हरियाणा: 30 हजार आढ़तियों को 500 करोड़ रुपये की आढ़त-मजदूरी का इंतजार, आढ़ती एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने सीएम को पत्र लिखकर मार्केटिंग बोर्ड के नियमों में बदलाव की भी मांग की है।
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हरियाणा राज्य की अनाज मंडियों में धान खरीद से जुड़े करीब 30 हजार आढ़तियों को खरीदे गए करीब 56 लाख मीट्रिक टन धान की आढ़त और मजदूरी का इंतजार है, जो करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक है। इसे लेकर हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
इसमें कहा गया है कि आढ़त व मजदूरी नहीं मिलने से आढ़ती बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। मार्केटिंग बोर्ड के नियमों को भी अव्यवहारिक बताते हुए उनमें बदलाव करते हुए सरलीकरण किए जाने की मांग की गई है।
धान की सरकारी खरीद 15 नवंबर-2021 को खत्म हो गई थी। विभागीय आकंड़ों के मुताबिक करीब 56 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद राज्यभर की अनाज मंडियों में की गई थी। हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के राज्य प्रधान अशोक गुप्ता ने बताया कि नियमानुसार आढ़तियों को उनकी आढ़त व मजदूरी का भुगतान 30 नवंबर तक हो जाना चाहिए था, लेकिन खरीद बंद होने के डेढ़ महीने बाद भी न तो आढ़तियों को उनकी आढ़त (दामी) दी गई है और न ही मजदूरों की मजदूरी दी गई है। आढ़तियों को गेहूं खरीद की तैयारी भी करनी है, लेबर को फिर बुलाना है। लेकिन पिछला भुगतान नहीं मिलने से दिक्कत आ सकती है।
सभी जानते हैं कि मंडियों में जितने भी मजदूर हैं, उनमें अधिकांश अन्य राज्यों के होते हैं, वह आढ़तियों पर विश्वास करके ही आते हैं। खरीद बंद होने के बाद वह घर लौटते हैं तो आढ़तियों को उन्हें अपने पास से ही उनकी मजदूरी का भुगतान करना पड़ता है। तभी वह दोबारा आते हैं। 56 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर आढ़त करीब 258 करोड़ रुपये बनती है और 250 करोड़ रुपये की मजदूरी भी बनती है। कुल मिलाकर करीब 508 करोड़ रुपये आढ़तियों का सरकार पर बकाया है। - विकास सिंघल, प्रदेश महासचिव, हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
आढ़तियों के पास अब कोई दूसरा कारोबार तो है नहीं, ऐसे में समय पर आढ़त व मजदूरी नहीं मिलेगी तो उनका खर्च कैसे चलेगा। इसके अलावा भी कई अन्य मांगे हैं, कुछ मार्केटिंग बोर्ड के नियमों में विसंगतियां हैं, उन्हें दूर करके नियमों का सरलीकरण किया जाए, ताकि आढ़ती उत्साह के साथ कार्य पाएं। किसानों का जुड़ाव भी लगातार मंडियों से बना रहे और आढ़तियों का भी। अन्यथा मंडियां लगातार कमजोर होती जाएंगी और एक दिन खत्म हो जाएंगी। सीधे भुगतान से आढ़ती व किसान का रिश्ता भी टूट रहा है। -रजनीश चौधरी स्टेट चेयरमैन हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
यह हैं प्रमुख मांगे
- आढ़तियों को धान खरीद की आढ़त और लेबर तत्काल दी जानी चाहिए
- सभी फसलें आढ़तियों के माध्यम से ही खरीदी जाएं, आढ़त 2.5 प्रतिशत दी जाए।
- सीमांत किसानों को ई-खरीद पोर्टल पर पंजीकृत कर उनकी फसलें खरीदी जाएं।
- आढ़त की फर्म का एक लाइसेंस प्रदेश की सभी मंडियों में मान्य हो।
- मार्केट कमेटी के लाइसेंस की अवधि जीएसटी की तरह असीमित हो।
- मार्केट कमेटी की लाइसेंस फीस एकमुश्त दो या तीन हजार रुपये होनी चाहिए
- मंडी में दुकान नहीं बना पाने की स्थिति में भारी जुर्माना नहीं लगाया जाए।
- मंडियों के अधिकृत नक्शे से अतिरिक्त बेसमेंट या पहली दूसरी मंजिल अधिकृत की जाए।
- मंडियों में आढ़तियों को दुकानों व बूथों में तीन या चार लाइसेंस की इजाजत होनी चाहिए।
- मंडियों की दुकानों में आढ़त के अतिरिक्त अन्य व्यापार करने की भी इजाजत दी जाए।