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Karnal News: नशा बढ़ने से हाई रिस्क श्रेणी में आए 39 गांव, इनमें 29 तीन माह में जुड़े
Fri, 21 Nov 2025 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 21 Nov 2025 02:05 AM IST
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मनोरोग ओपीडी में काउंसलिंग करते हुए डॉ. सौभाग्य कौशिक
काजल पांचाल
करनाल। नशा विरोधी मुहिम के बीच गांवों को नशामुक्त करने के प्रयास चल रहे हैं। इसके बावजूद जिले के 39 गांव हाई रिस्क श्रेणी में आ गए हैं। यहां या तो सरेआम नशे की बिक्री हो रही है या नशा करने वालों की संख्या बढ़ी है। हैरान करने वाली बात यह है कि 29 गांव हाई रिस्क श्रेणी में तीन माह में ही आए हैं। इससे पहले जिले में महज 10 गांव इस श्रेणी में थे। जिन्हें नशा मुक्त करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग प्रयास कर रहा था। अब ऐसे क्षेत्रों की संख्या चार गुना बढ़ने से नशा विरोधी मुहिम में काम करने वाली टीम की चुनौती भी बढ़ गई है।
जिन गांवों को हाई रिस्क में लिया गया है, इनमें बड़े से लेकर छोटे यानी डेढ़ से दो हजार आबादी के गांव भी शामिल हैं। 39 गांवों में करनाल शहर के नजदीक लगते बड़ा गांव के अलावा निसिंग और असंध खंड के ज्यादा गांव हैं। अब तक मिले केसों में लोग मेडिकल नशा, पेनकिलर, दवाइयों को इंजेक्ट करना, सुल्फा, बीड़ी, चिट्टा से लेकर स्मैक, अफीम, पारा, हेरोइन, गांजा, ई-सिगरेट और कूल लिप जैसे नशे कर रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो नागरिक अस्पताल में पांच वर्षो में 3500 के करीब लोग नशा छुड़ाने के लिए पहुंचे। इनमें से आधे से ज्यादा मरीज हाई रिस्क क्षेत्रों से आ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना 150 से 200 लोगों की ओपीडी होती है और इन हाई रिस्क गांवों से अधिकतर नए मरीज इलाज के लिए जुड़ रहे हैं। साथ ही पुराने मरीज भी उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में इस समय भी 15 से 20 लोग नशा मुक्ति केंद्र में रहकर इलाज करा रहे हैं।
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इधर, इन गांवों को हाई रिस्क श्रेणी से बाहर लाने से लेकर नशा मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष योजना भी बनाने में जुट गया है। अधिकारियों के अनुसार, 9 अक्तूबर से 60 दिनों के लिए नशा मुक्त अभियान के तहत गांवों के लिए नई पहल शुरू करते हुए पंचायती राज संस्थानों के साथ समन्वय करते हुए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में हाई रिस्क क्षेत्रों में विशेष मैपिंग की जा रही है और हर गांव में विशेष जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। संवाद
पांच क्षेत्र करनाल शहर के भी
जिला नागरिक अस्पताल से काउंसलर व डीडीसी हर्ष के अनुसार, जिले में हाई रिस्क श्रेणी में पांच क्षेत्र करनाल शहर के भी हैं। इनमें हांसी रोड, शिवाजी कॉलोनी, डेहाबसी, शिव कॉलोनी और रामनगर क्षेत्र शामिल हैं। इन्हें मिलाकर 44 क्षेत्र हो जाते हैं। यहां सबसे अधिक नशा किया जा रहा है। वहीं, पिछले चार साल से केवल 10 गांव ही इस श्रेणी में थे। पिछले तीन महीने में इन नई जगहों से भी नशे से जुड़े मामले सामने आए हैं।
