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1962 भारत-चीन युद्ध में कर्णनगरी के 37 जवानों ने दी थी शहादत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 02:06 AM IST
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37 soldiers of karnal gave martyrdom in china war in 1962
हमारे देश की सीमाओं से जब-जब दुश्मनों ने छेड़छाड़ करने की कोशिश की तब - तब हमारी धरती के रणबांकुरों ने करारा जवाब देकर उनके छक्के छुड़ाए । इनमें से एक महाभारतकाल के वीर योद्धा राजा कर्ण की नगरी करनाल जिला भी है। वीरों की इस धरती पर जहां भगवान श्रीराम की सेना को लव-कुश ने बंदी बना लिया था, वहीं महाभारत के समय कौरवों की तरफ से लड़े राजा कर्ण का यहां सैन्य पड़ाव था। मुगलों को यहां के वीरों ने कई युद्धों में परास्त किया। वहीं, 1962 में चीन से युद्ध करते हुए करनाल जिले के 37 जवान शहीद हुए थे, इनमें से एक ही दिन में 11 जवान तो सर्फअली गांव के रहने वाले थे।
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पानीपत और तरावड़ी की लड़ाई इतिहास में इसका साक्ष्य बयां करती हैं। इसी तरह आजादी के बाद 1962 में भी भारत-चीन युद्ध में करनाल जिले के 37 रणबांकुरों ने अपने देश की रक्षा के लिए वीरगति प्राप्त की थी। इनमें तीन सैन्य अधिकारी और 34 जवान थे। हरियाणा गठन से पहले संयुक्त पंजाब में करनाल जनपद के अंतर्गत पानीपत, कैथल, कुरुक्षेत्र भी आते थे, वर्तमान संदर्भ में इनके जिले बनने के कारण उन वीर योद्धाओं के कुछ गांव दूसरे जिलों में शामिल हो गए हैं। असंध हल्के के खेड़ी सर्फअली गांव के तो 11 जवान उस युद्ध में 21 नवंबर 1962 को एक दिन में शहीद हो गए थे।
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तीन सैन्य अधिकारियों ने भी पाई थी वीरगति
1. लेफ्टिनेंट विक्रम सिंह, 2. सेकेंड लेफ्टिनेंट आरपीएस कालड़ा, 3. सेकेंड लेफ्टिनेंट आरपीएस चौधरी, 4. हवलदार मुख्त्यार सिंह (पिहोवा) 5. हवलदार हरनरिंजन सिंह (खेड़ी सर्फअली), 6. नायक हरबंस सिंह (खेड़ी सर्फअली) 7. नायक निशान सिंह (खेड़ी सर्फअली), 8. लांस नायक प्रीतम सिंह (बहौली), 9. लांस नायक देसराज (पानीपत), 10. लांस नायक भूला राम (नारायणा) 11. लांस नायक प्रीतम सिंह (खेड़ी सर्फअली), 12. लांस नायक लाभ सिंह (खेड़ी सर्फअली) 13. सिपाही अजीत सिंह (खेड़ी सर्फअली) 14. सिपाही विरसा सिंह (मंडवाल) 15. ग्रिनेडियर किशोरी लाल (छिछड़ाना) 16. जीडीएसएम पृथ्वी सिंह (पिंडारसी) 17. सिपाही पंथी (पट्टी कल्याणा) 18. सैफट मलकीयत सिंह (खेड़ी सर्फअली) 19. सिपाही मठिया सिंह (भूना) 20. सिपाही पूर्ण सिंह (खेड़ी सर्फअली) 21. लांस नायक मक्खन सिंह (मंडवाल) 22. सिपाही अमरीक सिंह (मंडवाल) 23. सिपाही अमरीक सिंह (खेड़ी सर्फअली) 24. सिपाही त्रिलोक सिंह (निसिंग) 25. सिपाही बलदेव सिंह (कैथल) 26. लांस नायक गजे सिंह (ट्योंठा) 27. सिपाही जिले सिंह (चौडक़) 28. स्वीपर मनसा राम (मोहना) 29. सिपाही बलबीर सिंह (डबरकी) 30. सिपाही मौता सिंह (नीलोखेड़ी) 31. सिपाही रूढ़ सिंह (शरीफगढ़) 32. सिपाही निशान सिंह (बखतला-थानेश्वर) 33. सिपाही अर्जन सिंह 34. स्वीपर सरजू (मुंदड़ी) 35. स्वीपर संतलाल (जौरासी) 36. सिपाही ज्ञान सिंह (पट्टी कल्याण) 37. सिपाही मेला सिंह (जौरासी कलां)
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तब वहीं पर होता था अंतिम संस्कार
1962 में चीन के साथ हुई लड़ाई में करनाल जनपद के तीन सैन्य अधिकारी व 34 जवानों ने शहादत दी थी। उस वक्त जंग में शहीद होने पर पार्थिव शरीर का वहीं पर राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया जाता था। तब हमारे सैनिकों के पास हथियारों की कमी थी। आज स्थितियां कुछ और हैं। अब हमारी सेनाएं सशक्त हैं। चीन को उसी के घर में घुसकर धूल चटाने को पूर्व सैनिक भी तैयार बैठे हैं।
-आरएस चौहान, अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संगठन राष्ट्रीय सैनिक संघ (मोदी सैन्य संगठन)
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