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पिछले 15 साल में 3.33 करोड़ किए खर्च, फिर भी डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट बंद
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। 15 साल बीतने के बाद भी नगर निगम डेयरी को शहर से बाहर शिफ्ट नहीं कर पाया है। शहर के बीच में ये डेयरी शहर की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। इसकी शिफ्टिंग को लेकर नगर निगम अभी तक करीब 3.33 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है लेकिन निगम एक भी डेयरी को शहर से बाहर नहीं कर पाया। अब तो डेयरी शिफ्टिंग के प्रोजेक्ट को निगम ने ठंडे बस्ते में डाल दिया हैै। निगम के अधिकारियों का कहना है कि अब तो यह प्रोजेक्ट पार्षदों की हाउस की मीटिंग में ही खुलेेगा। दिलचस्प बात तो यह है कि 3.33 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी निगम को अभी तक यही पता नहीं है कि शहर में कितनी डेयरियां हैं और उनमें कितने पशु हैं। ऐसा नहीं है इसके निगम ने सर्व नहीं किया हो। इसके लिए नगर निगम ने दो बार सर्वे किया है। शहर में डेयरी की समस्या से शहरवासी परेशान हो रहे हैं लेकिन निगम को इसकी कोई चिंता नहीं है
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2003 में हुई थी डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा
2003 में शहरी नगर निकाय मंत्री ने पशु डेयरियों को शहर से शिफ्ट करने की घोषणा की थी। इसके बाद निगम ने शहर से बाहर पिंगली रोड पर डेयरी शिफ्टिंग के लिए जगह देखी और फिर 131 बीघा जमीन 1.09 करोड़ रुपये में खरीदी और वहां प्लाट काटे। इसके बाद निगम ने डेयरी संचालकों से आवेदन मांगे और 37 प्लॉटों को अलॉट करने की तैयारी की लेकिन डेयरी संचालकों ने पशुओं की संख्या गलत दे दी और उस ड्रा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद 27 मार्च हाउस की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि एक कमेटी बनाई जाए और संच ालकों से आवेदन लेकर उनकी फिजिकल वेरिफीकेशन कराई जाए। लेकिन अभी तक निगम ने कमेटी ही नहीं बनाई है।
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डेयरी शिफ्टिंग को लेकर निगम गंभीर नहीं है (फोटो-21)
बसंत राणा पबाना ने कहा कि डेयरी शिफ्टिंग को लेकर नगर निगम कभी गंभीर ही नहीं हुआ यह निगम के अधिकारी डेयरी शिफ्टिंग को लेकर गंभीर होता तो इस प्रोजेक्ट को 15 साल नहीं बीतते। डेयरी के कारण शहरवासियों को बहुत परेशानी हो रही है। जिन गलियां में डेयरी है वहां के लोगों का जीना दुर्लभ हो गया है। गंदगी के कारण मच्छर-मक्खियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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डेयरी शिफ्ट होंगी, तभी होगा शहर स्वच्छ और स्वस्थ (फोटो-20)
देवेंद्र सचदेवा ने कहा कि जब तक डेयरी शहर के बीचों बीच हैं तब तक शहर ना तो स्वच्छ तो सकता है और ना ही स्वस्थ। डेयरियों के कारण शहर में गदंगी ही गदंगी है। गोबर के कारण सीवरेज बंद हो जाते हैं और तभी थोड़ी सी बरसात में ही शहर पानी में डूब जाता है। डेयरी शिफ्टिंग में नगर निगम की लापरवाही सबसे ज्यादा रही है।
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डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट पर 3.33 करोड़ रुपये हो चुके हैं खर्च।
कार्य - लागत 131 बीघा जमीन - 1.09 करोड़
रजिस्ट्रेशन फीस - 6.59 लाख
सीवरेज व सड़कों पर - 52.85 लाख
सिविल वर्क पर - 43.19 लाख
बिजली निगम को दिए - 10.10 लाख
इंटरलॉकिंग टाइल - 93.44 लाख
दो कमरे - 17.78 लाख
कुल - 3.33 करोड़
नोट : यह निगम से प्राप्त आंकड़े हैं।
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प्लॉट के लिए ये थी रखी थी निगम ने शर्त व नियम
पिंगली गांव में प्लॉट के लिए आवेदन के साथ डेयरी संचालकों को 30 हजार रुपये की धरोहर राशि भी जमा करानी थी। इसके बिना आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। प्लॉट की 20 फीसदी कीमत अलॉटमेंट लेटर जारी होने के 30 दिन के अंदर देने होंगे। जबकि बाकी की 80 प्रतिशत राशि 10 छमाही किस्तों चुकानी होगी। समय पर किस्त नहीं दी तो 12 प्रतिशत ब्याज अलग से देना होगा। लेकिन अब इन शर्तों व नियमों में बदलाव भी हो सकता है।
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डेयरी शिफ्टिंग का प्रोजेक्ट अभी बंद है, पार्षदों की पहली हाउस की मीटिंग में ही अब इस प्रोजेक्ट को खोला जाएगा तभी आगामी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पिछले पांच साल पहले शिफ्टिंग को लेकर लगातार प्रयास किए गए। कुछ डेयरी धारकों को प्लाट भी अलाट किए गए थे।
