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मिशन एडमिशन: बैंक अकाउंट, ब्लड ग्रुप में उलझे छात्र
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:32 PM IST
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मिशन एडमिशन : बैंक अकाउंट और ब्लड ग्रुप में उलझे छात्र
- 16 डिजीट का बैंक अकाउंट नंबर वेबसाइट नहीं कर रहा स्वीकार्य,
- कोर्स, कॉलेज नेम, पारिवार की आर्थिक आय में भी छात्रों को आई दिक्कत
फोटो संख्या- 1,2
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कॉलेजों में ऑनलाइन दाखिले का पहला दिन कॉलेज प्रशासन से लेकर छात्रों तक सभी पर भारी रहा। छात्र दिनभर कॉलेज में आवेदन करने के लिए परेशान होते रहे। एक तरफ जहां वेबसाइट की स्लो स्पीड ने छात्रों को परेशान किया, वहीं रजिस्ट्रेशन के दौरान मांगी गई बैंक अकाउंट, ब्लड ग्रुप व परिवार की आर्थिक आय जैसी जानकारियों ने भी छात्रों को खूब उलझाया। सबसे ज्यादा परेशानी 16 डिजिट के बैंक अकाउंट नंबर वाले छात्रों को हुई। वेेबसाइट पर बैंक अकाउंट डिटेल के कॉलम में सिर्फ 15 डिजिट के बैंक अकाउंट नंबर ही स्वीकार्य हो रहे थे, जिसके कारण पहले दिन ये छात्र आवेदन नहीं कर पाए। कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की भीड़ सुबह होते ही साइबर कैफे पर जमा होने लगी। छात्र अभिभावकों और साइबर कैफे के कर्मचारियों की मदद से आवेदन करने की कोशिश की, लेकिन बेवसाइट पर मांगी गई जानकारियों की पूरी जानकारी न होने के कारण छात्र दूसरे स्टेप पर ही उलझ गए। विभाग ने आवेदन करने के लिए चार स्टेप बनाए हैं, पहले स्टेप पर रजिस्ट्रेशन, दूसरे पर पर्सनल डिटेल, तीसरे पर कोर्स डिटेल और चौथे स्टेप पर फीस पे करना है। छात्र आवेदन करते समय पहला स्टेप तो आसानी से पार कर गए, लेकिन दूसरे स्टेप ने छात्रों की उलझन बढ़ा दी। यहां पर छात्रों से माता-पिता के नाम के साथ आधार नंबर, बैंक अकाउंट नंबर, ब्लड ग्रुप, परिवार की आर्थिक आय जैसी जानकारी मांगी गई थी। यहां पर बैंक अकाउंट में सिर्फ 15 डिजिट के नंबर ही स्वीकार्य हो रहे थे, इसलिए 16 डिजिट बैंक अकाउंट नंबर वाले छात्र आवेदन ही नहीं कर सके। इसके अलावा ज्यादातर छात्रों को अपना ब्लड ग्रुप और परिवार की आर्थिक आय की जानकारी ही नहीं थी, छात्र घर फोन कर इस संबंध में अपने परिजनों से जानकारी लेते नजर आए। इस तरह की समस्या का सामना कॉलेजों में छात्रों के लिए बैठी हेल्प डेस्क को भी करनी पड़ी। कॉलेज प्रबंधन के लोग उच्चतर शिक्षा विभाग को मेल कर समस्याओं से अवगत कराते रहे। कुछ समस्याओं का शाम तक समाधान हो गया, लेकिन कुछ का नहीं हो पाया।
कहीं कोर्स की डिटेल गायब तो कहीं कॉलेज
पहली बार हो रहे ऑनलाइन आवेदन में कई कमियां नजर आई। विभाग ने बेवसाइट पर सभी कॉलेज के डिटेल के साथ कॉलेजों में पढ़ाए जाने वाले सभी कोर्स और सीटों की जानकारी देने का दावा किया था। लेकिन पहले दिन ही विभाग का यह दावा झूठा होता नजर आए। डीएवी कॉलेज में बीकॉम में एडमीशन के लिए आवेदन करने पहुंचे छात्रों जब कोर्स डिटेल के स्टेप पर पहुंचे तो वहां उन्हें पांच कोर्स की जगह सिर्फ तीन कोर्स ही नजर आया, कॉलेज के सामने बीकॉम का ऑप्शन नहीं दिया गया था। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन ने विभाग के अधिकारियों को मेल कर अवगम कराया, जिसके बाद कोर्स का ऑप्शन आ गया। इसी तरह कॉलेज की लिस्ट में दयाल सिंह कॉलेज का नाम तक नहीं था, जानकारी देने के बाद विभाग ने कॉलेज का नाम डाला।
