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लीड प्रस्तावित- फार्म-6 के नियमों के बदलाव के विरोध में अभिभावक एकजुट
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:43 PM IST
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फार्म-6 के नियमों के बदलाव के विरोध में अभिभावक एकजुट
- अभिभावकों ने कहा, सरकार नियम बदलाव का पत्र वापस ले, नहीं तो हम राज्यस्तरीय आंदोलन कर करेंगे अमरण अनशन, सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट भी जाएंगे अभिभावक
फोटो संख्या-2,3
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। फार्म-6 के नियमों में बदलाव कर निजी स्कूलों को फीस वसूली की छूट देने के विरोध में अभिभावक एकबार फिर से एकजुट होने लगे हैं। इस बार राज्य सरकार पर निजी स्कूलों को लूट की छूट देने का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने आमरण अनशन और आंदोलन की चेतावनी दी है। अभिभावक एकता मंच के बैनर तले मॉडल टाउन स्थित एक होटल में रविवार को आयोजित एक बैठक में राज्य भर से आए सैकड़ों अभिभावकों ने आगे की रणनीति तैयार की। बैठक में राज्य सरकार और शिक्षा अधिकारियों पर कई संगीन आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारी नेताओं के कहने पर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर नियमों में मन मुताबिक बदलाव कर रहे हैं।
इसका ताजा उदाहरण है शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास द्वारा फार्म-6 के संबंध में जारी पत्र। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर स्कूल संचालकों को यह छूट दी गई है कि वे फार्म-6 में जो भी फीस व फंड लिख देंगे, उन्हें वहीं वसूलने का अधिकार मिल जाएगा। शिक्षा विभाग अथवा सीबीएसई अथवा राज्य सरकार इन स्कूलों से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं कर सकेंगे। अभिभावकों ने कहा कि यह पत्र स्पष्ट रूप से शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार के नियम 158, सीबीएसई के निर्देश तथा उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना है। नियम 158 में यह स्पष्ट लिखा है कि स्कूल फीस या फण्ड में वृद्धि तभी की जा सकती है जब ऐसा करना न्यायोचित हो। स्कूल को घाटा हो रहा हो तभी यह वृद्धि की जा सकती है। फीस या फण्ड में वृद्धि करने से पूर्व अभिभावकों के प्रतिनिधियों की सहमति लेना भी आवश्यक है। अमान्य मदों में फीस या फण्ड नहीं लिए जा सकते। मंच के अध्यक्ष दिनेश नरूला ने कहा कि अधिकांश निजी स्कूल कई वर्षों में करोड़ों-करोड़ रूपये की लाभ की राशि गैर कानूनी ढंग से स्कूल के बाहर अपनी मनमर्जी से भेज रहे हैं। यह न केवल हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग, सीबीएसई तथा मान्य उच्चतम न्यायालय के आदेश तथा नियमों की स्पष्ट रूप से अवहेलना है एवं दंडनीय अपराध भी है। बैठक में अभिभावकों ने कहा कि विभाग द्वारा जारी यह पत्र सरकार को हरहाल में वापस लेना होगा। अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो वे राज्यभर में जनजागरण आंदोलन चलाने के साथ अमरण अनशन करेंगे। साथ ही सरकार को हाईकोर्ट भी ले जाएंगे। बैठक में पानीपत से जिम्मी चुघ, फरीदाबाद से मनोज शर्मा, खागेश बी. झा तथा कैलाश जोशी, गुरुग्राम से रामफल श्योराण, रेवाड़ी से कैलाश व पंकज, भिवानी से बृजपाल, अंबाला से अजय गोयल व मालिक, सोनीपत से रुस्तम अली, कैथल से महेश, कुरुक्षेत्र से गुरविंदर सिंह, असीम शर्मा, नवीन, नीतिन गुप्ता, गगन सहगल आदि मौजूद रहे।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी स्कूल नहीं लौटा रहा फीस
मंच के महासचिव नवीन अग्रवाल ने कहा कि पिछले शिक्षा सत्र में दयाल सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर सात ने भी जबरन फीस बढ़ाई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने वापिस करने के आदेश दिए हैं, लेकिन स्कूल ने अभी तक अभिभावकों को वह फीस वापिस नहीं की। नवीन ने कहा कि इसके अलावा सीबीएसई ने भी संबंधित स्कूलों को यह स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि वे उच्च न्यायालय के आदेशानुसार बिना पूर्व एनओसी प्राप्त किये फीस न बढ़ाये, लेकिन स्कूलों ने आज तक ऐसी एनओसी राज्य शिक्षा विभाग अथवा सीबीएसई से नहीं ली है। बैठक में दयाल सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर-7 की एक वीडियो क्लिपिंक दिखाई गई, जिसमें फीस न जमा करने वाले बच्चों को एक कमरे में बंद किया गया था। इस सम्बन्ध में सीबीएसई द्वारा की जांच की रिपोर्ट भी साक्ष्य के रूप में सबके सामने प्रस्तुत की गई।
नेताओं के हैं स्कूल, इसलिए मिल रही छूट
अभिभावकों ने कहा कि राज्य के ज्यादातर निजी स्कूल सरकार के नेताओं व उनके संबंधियों के हैं। जिसके कारण ही विभाग इन स्कूलों के मनमानी पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर लूट की छूट दे रहा है। मंच के महासचिव नवीन ने की जिस राज्य में शिक्षा मंत्री के संबंधियों व अन्य मंत्रियों के स्कूल हों, वहां निजी स्कूलों पर सरकार कैसे कंट्रोल कर सकती है। कोई कार्रवाई न होने के कारण अब हमारा विश्वास सरकार से उठ चुका है। अब हम अपनी लड़ाई सडक़ व हाईकोर्ट में लड़ेंगे।