ये क्षेत्र हाई रिस्क श्रेणी में आए
- तीन माह में हाई रिस्क बने : बड़ागांव, निगदू, खेड़ा, पधाना, अमृतकला, अमृतपुरा, कैरावाली, जलमाना, खरड़पुर, मंगलपुर, नलवीपुर, गगसीना, घोघड़ीपुर, खेड़ीमान सिंह, कलसौरा, गढ़ी बीरबल, समानाबाहू, बैरसाल, जयसिंहपुरा, कैमला, जैनपुर कैरबा, धानोखेड़ी, कमालपुर रोड़ान, बड़सत, नगला रोड़ान, चोरपुरा, कतलाहेड़ी, गढ़ीबरल, अलवाना डेरा के जबदी छपरा।
- 2022 से हाई रिक्स : टपराना, खेड़ी सर्फली, राहड़ा, बांसा, खांडा खेड़ी, सौंकड़ा, चंद्राव, डाचर, गोंदर और असंध। ये अब तक नशा मुक्त नहीं हो पाए हैं।
मानक : 100 मरीज होते ही घोषित होता है हाई रिस्क क्षेत्र
- जहां नशा करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही हो और कम होने का नाम न ले। नशा करने वालों का आंकड़ा 100 से ज्यादा हो जाए। इसके अलावा सरेआम बिक्री हो रही हो तो उसे हाई रिस्क श्रेणी में घोषित कर दिया जाता है। हर गांव में 20 के करीब मरीज सामान्य तौर पर होते हैं।
- पंचायत की ओर से मुनादी कराने के बाद दुकानों पर नशा बिक्री बंद हो जाए। नशेड़ी का फ्री इलाज करके उन्हें सामान्य बना दिया जाए और वे पूरी तरह से नशा छोड़ दें तो तो क्षेत्र हाई रिस्क श्रेणी से बाहर आता है।
स्वास्थ्य विभाग ने नए स्तर पर एक्शन प्लान तैयार किया है। हाई-रिस्क गांवों में विशेष निगरानी, सामुदायिक हस्तक्षेप, स्कूल-कॉलेज जागरूकता कार्यक्रम और डिटॉक्स काउंसलिंग किए जा रहे हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, व्यापार और उपभोग को नियंत्रित करने वाले कानून कोटपा एक्ट सही से लागू हो रहा है।
- डॉ. सौभाग्य कौशिक, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल
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करनाल। नशा विरोधी मुहिम के बीच गांवों को नशामुक्त करने के प्रयास चल रहे हैं। इसके बावजूद जिले के 39 गांव हाई रिस्क श्रेणी में आ गए हैं। यहां या तो सरेआम नशे की बिक्री हो रही है या नशा करने वालों की संख्या बढ़ी है। हैरान करने वाली बात यह है कि 29 गांव हाई रिस्क श्रेणी में तीन माह में ही आए हैं। इससे पहले जिले में महज 10 गांव इस श्रेणी में थे। जिन्हें नशा मुक्त करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग प्रयास कर रहा था। अब ऐसे क्षेत्रों की संख्या चार गुना बढ़ने से नशा विरोधी मुहिम में काम करने वाली टीम की चुनौती भी बढ़ गई है।
जिन गांवों को हाई रिस्क में लिया गया है, इनमें बड़े से लेकर छोटे यानी डेढ़ से दो हजार आबादी के गांव भी शामिल हैं। 39 गांवों में करनाल शहर के नजदीक लगते बड़ा गांव के अलावा निसिंग और असंध खंड के ज्यादा गांव हैं। अब तक मिले केसों में लोग मेडिकल नशा, पेनकिलर, दवाइयों को इंजेक्ट करना, सुल्फा, बीड़ी, चिट्टा से लेकर स्मैक, अफीम, पारा, हेरोइन, गांजा, ई-सिगरेट और कूल लिप जैसे नशे कर रहे हैं।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो नागरिक अस्पताल में पांच वर्षो में 3500 के करीब लोग नशा छुड़ाने के लिए पहुंचे। इनमें से आधे से ज्यादा मरीज हाई रिस्क क्षेत्रों से आ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना 150 से 200 लोगों की ओपीडी होती है और इन हाई रिस्क गांवों से अधिकतर नए मरीज इलाज के लिए जुड़ रहे हैं। साथ ही पुराने मरीज भी उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में इस समय भी 15 से 20 लोग नशा मुक्ति केंद्र में रहकर इलाज करा रहे हैं।
