{"_id":"5970e7604f1c1bc27f8b4612","slug":"71500571488-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाकियू की हुंकार- सरकार को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाकियू की हुंकार- सरकार को
Updated Thu, 20 Jul 2017 10:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
8 अगस्त तक कर्ज छोड़ो, नहीं तो सत्ता छोड़ो
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कर्जमाफी पर अब तक सरकार को घेरने में विफल रही भाकियू ने एक बार फिर से हुंकार भर दी है। शामगढ़ में वीरवार को हुई किसान महापंचायत में भाकियू ने ऐलान किया कि राज्य सरकार यदि 8 अगस्त तक किसानों की कर्ज माफी की घोषणा नहीं करती तो सभी किसान प्रदेश में सत्ता छोड़ो आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत सभी जिलों में एक साथ आंदोलन शुरू करने के साथ प्रदेश के किसी भी गांव में भाजपा के मंत्री सांसद व विधायक को घुसने नहीं दिया जाएगा। किसानों की यह महापंचायत शामगढ़ के किसान जसविंद्र के जेल से बाइज्जत रिहा होने के बाद आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित की गई थी।
महापंचायत की अध्यक्षता किसान नेता बाबूराम बड़थल ने की। महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसानों की कर्जमाफी के लिए 8 अगस्त तक प्रदेश सरकार को समय दिया जाए। उसके बाद 9 अगस्त से पूरे प्रदेशभर में भाजपा के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कार्यक्रमों का विरोध शुरू करने के साथ करनाल से कर्जा छोड़ो नहीं तो सत्ता छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजाया जाएगा। जहां पर पूरे प्रदेशभर से किसान एकत्रित होंगे। किसानों ने कहा कि 9 अगस्त को आजादी का ऐलान स्वतंत्रता से पूर्व महात्मा गांधी ने किया था। लेकिन इस बार 9 अगस्त को किसान आर्थिक आजादी का ऐलान कर्णनगरी से होगा।
महापंचायत में किसानों से भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि किसान अब बेचारा नहीं रहा और न ही किसी से दबेगा। उन्होंने कहा कि किसान की कोई जाति नहीं होती और न ही कोई धर्म होता है। किसान का धर्म खेती करना होता है और उसका कर्तव्य अपने हितों के साथ-साथ देश के कमजोर वर्ग के हितों में लड़ना होता है। उन्होंने कहा कि आज देश में सबसे ज्यादा सैनिक किसानों के परिवार से है। वह एक तरफ जहां दुश्मन से देश की रक्षा करते हैं। वहीं पर देश को भुखमरी से बचाने का काम किसान और मजदूर करते हैं। ऐसे में उनकी अनदेखी करना राष्ट्र विरोधी है और वह इसे कतई सहन नहीं करेंगे। इस महापंचायत के निर्णय के बाद अब सरकार और किसानों के बीच आमने-सामने की लड़ाई तय मानी जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, प्रदेश महासचिव विजय मैहता, प्रदेश महासचिव जगमोहन मलिक सहित कई किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन तो अब होकर ही रहेगा। किसानों के सब्र का बांध टूट चुका है।
विज्ञापन
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमचंद शाहपुर, सुखपाल, मोठसरा, कोषाध्यक्ष सतपाल दिलोवाली, यमुनानगर अध्यक्ष सुभाष गुर्जर, कुरुक्षेत्र अध्यक्ष मैनपाल गुढ़ा, कैथल अध्यक्ष रामसिंह खुराना, पानीपत उपाध्यक्ष कृष्ण अटावला, मैहताब कादियान, संयोजक राजेंद्र आर्य, सुरेंद्र सांगवान, यशपाल राणा, जोगिंद्र सिंह झिंड़ा, विनोद राणा आदि मौजूद रहे।
शामगढ़ के किसान की रिहाई ने भरा किसानों में जोश
शामगढ़ के किसान जसविंद्र की रिहाई ने किसानों को अपना आंदोलन शुरू करने के लिए नया टॉनिक दे दिया है। अभी तक सरकार से वार्ता करने में उलझे किसान नेता अब सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई शुरू करने के मूड में नजर आ रहे हैं। महापंचायत में किसानों ने खुद माना कि जसविंद्र ने किसानों को उनकी ताकत याद दिलाई है। इसके कारण ही महापंचायत जय जवान- जय किसान और देश भक्ति के नारों से गूंजती रही।
पुलिस ने कर रखी थी पूरी तैयारी
भाकियू की शामगढ़ महापंचायत को लेकर प्रशासन पहले ही मुस्तैद था। पुलिस ने जीटी रोड को जाम होने से बचाने के लिए चौकस व्यवस्था कर रखी थी। महापंचायत से करीब एक किलोमीटर दूर किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हालांकि महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से चली।
जसविंद्र की रिहाई पर हुआ किसान भोज
