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करनाल के हाल: 176 स्कूलों में से 81 चल रहे बिना प्रिंसिपल के, कई में शिक्षक भी पांच से कम

Sat, 10 Jul 2021 03:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 10 Jul 2021 03:00 AM IST
सार

जिले में सबसे ज्यादा असंध खंड की स्थिति खराब है। यहां 30 स्कूलों में से महज तीन में ही प्रिंसिपल हैं। जबकि 27 पद खाली हैं।

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54 percent High and Senior Secondary Schools of Karnal Has No Principal
school - फोटो : istock

विस्तार

करनाल के सरकारी स्कूलों का नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। बेहतर शिक्षा व्यवस्था के दावे करते हुए सरकार स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे रही है लेकिन सिर्फ भवन और गेट नए बनने से शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं होगी। जिले में 54 प्रतिशत हायर और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में मुखिया के पद ही खाली हैं। यानी क्लास टीचर ही स्कूल प्रिंसिपल संबंधी कार्य करते हैं। ऐसे में वे विद्यार्थियों को पूरा समय ही नहीं दे पाते। इससे बेहतर पढ़ाई या डबल जिम्मेवारी के साथ हर बच्चे को शिक्षक द्वारा समय दे पाना संभव नहीं है। 

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निसिंग और असंध खंड में खंड शिक्षा अधिकारी भी नहीं हैं। यहां स्कूल प्रिंसिपल इस दायित्व को संभाले हैं। जिले में 176 हायर और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, जिनमें से 95 में ही प्रिंसिपल हैं। जबकि 81 स्कूल बिना प्रिंसिपल के ही चल रहे हैं। वहीं कई स्कूलों में तो शिक्षक भी पांच से कम हैं। हालांकि विभाग को उम्मीद है कि ट्रांसफर ड्राइव और प्रमोशन से कुछ रिक्त पद भरेंगे।
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समय पर पूरे नहीं हो पाते काम
प्रिंसिपल संबंधित कार्य भी अधूरे : बेहतर परीक्षा परिणाम को लेकर सरकारी स्कूलों के लिए सरकार की कई योजनाएं चली हैं। सक्षम हरियाणा, छात्रवृत्ति और एमआईएस पोर्टल पर बच्चों के डाटा अपडेट करने के अलावा स्कूल के कई प्रशासनिक कार्य भी होते हैं जोकि अतिरिक्त चार्ज के कारण शिक्षक समय पर पूरे नहीं कर पाते।
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शिक्षक संबंधित कार्य भी नहीं कर पाए : वहीं जिन स्कूलों में शिक्षक प्रिंसिपल संबंधित कार्य पूरे करने में लगे रहते हैं। वहां पढ़ाई अधूरी रहती है। शिक्षक टीचिंग में पूरा समय नहीं दे पाते। न ही सरकार की योजनाओं का बच्चों को लाभ मिल पाता है।

रिजल्ट की स्थिति
पिछले पांच सालों से रिजल्ट की स्थिति भी खराब ही है। 10वीं कक्षा का 2017 में महज 41.35 प्रतिशत ही परीक्षा परिणाम रहा। वहीं 2018 में यह 43.66 और 2020 में बढ़कर 62.46 प्रतिशत तक पहुंचा। इस साल भी करीब 40 स्कूल ऐसे थे, जहां का रिजल्ट 25 प्रतिशत से कम रहा था। इसके पीछे शिक्षकों की कमी भी मुख्य वजह है, क्योंकि न शिक्षण कार्य ठीक से हो पाता न कोई मॉनीटरिंग कर पाता है।

असंध खंड के 30 स्कूलों में से सिर्फ तीन में प्रिंसिपल
जिले में सबसे ज्यादा असंध खंड की स्थिति खराब है। यहां 30 स्कूलों में से महज तीन में ही प्रिंसिपल हैं। जबकि 27 पद खाली हैं। असंध में कई सालों से बीईओ का पद भी रिक्त है। किसी प्रिंसिपल को ही यह दायित्व दे दिया जाता है। दूसरे नंबर इंद्री में 21 स्कूलों में 15, घरौंडा में 31 में से 14, करनाल में 37 में से 14, निसिंग में 27 में से 13 और नीलोखेड़ी में 30 में से 12 स्कूलों में पद खाली हैं।


यह है पदों की स्थिति
खंड      पोस्ट   खाली     भरे
असंध     30       27        03
इंद्री        21      15         06
घरौंडा     31      14         17
करनाल   37      14         23
नीलोखेड़ी 30      12        18
निसिंग      27      13        14
कुल        176      95        81

39 शिक्षकों के प्रमोशन केस भेजे : डीईओ
स्कूल मुखिया के रिक्त पद ट्रांसफर ड्राइव में भरने की उम्मीद है। प्रमोशन के केस भी विभाग की ओर से मांगे गए थे। आवेदन के लिए 12 जुलाई अंतिम तिथि है। 39 केस डीईओ कार्यालय की ओर से मुख्यालय भेज दिए हैं। उम्मीद है कुछ रिक्त पद भर जाएंगे। -राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल

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