-बल सिंह, सेक्रेटरी, नगर निगम, करनाल।
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करनाल। 15 साल बीतने के बाद भी नगर निगम डेयरी को शहर से बाहर शिफ्ट नहीं कर पाया है। शहर के बीच में ये डेयरी शहर की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। इसकी शिफ्टिंग को लेकर नगर निगम अभी तक करीब 3.33 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है लेकिन निगम एक भी डेयरी को शहर से बाहर नहीं कर पाया। अब तो डेयरी शिफ्टिंग के प्रोजेक्ट को निगम ने ठंडे बस्ते में डाल दिया हैै। निगम के अधिकारियों का कहना है कि अब तो यह प्रोजेक्ट पार्षदों की हाउस की मीटिंग में ही खुलेेगा। दिलचस्प बात तो यह है कि 3.33 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी निगम को अभी तक यही पता नहीं है कि शहर में कितनी डेयरियां हैं और उनमें कितने पशु हैं। ऐसा नहीं है इसके निगम ने सर्व नहीं किया हो। इसके लिए नगर निगम ने दो बार सर्वे किया है। शहर में डेयरी की समस्या से शहरवासी परेशान हो रहे हैं लेकिन निगम को इसकी कोई चिंता नहीं है
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2003 में हुई थी डेयरी शिफ्टिंग की घोषणा
2003 में शहरी नगर निकाय मंत्री ने पशु डेयरियों को शहर से शिफ्ट करने की घोषणा की थी। इसके बाद निगम ने शहर से बाहर पिंगली रोड पर डेयरी शिफ्टिंग के लिए जगह देखी और फिर 131 बीघा जमीन 1.09 करोड़ रुपये में खरीदी और वहां प्लाट काटे। इसके बाद निगम ने डेयरी संचालकों से आवेदन मांगे और 37 प्लॉटों को अलॉट करने की तैयारी की लेकिन डेयरी संचालकों ने पशुओं की संख्या गलत दे दी और उस ड्रा को रद्द कर दिया गया। इसके बाद 27 मार्च हाउस की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि एक कमेटी बनाई जाए और संच ालकों से आवेदन लेकर उनकी फिजिकल वेरिफीकेशन कराई जाए। लेकिन अभी तक निगम ने कमेटी ही नहीं बनाई है।
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डेयरी शिफ्टिंग को लेकर निगम गंभीर नहीं है (फोटो-21)
बसंत राणा पबाना ने कहा कि डेयरी शिफ्टिंग को लेकर नगर निगम कभी गंभीर ही नहीं हुआ यह निगम के अधिकारी डेयरी शिफ्टिंग को लेकर गंभीर होता तो इस प्रोजेक्ट को 15 साल नहीं बीतते। डेयरी के कारण शहरवासियों को बहुत परेशानी हो रही है। जिन गलियां में डेयरी है वहां के लोगों का जीना दुर्लभ हो गया है। गंदगी के कारण मच्छर-मक्खियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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डेयरी शिफ्ट होंगी, तभी होगा शहर स्वच्छ और स्वस्थ (फोटो-20)
देवेंद्र सचदेवा ने कहा कि जब तक डेयरी शहर के बीचों बीच हैं तब तक शहर ना तो स्वच्छ तो सकता है और ना ही स्वस्थ। डेयरियों के कारण शहर में गदंगी ही गदंगी है। गोबर के कारण सीवरेज बंद हो जाते हैं और तभी थोड़ी सी बरसात में ही शहर पानी में डूब जाता है। डेयरी शिफ्टिंग में नगर निगम की लापरवाही सबसे ज्यादा रही है।
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डेयरी शिफ्टिंग प्रोजेक्ट पर 3.33 करोड़ रुपये हो चुके हैं खर्च।
कार्य - लागत 131 बीघा जमीन - 1.09 करोड़
रजिस्ट्रेशन फीस - 6.59 लाख
सीवरेज व सड़कों पर - 52.85 लाख
सिविल वर्क पर - 43.19 लाख
बिजली निगम को दिए - 10.10 लाख
इंटरलॉकिंग टाइल - 93.44 लाख
दो कमरे - 17.78 लाख
कुल - 3.33 करोड़
नोट : यह निगम से प्राप्त आंकड़े हैं।
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प्लॉट के लिए ये थी रखी थी निगम ने शर्त व नियम
पिंगली गांव में प्लॉट के लिए आवेदन के साथ डेयरी संचालकों को 30 हजार रुपये की धरोहर राशि भी जमा करानी थी। इसके बिना आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। प्लॉट की 20 फीसदी कीमत अलॉटमेंट लेटर जारी होने के 30 दिन के अंदर देने होंगे। जबकि बाकी की 80 प्रतिशत राशि 10 छमाही किस्तों चुकानी होगी। समय पर किस्त नहीं दी तो 12 प्रतिशत ब्याज अलग से देना होगा। लेकिन अब इन शर्तों व नियमों में बदलाव भी हो सकता है।
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डेयरी शिफ्टिंग का प्रोजेक्ट अभी बंद है, पार्षदों की पहली हाउस की मीटिंग में ही अब इस प्रोजेक्ट को खोला जाएगा तभी आगामी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पिछले पांच साल पहले शिफ्टिंग को लेकर लगातार प्रयास किए गए। कुछ डेयरी धारकों को प्लाट भी अलाट किए गए थे।
-बल सिंह, सेक्रेटरी, नगर निगम, करनाल।