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- 16 डिजीट का बैंक अकाउंट नंबर वेबसाइट नहीं कर रहा स्वीकार्य,
- कोर्स, कॉलेज नेम, पारिवार की आर्थिक आय में भी छात्रों को आई दिक्कत
फोटो संख्या- 1,2
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
कॉलेजों में ऑनलाइन दाखिले का पहला दिन कॉलेज प्रशासन से लेकर छात्रों तक सभी पर भारी रहा। छात्र दिनभर कॉलेज में आवेदन करने के लिए परेशान होते रहे। एक तरफ जहां वेबसाइट की स्लो स्पीड ने छात्रों को परेशान किया, वहीं रजिस्ट्रेशन के दौरान मांगी गई बैंक अकाउंट, ब्लड ग्रुप व परिवार की आर्थिक आय जैसी जानकारियों ने भी छात्रों को खूब उलझाया। सबसे ज्यादा परेशानी 16 डिजिट के बैंक अकाउंट नंबर वाले छात्रों को हुई। वेेबसाइट पर बैंक अकाउंट डिटेल के कॉलम में सिर्फ 15 डिजिट के बैंक अकाउंट नंबर ही स्वीकार्य हो रहे थे, जिसके कारण पहले दिन ये छात्र आवेदन नहीं कर पाए। कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की भीड़ सुबह होते ही साइबर कैफे पर जमा होने लगी। छात्र अभिभावकों और साइबर कैफे के कर्मचारियों की मदद से आवेदन करने की कोशिश की, लेकिन बेवसाइट पर मांगी गई जानकारियों की पूरी जानकारी न होने के कारण छात्र दूसरे स्टेप पर ही उलझ गए। विभाग ने आवेदन करने के लिए चार स्टेप बनाए हैं, पहले स्टेप पर रजिस्ट्रेशन, दूसरे पर पर्सनल डिटेल, तीसरे पर कोर्स डिटेल और चौथे स्टेप पर फीस पे करना है। छात्र आवेदन करते समय पहला स्टेप तो आसानी से पार कर गए, लेकिन दूसरे स्टेप ने छात्रों की उलझन बढ़ा दी। यहां पर छात्रों से माता-पिता के नाम के साथ आधार नंबर, बैंक अकाउंट नंबर, ब्लड ग्रुप, परिवार की आर्थिक आय जैसी जानकारी मांगी गई थी। यहां पर बैंक अकाउंट में सिर्फ 15 डिजिट के नंबर ही स्वीकार्य हो रहे थे, इसलिए 16 डिजिट बैंक अकाउंट नंबर वाले छात्र आवेदन ही नहीं कर सके। इसके अलावा ज्यादातर छात्रों को अपना ब्लड ग्रुप और परिवार की आर्थिक आय की जानकारी ही नहीं थी, छात्र घर फोन कर इस संबंध में अपने परिजनों से जानकारी लेते नजर आए। इस तरह की समस्या का सामना कॉलेजों में छात्रों के लिए बैठी हेल्प डेस्क को भी करनी पड़ी। कॉलेज प्रबंधन के लोग उच्चतर शिक्षा विभाग को मेल कर समस्याओं से अवगत कराते रहे। कुछ समस्याओं का शाम तक समाधान हो गया, लेकिन कुछ का नहीं हो पाया।
कहीं कोर्स की डिटेल गायब तो कहीं कॉलेज
पहली बार हो रहे ऑनलाइन आवेदन में कई कमियां नजर आई। विभाग ने बेवसाइट पर सभी कॉलेज के डिटेल के साथ कॉलेजों में पढ़ाए जाने वाले सभी कोर्स और सीटों की जानकारी देने का दावा किया था। लेकिन पहले दिन ही विभाग का यह दावा झूठा होता नजर आए। डीएवी कॉलेज में बीकॉम में एडमीशन के लिए आवेदन करने पहुंचे छात्रों जब कोर्स डिटेल के स्टेप पर पहुंचे तो वहां उन्हें पांच कोर्स की जगह सिर्फ तीन कोर्स ही नजर आया, कॉलेज के सामने बीकॉम का ऑप्शन नहीं दिया गया था। इस संबंध में कॉलेज प्रशासन ने विभाग के अधिकारियों को मेल कर अवगम कराया, जिसके बाद कोर्स का ऑप्शन आ गया। इसी तरह कॉलेज की लिस्ट में दयाल सिंह कॉलेज का नाम तक नहीं था, जानकारी देने के बाद विभाग ने कॉलेज का नाम डाला।
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