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करनाल की पांच सौ इंडस्ट्रीज को नहीं मिल पाएगा सरकारी छूट का फायदा
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सरकार ने आज से उद्योगों को सशर्त संचालन की अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसमें दी गई शर्तें व नियमों को पूरा करना आसान नहीं है। इसमें पहले सरल केंद्र के माध्यम से आवेदन करने, श्रमिकों में सोशल डिस्टेंसिंग, मशीनों को डिस्टेंस पर शिफ्ट करने, मजदूरों की व्यवस्था, सैनिटाइजेशन, रॉ मैटेरियल की व्यवस्था आदि कई ऐसी जटिलताएं हैं, जो लॉकडाउन में संभव नहीं हो सकेंगी। यही कारण है कि करनाल जिले की करीब पांच सौ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों को इस छूट का लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। यानी, सरकारी छूट पर एक भी इंडस्ट्री शुरू नहीं की जा सकेगी।
महीनेभर से लॉक डाउन के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के अंतर्गत आने वाली करनाल जिले की करीब 500 औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। इसमें करनाल की एग्रो इंडस्ट्रीज (कृषि यंत्र उद्योग), जूता उद्योग आदि भी शामिल हैं। बात यदि एग्रो इंडस्ट्री की करें तो जिले में इससे जुड़ी करीब सौ इंडस्ट्री हैं। इनके लिए कच्चा लोहा, पेंट, हैरो डिस्क, नट बोल्ट आदि रॉ मैटेरियल गोविंदगढ़ (पंजाब), मुजफ्फर नगर (उत्तर प्रदेश), रायपुर (कोलकाता) आदि से आता है, जो लॉकडाउन में आना संभव नहीं है। इसके अलावा इन दिनों इंडस्ट्री में लेबर की सबसे बड़ी समस्या है। इसी तरह जूता उद्योग भी है, उसके लिए भी कच्चा माल नहीं मिल रहा है। यदि किसी तरह से इन इंड्रस्ट्रियों को शुरू भी किया जाए तो सरकारी शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें पूरा करना आसान नहीं है। सरकार ने यह चेतावनी दी है कि यदि कहीं शर्तों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित उद्योगपति के खिलाफ एफआईआर कराई जा सकती है। ऐसे में करनाल के उद्योगपतियों ने सामान्य तौर पर बाजार खुलने तक इंडस्ट्रीज को नहीं चलाने का फैसला किया है।
इंडस्ट्रियों से जुड़ी है एक लाख श्रमिकों की रोजी रोटी
करनाल जिले में स्थापित विभिन्न पांच सौ इंडस्ट्रियों में करीब एक लाख श्रमिक काम करते हैं, जिनकी रोजी रोटी इनके संचालन पर निर्भर करती है। इन उद्योगों में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक तो अपने घरों को लौट चुके हैं। कुछ उद्यमों में जरूर अभी थोड़ी बहुत लेबर है, लेकिन कारखाने बंद होने के कारण काम उनके पास नहीं है। कुल मिलाकर करनाल की इंडस्ट्री से जुड़े इन श्रमिकों की रोजीरोटी भी संकट में हैं।
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इंडस्ट्री तो हम शुरू करना चाहते ही हैं, क्योंकि इनके बंद होने से भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन जो शर्तें लॉकडाउन में इंडस्ट्री संचालन की हैं, वह काफी मुश्किल हैं। सबसे बड़ी मुश्किल तो इंडस्ट्रियों को रॉ मैटेरियल मिलने की है। जब कच्चा माल ही नहीं होगा तो उत्पादन कैसे हो सकेगा। सरकार किसी तरह की मदद करने को भी तैयार नहीं है।
-रूप नारायण चान्ना, संरक्षक-करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स एसोसिएशन।
श्रमिकों को कहां से लाएंगे, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग लाकर कार्य कैसे कराएंगे, उनके पास कैसे बनेंगे, मशीनों को दूर दूर कैसे शिफ्ट किया जा सकेगा। कई ऐसी समस्याएं हैं जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सरकार के आदेश पर बिना काम के भी श्रमिकों को वेतन व बिजली आदि का बिल भरना पड़ रहा है। हर रोज घाटा बढ़ रहा है लेकिन छूट में रखी गई शर्तों को पूरा करना संभव नहीं लग रहा, इसलिए अभी इंडस्ट्री संचालन नहीं हो पाएगा।
-अमित गुप्ता, राज्य उपाध्यक्ष हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स।
