आत्मसात कर सही दिशा दिखा सकती है।
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पांच प्लेनरी सत्र में अंतरराष्ट्रीय विद्वान करेंगे मंथन
उद्घाटन दिवस पर विश्वविद्यालय में पांच प्रमुख प्लेनरी सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका, जापान, चीन, रूस, हंगरी, श्रीलंका, बेलारूस, इथियोपिया, लिथुआनिया, थाईलैंड और नेपाल सहित 16 देशों के विद्वान गीता ज्ञान पर अपने विचार रखेंगे। इन सत्रों में डिजिटल दुनिया में गीता नैतिकता, सह-अस्तित्व और पारिस्थितिकी, कर्तव्य, शांति और सद्भाव का पुनर्मूल्यांकन, डिजिटल युद्धक्षेत्र के शोर में संकेत, संघर्ष और विकल्पों के मार्ग पर गीता दृष्टि जैसे मुख्य विषयों पर मंथन किया जाएगा।
13 तकनीकी सत्रों में गीता के हर पहलू पर होगा मंथन
अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में 13 तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। इन सत्रों में गीता के मर्म, महाभारत का कालखंड, स्वधर्म, निष्काम कर्म, समसामयिक जीवन में गीता के उपयोग, मनोवैज्ञानिक कल्याण, सह-अस्तित्व की पारिस्थितिकी सहित कई विषयों पर विद्वान मंथन करेंगे। तकनीकी सत्र 26 नवंबर से प्रारंभ होंगे।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 24 से 26 नवंबर तक आयोजित होने जा रहे 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में गीता के विविध आयामों पर चिंतन और शोध के लिए दुनियाभर से 794 शोध पत्र मिले हैं, जो पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक हैं। पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 700 के करीब थी जबकि इस बार गीता विशेषज्ञों ने रुचि दिखाते हुए अपने शोध भेजे हैं। यह सम्मेलन अब वैश्विक वैचारिक मंच का स्वरूप ले चुका है, जहां ज्ञान, संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
तीन दिवसीय सम्मेलन विदेश मंत्रालय केंद्र सरकार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम हॉल में होगा जिसका उद्घाटन 24 नवंबर को होगा। सम्मेलन में गीतोक्त स्वधर्म : कर्तव्यनिष्ठा, शांति और सद्भावना की प्रेरणा विषय पर चिंतन-मंथन किया जाएगा। 16 देशों के 25 विद्वान गीता ज्ञान पर अपने विचार साझा करेंगे। इस वर्ष बड़ी संख्या में शोध पत्रों का मिलना दर्शाता है कि गीता सम्मेलन अब केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारों को जोड़ने वाला मंच बन चुका है।
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कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा का कहना है कि अब देश-विदेश के शोधार्थी स्वयं संपर्क कर सम्मेलन का हिस्सा बनना चाहते हैं। यह गीता सम्मेलन की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्वस्तरीय स्वरूप का प्रमाण है। सम्मेलन में देश-विदेश के शोधार्थी और विद्वान श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन, कर्तव्य, नीति, समाज और वैश्विक सद्भाव पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। आज विश्व में बढ़ती अशांति और नकारात्मकता का मूल कारण अज्ञान है। गीता वह प्रकाश है जो मनुष्य को आत्मसात कर सही दिशा दिखा सकती है।
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पांच प्लेनरी सत्र में अंतरराष्ट्रीय विद्वान करेंगे मंथन
उद्घाटन दिवस पर विश्वविद्यालय में पांच प्रमुख प्लेनरी सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका, जापान, चीन, रूस, हंगरी, श्रीलंका, बेलारूस, इथियोपिया, लिथुआनिया, थाईलैंड और नेपाल सहित 16 देशों के विद्वान गीता ज्ञान पर अपने विचार रखेंगे। इन सत्रों में डिजिटल दुनिया में गीता नैतिकता, सह-अस्तित्व और पारिस्थितिकी, कर्तव्य, शांति और सद्भाव का पुनर्मूल्यांकन, डिजिटल युद्धक्षेत्र के शोर में संकेत, संघर्ष और विकल्पों के मार्ग पर गीता दृष्टि जैसे मुख्य विषयों पर मंथन किया जाएगा।
13 तकनीकी सत्रों में गीता के हर पहलू पर होगा मंथन
अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में 13 तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। इन सत्रों में गीता के मर्म, महाभारत का कालखंड, स्वधर्म, निष्काम कर्म, समसामयिक जीवन में गीता के उपयोग, मनोवैज्ञानिक कल्याण, सह-अस्तित्व की पारिस्थितिकी सहित कई विषयों पर विद्वान मंथन करेंगे। तकनीकी सत्र 26 नवंबर से प्रारंभ होंगे।

कुरुक्षेत्र। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा।