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करनाल व इंद्री के बाद अब जिले के सभी तहसीलों में जमाबंदी का डाटा किया जाएगा आनलाइन
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। करनाल और इंद्री तहसील द्वारा जमाबंदी के रिकार्ड को आनलाइन करने के बाद अब जिले के शेष 6 तहसीलों और उपतहसीलों में भी जमाबंदी का डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए टीम काम कर रही है और लगातार डाटा अपलोड किया जा रहा है। जमाबंदी को लेकर इस जिले में किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए प्रदेश की वित्तायुक्त केशनी आनंद अरोड़ा ने उपायुक्त, एनआईसी के डीआईओ और एडीआईओ और राजस्व अधिकारियों की टीम की को बधाई दी है।
बता दें कि करनाल जिले के 434 गांव में से 424 गांव की जमाबंदियों का डाटा वेब हैलरिस में दर्ज है। एक गांव की जमाबंदी की प्रक्रिया प्रेषण में है, जबकि 9 गांवों की जमाबंदी अंडर कंसोलीडेशन यानी चकबंदी के अधीन है। जिला राजस्व अधिकारी राजबीर धीमान के अनुसार, डीसी डॉ. आदित्य दहिया के मार्गदर्शन में इंद्री और करनाल यानी दो तहसीलों की जमाबंदी का रिकॉर्ड वेब पोर्टल पर ऑनलाइन हो चुके हैं। इसी प्रकार, 6 अन्य तहसीलों और उप तहसीलों जिनमें घरौंडा, असंध, नीलोखेड़ी, निगदू, बल्ला व निसिंग की जमाबंदी का डाटा को अपलोड करने का काम जल्द ही किया जाएगा। जिला राजस्व अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में स्थित स्टेट डाटा सेंटर की वेब हैलरिस में दर्ज रिकॉर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि कोई व्यक्ति जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करना चाहे, तो वह संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि हर 5 साल में जमाबंदी नई बनती है, लेकिन हर साल 20 प्रतिशत नई जमाबंदियां ड्यू हो जाती हैं।
सरल केंद्र पर हो रही रोजाना 70 रजिस्ट्री
दूसरी ओर करनाल के लघु सचिवालय स्थित तहसील कार्यालय में सरल केंद्र में अब नागरिकों को पहले से बेहतर सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। अब यहां 7 काउंटर हैं, जिनमें 3 रजिस्ट्रेशन यानी रजिस्ट्री के लिए, 1 जमाबंदी की नकल लेने, 1 इंतकाल, 1 आडरहन (जिन जमीनों पर लोन लिया हो) तथा 1 सीएम विंडो या हेल्प डेस्क बनाया गया है। एक कार्य दिवस में सरल केंद्र पर करीब 70 व्यक्ति अपनी रजिस्ट्री, नकल, इंतकाल व इंद्राज इत्यादि के लिए आते हैं। रजिस्ट्री उसी दिन हो जाती है, जबकि इंतकाल का समय हालांकि करीब 3 सप्ताह है, लेकिन कम समय में ही इंतकाल भी कर दिया जाता है और व्यक्ति विशेष संबंधित पटवारी से उसे प्राप्त कर सकता है। इंतकाल के कार्य के लिए लोगों को पहले तहसील के चक्कर काटने पड़ते थे। किसी व्यक्ति की रजिस्ट्री गुम हो जाए, तो उसका नंबर व डेट बताकर उसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है।
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केंद्र में हैं ये सुविधाएं
सुविधाओं के नाम पर सरल केंद्र में पर्याप्त केबिन, रोशनी की व्यवस्था, एलईडी और जनता के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान यानी प्रतीक्षालय उपलब्ध करवाया गया है। किसका नंबर कब आएगा, उसकी सूचना के लिए इसमें ध्वनि व्यवस्था भी की गई है। सरल केंद्र में इस तरह की सुविधाओं से सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करके उसे समाप्त किया है और बिचौलियों के दिन भी अब लद गए हैं। गौरतलब है कि जमाबंदी के रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने में सबसे पहला प्रयोग वर्ष 2016 में करनाल जिला की इंद्री तहसील से शुरू किया गया था, जो अत्यंत सफल रहा और अब यह प्रोजेक्ट प्रदेश में जिला व तहसील स्तर पर शुरू हो गया है।
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करनाल। करनाल और इंद्री तहसील द्वारा जमाबंदी के रिकार्ड को आनलाइन करने के बाद अब जिले के शेष 6 तहसीलों और उपतहसीलों में भी जमाबंदी का डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए टीम काम कर रही है और लगातार डाटा अपलोड किया जा रहा है। जमाबंदी को लेकर इस जिले में किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए प्रदेश की वित्तायुक्त केशनी आनंद अरोड़ा ने उपायुक्त, एनआईसी के डीआईओ और एडीआईओ और राजस्व अधिकारियों की टीम की को बधाई दी है।
बता दें कि करनाल जिले के 434 गांव में से 424 गांव की जमाबंदियों का डाटा वेब हैलरिस में दर्ज है। एक गांव की जमाबंदी की प्रक्रिया प्रेषण में है, जबकि 9 गांवों की जमाबंदी अंडर कंसोलीडेशन यानी चकबंदी के अधीन है। जिला राजस्व अधिकारी राजबीर धीमान के अनुसार, डीसी डॉ. आदित्य दहिया के मार्गदर्शन में इंद्री और करनाल यानी दो तहसीलों की जमाबंदी का रिकॉर्ड वेब पोर्टल पर ऑनलाइन हो चुके हैं। इसी प्रकार, 6 अन्य तहसीलों और उप तहसीलों जिनमें घरौंडा, असंध, नीलोखेड़ी, निगदू, बल्ला व निसिंग की जमाबंदी का डाटा को अपलोड करने का काम जल्द ही किया जाएगा। जिला राजस्व अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में स्थित स्टेट डाटा सेंटर की वेब हैलरिस में दर्ज रिकॉर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि कोई व्यक्ति जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करना चाहे, तो वह संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि हर 5 साल में जमाबंदी नई बनती है, लेकिन हर साल 20 प्रतिशत नई जमाबंदियां ड्यू हो जाती हैं।
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सरल केंद्र पर हो रही रोजाना 70 रजिस्ट्री
दूसरी ओर करनाल के लघु सचिवालय स्थित तहसील कार्यालय में सरल केंद्र में अब नागरिकों को पहले से बेहतर सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। अब यहां 7 काउंटर हैं, जिनमें 3 रजिस्ट्रेशन यानी रजिस्ट्री के लिए, 1 जमाबंदी की नकल लेने, 1 इंतकाल, 1 आडरहन (जिन जमीनों पर लोन लिया हो) तथा 1 सीएम विंडो या हेल्प डेस्क बनाया गया है। एक कार्य दिवस में सरल केंद्र पर करीब 70 व्यक्ति अपनी रजिस्ट्री, नकल, इंतकाल व इंद्राज इत्यादि के लिए आते हैं। रजिस्ट्री उसी दिन हो जाती है, जबकि इंतकाल का समय हालांकि करीब 3 सप्ताह है, लेकिन कम समय में ही इंतकाल भी कर दिया जाता है और व्यक्ति विशेष संबंधित पटवारी से उसे प्राप्त कर सकता है। इंतकाल के कार्य के लिए लोगों को पहले तहसील के चक्कर काटने पड़ते थे। किसी व्यक्ति की रजिस्ट्री गुम हो जाए, तो उसका नंबर व डेट बताकर उसे ऑनलाइन निकलवाया जा सकता है।
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केंद्र में हैं ये सुविधाएं
सुविधाओं के नाम पर सरल केंद्र में पर्याप्त केबिन, रोशनी की व्यवस्था, एलईडी और जनता के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान यानी प्रतीक्षालय उपलब्ध करवाया गया है। किसका नंबर कब आएगा, उसकी सूचना के लिए इसमें ध्वनि व्यवस्था भी की गई है। सरल केंद्र में इस तरह की सुविधाओं से सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करके उसे समाप्त किया है और बिचौलियों के दिन भी अब लद गए हैं। गौरतलब है कि जमाबंदी के रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने में सबसे पहला प्रयोग वर्ष 2016 में करनाल जिला की इंद्री तहसील से शुरू किया गया था, जो अत्यंत सफल रहा और अब यह प्रोजेक्ट प्रदेश में जिला व तहसील स्तर पर शुरू हो गया है।