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- अभिभावकों ने कहा, सरकार नियम बदलाव का पत्र वापस ले, नहीं तो हम राज्यस्तरीय आंदोलन कर करेंगे अमरण अनशन, सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट भी जाएंगे अभिभावक
फोटो संख्या-2,3
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। फार्म-6 के नियमों में बदलाव कर निजी स्कूलों को फीस वसूली की छूट देने के विरोध में अभिभावक एकबार फिर से एकजुट होने लगे हैं। इस बार राज्य सरकार पर निजी स्कूलों को लूट की छूट देने का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने आमरण अनशन और आंदोलन की चेतावनी दी है। अभिभावक एकता मंच के बैनर तले मॉडल टाउन स्थित एक होटल में रविवार को आयोजित एक बैठक में राज्य भर से आए सैकड़ों अभिभावकों ने आगे की रणनीति तैयार की। बैठक में राज्य सरकार और शिक्षा अधिकारियों पर कई संगीन आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारी नेताओं के कहने पर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर नियमों में मन मुताबिक बदलाव कर रहे हैं।
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इसका ताजा उदाहरण है शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास द्वारा फार्म-6 के संबंध में जारी पत्र। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर स्कूल संचालकों को यह छूट दी गई है कि वे फार्म-6 में जो भी फीस व फंड लिख देंगे, उन्हें वहीं वसूलने का अधिकार मिल जाएगा। शिक्षा विभाग अथवा सीबीएसई अथवा राज्य सरकार इन स्कूलों से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं कर सकेंगे। अभिभावकों ने कहा कि यह पत्र स्पष्ट रूप से शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार के नियम 158, सीबीएसई के निर्देश तथा उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना है। नियम 158 में यह स्पष्ट लिखा है कि स्कूल फीस या फण्ड में वृद्धि तभी की जा सकती है जब ऐसा करना न्यायोचित हो। स्कूल को घाटा हो रहा हो तभी यह वृद्धि की जा सकती है। फीस या फण्ड में वृद्धि करने से पूर्व अभिभावकों के प्रतिनिधियों की सहमति लेना भी आवश्यक है। अमान्य मदों में फीस या फण्ड नहीं लिए जा सकते। मंच के अध्यक्ष दिनेश नरूला ने कहा कि अधिकांश निजी स्कूल कई वर्षों में करोड़ों-करोड़ रूपये की लाभ की राशि गैर कानूनी ढंग से स्कूल के बाहर अपनी मनमर्जी से भेज रहे हैं। यह न केवल हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग, सीबीएसई तथा मान्य उच्चतम न्यायालय के आदेश तथा नियमों की स्पष्ट रूप से अवहेलना है एवं दंडनीय अपराध भी है। बैठक में अभिभावकों ने कहा कि विभाग द्वारा जारी यह पत्र सरकार को हरहाल में वापस लेना होगा। अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो वे राज्यभर में जनजागरण आंदोलन चलाने के साथ अमरण अनशन करेंगे। साथ ही सरकार को हाईकोर्ट भी ले जाएंगे। बैठक में पानीपत से जिम्मी चुघ, फरीदाबाद से मनोज शर्मा, खागेश बी. झा तथा कैलाश जोशी, गुरुग्राम से रामफल श्योराण, रेवाड़ी से कैलाश व पंकज, भिवानी से बृजपाल, अंबाला से अजय गोयल व मालिक, सोनीपत से रुस्तम अली, कैथल से महेश, कुरुक्षेत्र से गुरविंदर सिंह, असीम शर्मा, नवीन, नीतिन गुप्ता, गगन सहगल आदि मौजूद रहे।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी स्कूल नहीं लौटा रहा फीस
मंच के महासचिव नवीन अग्रवाल ने कहा कि पिछले शिक्षा सत्र में दयाल सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर सात ने भी जबरन फीस बढ़ाई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने वापिस करने के आदेश दिए हैं, लेकिन स्कूल ने अभी तक अभिभावकों को वह फीस वापिस नहीं की। नवीन ने कहा कि इसके अलावा सीबीएसई ने भी संबंधित स्कूलों को यह स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि वे उच्च न्यायालय के आदेशानुसार बिना पूर्व एनओसी प्राप्त किये फीस न बढ़ाये, लेकिन स्कूलों ने आज तक ऐसी एनओसी राज्य शिक्षा विभाग अथवा सीबीएसई से नहीं ली है। बैठक में दयाल सिंह पब्लिक स्कूल सेक्टर-7 की एक वीडियो क्लिपिंक दिखाई गई, जिसमें फीस न जमा करने वाले बच्चों को एक कमरे में बंद किया गया था। इस सम्बन्ध में सीबीएसई द्वारा की जांच की रिपोर्ट भी साक्ष्य के रूप में सबके सामने प्रस्तुत की गई।
नेताओं के हैं स्कूल, इसलिए मिल रही छूट
अभिभावकों ने कहा कि राज्य के ज्यादातर निजी स्कूल सरकार के नेताओं व उनके संबंधियों के हैं। जिसके कारण ही विभाग इन स्कूलों के मनमानी पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर लूट की छूट दे रहा है। मंच के महासचिव नवीन ने की जिस राज्य में शिक्षा मंत्री के संबंधियों व अन्य मंत्रियों के स्कूल हों, वहां निजी स्कूलों पर सरकार कैसे कंट्रोल कर सकती है। कोई कार्रवाई न होने के कारण अब हमारा विश्वास सरकार से उठ चुका है। अब हम अपनी लड़ाई सडक़ व हाईकोर्ट में लड़ेंगे।