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कोरोना काल में अनाथ हुए करीब 68 बच्चों का बाल कल्याण समिति करेगी निरीक्षण
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कोरोना काल में कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। इनकी मदद के लिए बाल कल्याण समिति ने बीड़ा उठाया है। ऐसे बच्चों का जीवन गलत हाथों में न जाए, इसके लिए वह सर्वे कर इनकी खोज कर रही है। अब तक करीब 68 ऐसे बच्चे समिति ने पता लगाए हैं। इनकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है।
महिला एवं बाल विकास आयोग के निर्देश पर बाल कल्याण समिति ने इस संबंध में काम शुरू कर दिया है। जिन बच्चों के माता-पिता या दोनों में से एक कोई कोरोना से गुजर गए हैं, उनके भविष्य के लिए यह कवायद है। बुधवार को समिति ने वीडियो कॉल से बच्चों की जानकारी जुटाने की कोशिश की। हालांकि घर वाले ऐसे बच्चों के संबंध में सही जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बताया गया कि जब तक समिति को हर एक बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तब तक उन्हें किसी के भी पास छोड़ा नहीं जाएगा। अगर बच्चा सुरक्षित नहीं लगता तो उसे केयर संस्था में रखा जाएगा।
इन बच्चों को सुरक्षा देने की कवायद
कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है। पहली टीम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। इन्होंने एरिया में सर्वे कर करीब 68 बच्चों की सूची तैयार की है। बाल कल्याण समिति के चार सदस्यों की टीमें इन बच्चों की सुरक्षा निर्धारित करने के लिए निरीक्षण करेंगी। तीसरी टीम संरक्षण अधिकारी गैर-संस्थागत केयर की है। इन तीन टीमों के सहयोग से निरीक्षण कर बच्चों को सुरक्षा दी जाएगी।
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वीडियो कॉल पर सही जानकारी नहीं मिली
बच्चों की जानकारी जुटाने का कार्य वीरवार से बाल कल्याण समिति ने शुरू किया। इसके लिए आंगनबाड़ी वर्करों को उनके घर भेजा गया। समिति के सदस्यों से वीडियो कॉल पर बच्चे के घरवालों की बात करवाई लेकिन सही जानकारी नहीं मिल सकी। आठ परिवारों से बातचीत के बाद समिति संतुष्ट नहीं है। दरअसल, बच्चे की सुरक्षा निर्धारित करने के लिए यह जानना जरूरी है कि भविष्य के लिए उसके नाम कोई संपति है या नहीं। हालांकि परिवार वाले यह जानकारी देने से मुकर रहे हैं।
सामाजिक जांच रिपोर्ट बनाएगी टीम
बच्चों के संबंध में पक्की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मशक्कत करनी होगी। बाल कल्याण समिति का कहना है कि सामाजिक जांच रिपोर्ट करने वाली टीम के वर्कर हर एरिया के पटवारियों से एनओसी लिखवा कर लाएगा कि बच्चे के नाम कोई जमीन है या नहीं। ऐसी ही जानकारी ग्राम सचिवों से भी जुटाई जाएगी। सामाजिक जांच रिपोर्ट में सोशल वर्कर, आउट रीच वर्कर, गैर-संस्थागत केयर और एलपीजओ हैं, जो इस कार्य में अपनी भूमिका भी निभाएंगे।
अनाथ बच्चों को ट्रैफिकिंग का खतरा हो सकता है। लोग इन्हें अवैध तरीके से गोद ले-दे सकते हैं या रिश्तेदार बाल श्रम में धकेल सकते हैं। मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के साथ इनका यौन शोषण भी किया जा सकता है।
किसी भी अनाथ बच्चे की जानकारी मिलते ही तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करें। बाल कल्याण समिति के नंबर 0184-2255009 पर सूचना दें ताकि जल्द से जल्द बच्चों को रेस्क्यू करने के लिए पहुंचा जा सके। इसके अलावा जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय के दूरभाष नंबर 0184-2272020 पर भी दे सकते हैं। - उमेश चानना, चेयरमैन, जिला बाल कल्याण समिति
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महिला एवं बाल विकास आयोग के निर्देश पर बाल कल्याण समिति ने इस संबंध में काम शुरू कर दिया है। जिन बच्चों के माता-पिता या दोनों में से एक कोई कोरोना से गुजर गए हैं, उनके भविष्य के लिए यह कवायद है। बुधवार को समिति ने वीडियो कॉल से बच्चों की जानकारी जुटाने की कोशिश की। हालांकि घर वाले ऐसे बच्चों के संबंध में सही जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। बताया गया कि जब तक समिति को हर एक बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती तब तक उन्हें किसी के भी पास छोड़ा नहीं जाएगा। अगर बच्चा सुरक्षित नहीं लगता तो उसे केयर संस्था में रखा जाएगा।
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इन बच्चों को सुरक्षा देने की कवायद
कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है। पहली टीम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। इन्होंने एरिया में सर्वे कर करीब 68 बच्चों की सूची तैयार की है। बाल कल्याण समिति के चार सदस्यों की टीमें इन बच्चों की सुरक्षा निर्धारित करने के लिए निरीक्षण करेंगी। तीसरी टीम संरक्षण अधिकारी गैर-संस्थागत केयर की है। इन तीन टीमों के सहयोग से निरीक्षण कर बच्चों को सुरक्षा दी जाएगी।
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वीडियो कॉल पर सही जानकारी नहीं मिली
बच्चों की जानकारी जुटाने का कार्य वीरवार से बाल कल्याण समिति ने शुरू किया। इसके लिए आंगनबाड़ी वर्करों को उनके घर भेजा गया। समिति के सदस्यों से वीडियो कॉल पर बच्चे के घरवालों की बात करवाई लेकिन सही जानकारी नहीं मिल सकी। आठ परिवारों से बातचीत के बाद समिति संतुष्ट नहीं है। दरअसल, बच्चे की सुरक्षा निर्धारित करने के लिए यह जानना जरूरी है कि भविष्य के लिए उसके नाम कोई संपति है या नहीं। हालांकि परिवार वाले यह जानकारी देने से मुकर रहे हैं।
सामाजिक जांच रिपोर्ट बनाएगी टीम
बच्चों के संबंध में पक्की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मशक्कत करनी होगी। बाल कल्याण समिति का कहना है कि सामाजिक जांच रिपोर्ट करने वाली टीम के वर्कर हर एरिया के पटवारियों से एनओसी लिखवा कर लाएगा कि बच्चे के नाम कोई जमीन है या नहीं। ऐसी ही जानकारी ग्राम सचिवों से भी जुटाई जाएगी। सामाजिक जांच रिपोर्ट में सोशल वर्कर, आउट रीच वर्कर, गैर-संस्थागत केयर और एलपीजओ हैं, जो इस कार्य में अपनी भूमिका भी निभाएंगे।
अनाथ बच्चों को ट्रैफिकिंग का खतरा हो सकता है। लोग इन्हें अवैध तरीके से गोद ले-दे सकते हैं या रिश्तेदार बाल श्रम में धकेल सकते हैं। मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के साथ इनका यौन शोषण भी किया जा सकता है।
किसी भी अनाथ बच्चे की जानकारी मिलते ही तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करें। बाल कल्याण समिति के नंबर 0184-2255009 पर सूचना दें ताकि जल्द से जल्द बच्चों को रेस्क्यू करने के लिए पहुंचा जा सके। इसके अलावा जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय के दूरभाष नंबर 0184-2272020 पर भी दे सकते हैं। - उमेश चानना, चेयरमैन, जिला बाल कल्याण समिति