जूता उद्योग भी आम लोगों की जरूरतों से जुड़ा है, बड़ा कारोबार है। करनाल में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन की करीब पांच सौ इंडस्ट्री हैं, जिनसे सीधे तौर पर एक लाख श्रमिकों की रोजी रोटी जुड़ी है, लेकिन जब तक फुटकर विक्रय मार्केट नहीं खुलती, तब तक इंडस्ट्रीज को शुरू करने का कोई औचित्य ही नहीं है। मुझे नहीं लगता है कि करनाल में कोई एक भी इंडस्ट्री लॉकडाउन में छूट का लाभ लेकर शुरू हो पाएगी।
-शमी बंसल, मालिक-ग्रुप ऑफ लिबर्टी।
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महीनेभर से लॉक डाउन के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के अंतर्गत आने वाली करनाल जिले की करीब 500 औद्योगिक इकाइयां बंद हैं। इसमें करनाल की एग्रो इंडस्ट्रीज (कृषि यंत्र उद्योग), जूता उद्योग आदि भी शामिल हैं। बात यदि एग्रो इंडस्ट्री की करें तो जिले में इससे जुड़ी करीब सौ इंडस्ट्री हैं। इनके लिए कच्चा लोहा, पेंट, हैरो डिस्क, नट बोल्ट आदि रॉ मैटेरियल गोविंदगढ़ (पंजाब), मुजफ्फर नगर (उत्तर प्रदेश), रायपुर (कोलकाता) आदि से आता है, जो लॉकडाउन में आना संभव नहीं है। इसके अलावा इन दिनों इंडस्ट्री में लेबर की सबसे बड़ी समस्या है। इसी तरह जूता उद्योग भी है, उसके लिए भी कच्चा माल नहीं मिल रहा है। यदि किसी तरह से इन इंड्रस्ट्रियों को शुरू भी किया जाए तो सरकारी शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें पूरा करना आसान नहीं है। सरकार ने यह चेतावनी दी है कि यदि कहीं शर्तों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित उद्योगपति के खिलाफ एफआईआर कराई जा सकती है। ऐसे में करनाल के उद्योगपतियों ने सामान्य तौर पर बाजार खुलने तक इंडस्ट्रीज को नहीं चलाने का फैसला किया है।
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इंडस्ट्रियों से जुड़ी है एक लाख श्रमिकों की रोजी रोटी
करनाल जिले में स्थापित विभिन्न पांच सौ इंडस्ट्रियों में करीब एक लाख श्रमिक काम करते हैं, जिनकी रोजी रोटी इनके संचालन पर निर्भर करती है। इन उद्योगों में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक तो अपने घरों को लौट चुके हैं। कुछ उद्यमों में जरूर अभी थोड़ी बहुत लेबर है, लेकिन कारखाने बंद होने के कारण काम उनके पास नहीं है। कुल मिलाकर करनाल की इंडस्ट्री से जुड़े इन श्रमिकों की रोजीरोटी भी संकट में हैं।
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इंडस्ट्री तो हम शुरू करना चाहते ही हैं, क्योंकि इनके बंद होने से भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन जो शर्तें लॉकडाउन में इंडस्ट्री संचालन की हैं, वह काफी मुश्किल हैं। सबसे बड़ी मुश्किल तो इंडस्ट्रियों को रॉ मैटेरियल मिलने की है। जब कच्चा माल ही नहीं होगा तो उत्पादन कैसे हो सकेगा। सरकार किसी तरह की मदद करने को भी तैयार नहीं है।
-रूप नारायण चान्ना, संरक्षक-करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स एसोसिएशन।
श्रमिकों को कहां से लाएंगे, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग लाकर कार्य कैसे कराएंगे, उनके पास कैसे बनेंगे, मशीनों को दूर दूर कैसे शिफ्ट किया जा सकेगा। कई ऐसी समस्याएं हैं जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सरकार के आदेश पर बिना काम के भी श्रमिकों को वेतन व बिजली आदि का बिल भरना पड़ रहा है। हर रोज घाटा बढ़ रहा है लेकिन छूट में रखी गई शर्तों को पूरा करना संभव नहीं लग रहा, इसलिए अभी इंडस्ट्री संचालन नहीं हो पाएगा।
-अमित गुप्ता, राज्य उपाध्यक्ष हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स।
जूता उद्योग भी आम लोगों की जरूरतों से जुड़ा है, बड़ा कारोबार है। करनाल में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन की करीब पांच सौ इंडस्ट्री हैं, जिनसे सीधे तौर पर एक लाख श्रमिकों की रोजी रोटी जुड़ी है, लेकिन जब तक फुटकर विक्रय मार्केट नहीं खुलती, तब तक इंडस्ट्रीज को शुरू करने का कोई औचित्य ही नहीं है। मुझे नहीं लगता है कि करनाल में कोई एक भी इंडस्ट्री लॉकडाउन में छूट का लाभ लेकर शुरू हो पाएगी।
-शमी बंसल, मालिक-ग्रुप ऑफ लिबर्टी।