शामगढ़ के किसान जसविंद्र की बाइज्जत रिहाई और उसके जन्मदिन पर किसान भोज आयोजित किया गया। इसमें परंपरागत रूप से किसानों और ग्रामीणों ने भी भाग लिया। किसानों ने नीचे बैठकर भोज का आनंद लिया और जसविंद्र को रिहाई और जन्मदिन की बधाई दी। विदित हो की लघु सचिवालय के सामने बिजली निगम के विरोध में ट्रांसफार्मर जलाने वाले किसान जसविंद्र को उसके जन्मदिन के एक दिन पहले ही जेल से रिहाई मिली थी।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कर्जमाफी पर अब तक सरकार को घेरने में विफल रही भाकियू ने एक बार फिर से हुंकार भर दी है। शामगढ़ में वीरवार को हुई किसान महापंचायत में भाकियू ने ऐलान किया कि राज्य सरकार यदि 8 अगस्त तक किसानों की कर्ज माफी की घोषणा नहीं करती तो सभी किसान प्रदेश में सत्ता छोड़ो आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत सभी जिलों में एक साथ आंदोलन शुरू करने के साथ प्रदेश के किसी भी गांव में भाजपा के मंत्री सांसद व विधायक को घुसने नहीं दिया जाएगा। किसानों की यह महापंचायत शामगढ़ के किसान जसविंद्र के जेल से बाइज्जत रिहा होने के बाद आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आयोजित की गई थी।
महापंचायत की अध्यक्षता किसान नेता बाबूराम बड़थल ने की। महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसानों की कर्जमाफी के लिए 8 अगस्त तक प्रदेश सरकार को समय दिया जाए। उसके बाद 9 अगस्त से पूरे प्रदेशभर में भाजपा के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कार्यक्रमों का विरोध शुरू करने के साथ करनाल से कर्जा छोड़ो नहीं तो सत्ता छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजाया जाएगा। जहां पर पूरे प्रदेशभर से किसान एकत्रित होंगे। किसानों ने कहा कि 9 अगस्त को आजादी का ऐलान स्वतंत्रता से पूर्व महात्मा गांधी ने किया था। लेकिन इस बार 9 अगस्त को किसान आर्थिक आजादी का ऐलान कर्णनगरी से होगा।
विज्ञापन
महापंचायत में किसानों से भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि किसान अब बेचारा नहीं रहा और न ही किसी से दबेगा। उन्होंने कहा कि किसान की कोई जाति नहीं होती और न ही कोई धर्म होता है। किसान का धर्म खेती करना होता है और उसका कर्तव्य अपने हितों के साथ-साथ देश के कमजोर वर्ग के हितों में लड़ना होता है। उन्होंने कहा कि आज देश में सबसे ज्यादा सैनिक किसानों के परिवार से है। वह एक तरफ जहां दुश्मन से देश की रक्षा करते हैं। वहीं पर देश को भुखमरी से बचाने का काम किसान और मजदूर करते हैं। ऐसे में उनकी अनदेखी करना राष्ट्र विरोधी है और वह इसे कतई सहन नहीं करेंगे। इस महापंचायत के निर्णय के बाद अब सरकार और किसानों के बीच आमने-सामने की लड़ाई तय मानी जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, प्रदेश महासचिव विजय मैहता, प्रदेश महासचिव जगमोहन मलिक सहित कई किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन तो अब होकर ही रहेगा। किसानों के सब्र का बांध टूट चुका है।
विज्ञापन
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमचंद शाहपुर, सुखपाल, मोठसरा, कोषाध्यक्ष सतपाल दिलोवाली, यमुनानगर अध्यक्ष सुभाष गुर्जर, कुरुक्षेत्र अध्यक्ष मैनपाल गुढ़ा, कैथल अध्यक्ष रामसिंह खुराना, पानीपत उपाध्यक्ष कृष्ण अटावला, मैहताब कादियान, संयोजक राजेंद्र आर्य, सुरेंद्र सांगवान, यशपाल राणा, जोगिंद्र सिंह झिंड़ा, विनोद राणा आदि मौजूद रहे।
शामगढ़ के किसान की रिहाई ने भरा किसानों में जोश
शामगढ़ के किसान जसविंद्र की रिहाई ने किसानों को अपना आंदोलन शुरू करने के लिए नया टॉनिक दे दिया है। अभी तक सरकार से वार्ता करने में उलझे किसान नेता अब सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई शुरू करने के मूड में नजर आ रहे हैं। महापंचायत में किसानों ने खुद माना कि जसविंद्र ने किसानों को उनकी ताकत याद दिलाई है। इसके कारण ही महापंचायत जय जवान- जय किसान और देश भक्ति के नारों से गूंजती रही।
पुलिस ने कर रखी थी पूरी तैयारी
भाकियू की शामगढ़ महापंचायत को लेकर प्रशासन पहले ही मुस्तैद था। पुलिस ने जीटी रोड को जाम होने से बचाने के लिए चौकस व्यवस्था कर रखी थी। महापंचायत से करीब एक किलोमीटर दूर किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हालांकि महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से चली।
जसविंद्र की रिहाई पर हुआ किसान भोज
शामगढ़ के किसान जसविंद्र की बाइज्जत रिहाई और उसके जन्मदिन पर किसान भोज आयोजित किया गया। इसमें परंपरागत रूप से किसानों और ग्रामीणों ने भी भाग लिया। किसानों ने नीचे बैठकर भोज का आनंद लिया और जसविंद्र को रिहाई और जन्मदिन की बधाई दी। विदित हो की लघु सचिवालय के सामने बिजली निगम के विरोध में ट्रांसफार्मर जलाने वाले किसान जसविंद्र को उसके जन्मदिन के एक दिन पहले ही जेल से रिहाई मिली थी।