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इधर, इन गांवों को हाई रिस्क श्रेणी से बाहर लाने से लेकर नशा मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष योजना भी बनाने में जुट गया है। अधिकारियों के अनुसार, 9 अक्तूबर से 60 दिनों के लिए नशा मुक्त अभियान के तहत गांवों के लिए नई पहल शुरू करते हुए पंचायती राज संस्थानों के साथ समन्वय करते हुए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में हाई रिस्क क्षेत्रों में विशेष मैपिंग की जा रही है और हर गांव में विशेष जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। संवाद
पांच क्षेत्र करनाल शहर के भी
जिला नागरिक अस्पताल से काउंसलर व डीडीसी हर्ष के अनुसार, जिले में हाई रिस्क श्रेणी में पांच क्षेत्र करनाल शहर के भी हैं। इनमें हांसी रोड, शिवाजी कॉलोनी, डेहाबसी, शिव कॉलोनी और रामनगर क्षेत्र शामिल हैं। इन्हें मिलाकर 44 क्षेत्र हो जाते हैं। यहां सबसे अधिक नशा किया जा रहा है। वहीं, पिछले चार साल से केवल 10 गांव ही इस श्रेणी में थे। पिछले तीन महीने में इन नई जगहों से भी नशे से जुड़े मामले सामने आए हैं।
ये क्षेत्र हाई रिस्क श्रेणी में आए
- तीन माह में हाई रिस्क बने : बड़ागांव, निगदू, खेड़ा, पधाना, अमृतकला, अमृतपुरा, कैरावाली, जलमाना, खरड़पुर, मंगलपुर, नलवीपुर, गगसीना, घोघड़ीपुर, खेड़ीमान सिंह, कलसौरा, गढ़ी बीरबल, समानाबाहू, बैरसाल, जयसिंहपुरा, कैमला, जैनपुर कैरबा, धानोखेड़ी, कमालपुर रोड़ान, बड़सत, नगला रोड़ान, चोरपुरा, कतलाहेड़ी, गढ़ीबरल, अलवाना डेरा के जबदी छपरा।
- 2022 से हाई रिक्स : टपराना, खेड़ी सर्फली, राहड़ा, बांसा, खांडा खेड़ी, सौंकड़ा, चंद्राव, डाचर, गोंदर और असंध। ये अब तक नशा मुक्त नहीं हो पाए हैं।
मानक : 100 मरीज होते ही घोषित होता है हाई रिस्क क्षेत्र
- जहां नशा करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही हो और कम होने का नाम न ले। नशा करने वालों का आंकड़ा 100 से ज्यादा हो जाए। इसके अलावा सरेआम बिक्री हो रही हो तो उसे हाई रिस्क श्रेणी में घोषित कर दिया जाता है। हर गांव में 20 के करीब मरीज सामान्य तौर पर होते हैं।
- पंचायत की ओर से मुनादी कराने के बाद दुकानों पर नशा बिक्री बंद हो जाए। नशेड़ी का फ्री इलाज करके उन्हें सामान्य बना दिया जाए और वे पूरी तरह से नशा छोड़ दें तो तो क्षेत्र हाई रिस्क श्रेणी से बाहर आता है।
स्वास्थ्य विभाग ने नए स्तर पर एक्शन प्लान तैयार किया है। हाई-रिस्क गांवों में विशेष निगरानी, सामुदायिक हस्तक्षेप, स्कूल-कॉलेज जागरूकता कार्यक्रम और डिटॉक्स काउंसलिंग किए जा रहे हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, व्यापार और उपभोग को नियंत्रित करने वाले कानून कोटपा एक्ट सही से लागू हो रहा है।
- डॉ. सौभाग्य कौशिक, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल